वैश्विक शक्ति बनना हैं तो युवाओं का कौशल उन्नयन जरूरी : राज्यपाल

इम्पोर्टेंस आफ डिजिटिल स्किलज फाॅर अ बेटर टूमाॅरो’ पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित

0
23

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने बदलते समय के साथ युवाओं के कौशल उन्नयन पर बल दिया है ताकि वे बाजार की मांग के अनुरूप रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।

राज्यपाल आज राजभवन से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और एडूस्किलज द्वारा आयोजित ‘इम्पोर्टेंस आफ डिजिटिल स्किलज फाॅर अ बेटर टूमाॅरो’ पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में बोल रहे थे।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को प्रदान की जा रही तकनीकी शिक्षा के लिए भारतीय समाज, एडूस्किलज और अन्य वैश्विक शैक्षणिक भागीदारों के माध्यम से सीखने के अवसर प्रदान करने के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध डाटा के अनुसार भारत में कौशल चार प्रतिशत है, जबकि अमेरिका में 34 प्रतिशत और चीन में यह 27 प्रतिशत है। ‘अगर हम वैश्विक शक्ति बनना चाहते हैं तो युवाओं का कौशल उन्नयन जरूरी है’, उन्होंने कहा।

राज्यपाल ने एडूस्किलज द्वारा किए जा रहे हिमाचल के विद्यार्थियों के कौशल विकास पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में 89 प्रतिशत की उच्च साक्षरता दर है लेकिन कौशल प्रतिशत बहुत कम है। इस परिस्थिति में एडूस्किलज द्वारा प्रदान किए जाने वाले निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान से विद्यार्थियों को बड़े औद्योगिक संस्थानों में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

श्री दत्तात्रेय ने कहा कि कोविड-19 से शिक्षा क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस महामारी के दृष्टिगत शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने के कारण डिजिटल लर्निंग माॅडल को अपनाने को बाध्य होना पड़ा। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर अनलाॅक होने के पश्चात सभी क्षेत्रों में कार्य आरम्भ हो चुके हैं, वहीं स्कूल, काॅलेज और विश्वविद्यालयों में स्थिति सामान्य होने में और समय लगेगा।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नीति में वर्तमान शिक्षा कार्य प्रणाली की कमियों को दूर करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कौशल उन्नयन के माध्यम से 21वीं शताब्दी के बदलते भारत को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जा सकेगा।

इससे पूर्व, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और एडूस्किलज के बीच समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया।

इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा के लिए भारतीय समाज के अध्यक्ष डाॅ. प्रतापसिंह काकासो देसाई ने भी अपने मूल्यवान विचार रखे।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर साईंस विभाग के अध्यक्ष प्रोफैसर अमन कुमार शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया और एडुस्किल फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक सुभाजीत जगदेव ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

जीएलएस-इंडिया एंड साउथ एशिया, रेड हेट के निदेशक रमेश पदमनाभन, एडब्ल्यूएस दक्षिण एशिया एमेजाॅन के मुखिया लोकेश मैहरा और सिस्को के कारपोरेट मामले के दक्षिण एशिया के मुखिया मुरुगन वासुदेवन ने भी इस अवसर पर विचार रखे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here