कोरोना मृतक के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचा एमसी … प्रोटोकॉल में नहीं है ,कह कर एमसी ने झाड़ा पल्ला

एसडीएम शहरी नीरज चांदला करेंगी लिखित शिकायत

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TMNewshub. सुमन भट्टाचार्य

प्रदेश में कोविड-19 से 21 वर्षीय मरीज की मौत शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में मंगलवार शाम को हुई। प्रदेश में यह दूसरी जबकि राजधानी शिमला में यह पहली मौत है। युवक का कनलोग के क्रिमिनेशन सेंटर में विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया गया। मरीज के अंतिम संस्कार में जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम शहरी नीरज चांदला स्वयं मौजूद रही लेकिन नगर निगम नदारद रहा।
एमसी के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये से एसडीएम नीरज चांदला काफी नाराज हैं। उन्होंने कहा कि एमसी का इस समय मौजूद न रहना बेहद निराशाजनक है और वह इस संबंध में अपने उच्चाधिकारियों से लिखित में शिकायत करेंगी। उनका कहना है कि शिमला में यह कोरोना से हुई मृत्यु का पहला मामला है ऐसे में निगम का मौजूद न रहना गैरजिम्मेदाराना है। एसडीएम द्वारा बार-बार फोन करने पर एमसी की तरफ से कहा गया कि यह उनके प्रोटोकॉल में नहीं आता है। इस बात से खफा नीरज चांदला ने स्वयं बॉडी रिसीव की और अपनी निगरानी में संस्कार संपन्न करवाया।

उच्चाधिकारियों से की जाएगी लिखित शिकायत

नगर निगम प्रशासन के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये से एसडीएम नीरज चांदला काफी नाराज है और वह इस बारे में उच्चाधिकारियों से लिखित में शिकायत करेंगी। उनका कहना है कि शहर में अभी यह पहला दुःखद मामला है अगर शिमला में स्थिति और खराब होती तो क्या एमसी का रुख ऐसा ही रहता। नीरज चांदला ने कहा कि वो नगर निगम प्रशासन से लगातार बात करती रही लेकिन कोई नहीं पहुंचा, इसलिए उन्हें ही वहां आना पड़़ा जबकि यह एमसी की जिम्मेदारी थी और उन्हें ऐसी आपातकालीन स्तिथि से निपटने के लिए सभी सुरक्षा के तहत पीपीई किटस भी दी गई हैं और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए उन्हें तैयार रहने के निर्देश भी दिये गए हैं बावजूद इसके एमसी का यह रवैया बेहद शर्मनाक है।

पीपीई किट पहने बगैर ही मौजूद रहे

अंतिम संस्कार में मौजूद टीम के पास पीपीई किट भी नहीं थी। स्वयं एसडीएम बिना सुरक्षा के अपनी ड्यूटी निभाती नजर आईं। वह वहां केवल चेहरे पर मास्क पहन कर पहुंची थी। ऐसे मे कोरोना के फैलने का खतरा बहुत ज्यादा हो जाता है। प्रोटोकॉल के अनुसार नगर निगम को कोरोना पॉजिटिव मरीज का अंतिम संस्कार करना था और टीम को पीपीई किट मुहैया करवानी थी लेकिन यह हमारे प्रोटोकॉल में नहीं है कह कर एमसी ने पल्ला झाड़ लिया। एमसी की ओर से सिर्फ सेनेटाईज का काम देखने वाला एक अधिकारी ही मौजूद रहा। प्रोटोकॉल के अनुसार कोरोना पॉजिटिव मरीज की मृत्यु हो जाने पर उसके परिवार के सदस्यों और स्वास्थ्य विभाग की टीम को तुरंत क्वारंटीन किया जाता है। ऐसे में जब शव को नगर निगम की ओर से अंतिम संस्कार किया जाता है पर इस मामले में नगर निगम ने न केवल अपने हाथ पीछे खींच लिए बल्कि अंतिम संस्कार कर रहे लोगों को पीपीई किट तक मुहैया नहीं करवाई। ऐसे में नगर निगम प्रशासन की गंभीरता और संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

आईजीएमसी प्रशासन रहा मौजूद

प्रोटोकॉल के अनुसार जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन को अस्पताल की ओर से सूचना दे दी गई थी आईजीएमसी अस्पताल के एमएस डॉ जनकराज ने अपनी मौजूदगी में पूरी सतर्कता के साथ युवक के शव को प्रशासन के हवाले कर दिया। आईजीएमसी प्रबंधन स्वयं भी शमशानघाट में मौजूद रहा । डॉ जनकराज खुद मौजूद रहे।

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