स्पाइन सर्जरी का तीन महीने का बेड रेस्ट अब हुआ तीन दिन :

'की होल स्पाइन सर्जरी 'से मरीज अब तीन दिन में स्वस्थ, 97-98 % स्पाइन की परेशानी से जूझ रहे मरीज हुए स्वस्थ

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शिमला : आज शिमला में पारस अस्पताल पंचकूला के डॉक्टर्स ने स्पाइन की समस्याओं और बिना चीर फाड़ के आप्रेशन की नई तकनीकों की जानकारी सांझा की। डॉ.अनिल ढींगरा ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि आज चिकित्सा की नई तकनीकों से रीढ़ की हड्डी की समस्या अब गंभीर नहीं रह गई है। आज नई-नई तकनीकों जैसे की होल स्पाइन सर्जरी से मरीज को सिर्फ तीन दिन में आराम मिल जाता है जहां पहले कभी मरीज तीन-तीन महीनों तक बेड रेस्ट पर रहता था। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि ‘की होल स्पाइन सर्जरी ‘में एक छोटे से कट से रीढ़ की हड्डी की समस्याओं को ठीक किया जा रहा है और 97-98% सर्जरी कामयाब हुई हैं।

उन्होंने कहा कि देश का महज 20-30 वर्ष की आयु का हर पांचवा नौजवान रीढ़ की हड्डी की समस्या से पीड़ित है। यह समस्या पहले बुजुर्गों में देखी जाती थी। उन्होंने बताया कि बीते समय दौरान नौजवानों में रीढ़ की हड्डी की समस्याओं में 60 % इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि नौजवानों की जीवन शैली में बदलाव, अधिक वजन, विटामिन-डी, बी-12, कैल्शियम तथा प्रोटीन की कमी नौजवानों में इस समस्या का मुख्य कारण है।

डॉ.ढींगरा ने बताया कि लंबे समय लगातार एक ही और गलत पोजिशन में बैठने से भी रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है, जिससे पीठ तथा गर्दन में बहुत ज्यादा दर्द होता है। उन्होंने बताया कि आज भारत में रीढ़ की सर्जरी की नवीन तकनीक विकसित हुई हैं। डॉ.ढींगरा ने बताया कि किसी समय आप्रेशन से तीन महीनों के लिए बिस्तर पर बैड रेस्ट के लिए कहा जाता था जो आज तीन दिन के आराम तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि ऐसा ‘की होल सर्जरी’ तकनीक से ही संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि जो मरीज दवाईयों या फिजियोथैरेपी आदि से ठीक नहीं होते और जिनके हाथों-पैरों में कमजोरी और सुन्नापन महसूस होता है, उनके लिए ऐसी सर्जरी की सिफारिश की जाती है। इस तकनीक में चीर-फाड़ नहीं करनी पड़ती। उन्होंने बताया कि पारस अस्पताल में स्पाइन सर्जरी करवाने के लिए मरीज श्रीनगर, लेह-लदाख, कानपुर, नैनीताल, भठिंडा आदि से भी पहुंच रहे हैं ।

बदलें जीवनशैली रखें सुरक्षित स्पाइन:

डॉ.राजीव गर्ग ने इस मौके पर कहा कि हमारी रीढ़ की हड्डी, छोटे-छोटे मनकों से बनी होती है, जिनमें छोटी-छोटी डिस्कें होती हैं जो किसी भी तरह के झटके को सहन करने का काम करती है। यह मानव शरीर का आधार है इसीलिए इसका ख्याल रखना जरूरी है। इसके लिए व्यक्ति को सही पोजिशन में बैठना चाहिए।गलत बैठने और लगातार दबाव पड़ने से यह डिस्के खुशक रहने लग जाती हैं, जिस कारण डिस्क में दरारें आने और स्पाइनल कोर्ड पर दबाव पड़ता है। इससे टांगों तथा कमर में बहुत तेज दर्द होता है। डॉ गर्ग ने बताया कि हम अपनी जीवन शैली बदलकर इस समस्या से बच सकते हैं और अपनी स्पाइन को सुरक्षित रख सकते हैं।

इस मौके पर पारस अस्पताल के फैसलिटी डायरेक्टर आशीष चड्ढा ने बताया कि अस्पताल में रीढ़ की हड्डी के इलाज के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल के पास हर तरह की न्यूरो सर्जरी के लिए सभी आधुनिक सामान तथा मशीनें मौजूद हैं।


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