सुप्रीम कोर्ट का फरमान: मंत्री अधिकारी नहीं रहेंगे बी.सी.सी.आई बोर्ड में

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Lodha's big blow to BCCI

सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी की ज़्यादातर सिफ़ारिशें मानते हुए बीसीसीआई को एक बड़ा झटका दिया है। बीसीसीआई में अब कोई भी मंत्री या ऑफ़िसर किसी पद पर काम नहीं कर सकता। साथ ही बीसीसीआई में अब एक व्यक्ति, एक पद कानून होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फरमान पर एक नजर:

  • कोर्ट ने कहा BCCI लोढ़ा पैनल की सिफारिशें 6 महीने में लागू करे
  • अब बोर्ड में नहीं मंत्री और अधिकारी शामिल हो पाएंगे, राजनेताओं पर कोई पाबंदी नहीं
  • बीसीसीआई में अब एक व्यक्ति-एक पद का नियम लागू होगा
  • BCCI में अधिकारियों की उम्र सीमा 70 साल होगी
  • गुजरात-महाराष्ट्र में वोटिंग होगी रोटेशनल, गुजरात और महाराष्ट्र में 3-3 हैं क्रिकेट संघ, बाकी सभी राज्यों में एक-एक क्रिकेट संघ हैं
  • खिलाड़ियों का अपना संघ होगा
  • ओवर के बीच में विज्ञापन पर BCCI ब्रॉडकास्टर से बात कर हल निकालेगा
  • BCCI में RTI का दायरा हो और क्या सट्टेबाजी वैध हो, यह संसद तय करे

लोढ़ा कमेटी की मुख्य सिफारिशें:

  • कमेटी की पहली सिफारिश में कोई भी व्यक्ति 70 साल की उम्र के बाद बीसीसीआई या राज्य संघ पदाधिकारी नहीं बन सकता।
  • लोढ़ा समिति का सबसे अहम सुझाव है कि एक राज्य संघ का एक मत होगा और अन्य को एसोसिएट सदस्य के रूप में रेलीगेट किया जाएगा।
  • आईपीएल और बीसीसीआई के लिए अलग-अलग गवर्निंग काउंसिल हों। इसके अलावा समिति ने आईपीएल गवर्निंग काउंसिल को
  • सीमित अधिकार दिए जाने का भी सुझाव दिया है।
  • समिति ने बीसीसीआई पदाधिकारियों के चयन के लिए मानकों का भी सुझाव दिया है। उनका कहना है कि उन्हें मंत्री या सरकारी अधिकारी नहीं होना चाहिए, और वे नौ साल अथवा तीन कार्यकाल तक बीसीसीआई के किसी भी पद पर न रहे हों।
  • लोढ़ा कमेटी का यह भी सुझाव है कि बीसीसीआई के किसी भी पदाधिकारी को लगातार दो से ज़्यादा कार्यकाल नहीं दिए जाने चाहिए।
  • लोढ़ा समिति की रिपोर्ट में खिलाड़ियों के एसोसिएशन के गठन तथा स्थापना का भी प्रस्ताव है।
  • समिति का सुझाव है कि बीसीसीआई को सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में लाया जाना चाहिए।
  • समिति के मुताबिक, बीसीसीआई के क्रिकेट से जुड़े मामलों का निपटारा पूर्व खिलाड़ियों को ही करना चाहिए, जबकि गैर-क्रिकेटीय मसलों पर फैसले छह सहायक प्रबंधकों तथा दो समितियों की मदद से सीईओ करेंगे।

इस तरह से हुई मामले की सुनवाई:

  • सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई में सुधार से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए जनवरी, 2015 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को बीसीसीआई की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए उसमें सुधार और पारदर्शिता के लिए आवश्यक सुझाव देने थे।
  • 4 जनवरी, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय जस्टिस लोढ़ा पैनल की सिफारिशें सार्वजनिक कीं। सिफारिशें मुख्य रूप से बेहतर प्रशासन के लिए संरचनात्मक बदलाव पर केंद्रित थीं। इनमें पदाधिकारियों की आयु सीमा और कार्यकाल तय करने, एक राज्य-एक वोट, जवाबदेही और बीसीसीआई के फंड के उचित बंटवारे आदि से संबंधित सिफारिशें शामिल थीं।
  • 4 फरवरी, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को जस्टिस लोढ़ा पैनल की रिपोर्ट को लागू करने के संबंध में अपना रुख स्पष्ट करने के लिए 3 मार्च की डेडलाइन तय कर दी।
  • 2 मार्च को बीसीसीआई ने अपना शपथपत्र दिया। हालांकि इस बीच बोर्ड ने लोढ़ा पैनल की कुछ सिफारिशें लागू भी कर दीं। बोर्ड ने पहली बार सीईओ (राहुल जौहरी) और लोकपाल (जस्टिस एपी शाह) की नियुक्ति की और हितों के टकराव के मामले सुलझाए।
  • बोर्ड ने एक राज्य-एक वोट के प्रस्ताव और टेस्ट-वनडे मैचों के लाइव टेलीकास्ट के दौरान विज्ञापनों को सीमित करने के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया। 3 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई की मांगों पर नाराजगी जताई। लाइव मैचों के दौरान विज्ञापनों के मामले पर कोर्ट ने सख्त रुख बनाए रखा।
  • 5 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने संबद्ध इकाइयों को फंड वितरित करने के बीसीसीआई के तरीके पर बोर्ड को फटकार लगाई। फंड के असमान वितरण, उत्तर-पूर्वी राज्यों परकम ध्यान देने और वोट हासिल करने के लिए पैसे का उपयोग किेए जाने संबंधी बातों पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
  • गर्मी की छुट्टियों से पहले 3 मई को सर्वोच्च कोर्ट ने कहा था कि बीसीसीआई से संबद्ध एसोसिएशनों को लोढ़ा पैनल की ओर से सुझाए गए सुधारों को मानना ही होगा।
  • इसके बाद 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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