लाॅकडाउन का एक साल

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24 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित कर रात 12 बजे से पूरे देश में 21 दिन के पूर्ण लाॅकडाउन की घोषणा की थी


चीन के वुहान शहर से 16 माह पहले शुरू हुई कोविड महामारी को लेकर भी पूरी दुनिया में चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। कोरोना से लड़ने में सभी देश अपने स्तर पर काम कर रहे हैं और एक माह पहले तक भारत समेत कई देशों ने इसमें कुछ हद तक नियंत्रण पाया भी लिया था। लेकिन अब पिछले कुछ दिनों से इस महामारी ने फिर से रफ्तार पकड़ी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 24 मार्च 2021, सुबह 8 बजे तक जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान देश में 47,262 नए मामले सामने आए हैं। जिनमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 28,699 नए मामले दर्ज किए गए हैं। अभी तक पिछले एक साल में महाराष्ट्र में 25,33,026 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 22,47,495 ठीक हो चुके हैं। दूसरे नंबर पर केरल है जहाँ अब तक 11,07,452 मामले सामने आ चुके हैं। 25 मार्च को भारत में लाॅकडाउन का एक साल पूरा हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय महामारी कोविड-19 के कारण हिंदुस्तान की जनता को पहली बार लाॅकडाउन शब्द न सिर्फ सुनने को मिला बल्कि इसे पहली बार झेला भी। भारत में कोविड 19 के मामलों को बढ़ते मामलों के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले तो 22 मार्च 2020 को रविवार के दिन जनता कफर््यू का आह्वाहन किया। इसके बाद कोरोना के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नंवंबर 2016 की नोटबंदी की घोषणा के बाद दूसरी बार देश की जनता को सके बाद दूसरा सबसे बड़ा फैसला लिया। नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च की रात को देश की जनता को संबोधित करते हुए रात 12 बजे से देश में आगामी 21 दिनों के पूर्ण लाॅकडाउन की घोषणा की और अगले दिन से देश जैसे थम सा गया।
अब जब लाॅकडाउन को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक इसका असर अर्थव्यवस्था, परिवहन, रोजगार और सबसे अधिक मजदूरों की जिंदगियों में देखने को मिल रहा है।

कोरोना की दस्तक


कोरोना वायरस संक्रमण का मामला सबसे पहला मामला चीन के वुहान शहर में देखने को मिला। इस शहर से यहा फरवरी तक दुनिया के 100 से अधिक देशों में फैल गया। और फरवरी आते-आते दुनिया भर के देशों ने चीन से अपने नागरिकों को वापस लाना शुरू कर दिया था। जिसमें भारत भी शामिल था। भारत ने 27 फरवरी को चीन से अपने 759 नागरिकों को एयरलिफ्ट किया जिसमें 43 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। मार्च तक इस वायरस का प्रसार इतना बड़ गया कि भारत ने 6 मार्च को विदेष से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग शरू कर दी।
इसके बाद 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया। इसके अगले ही दिन 12 मार्च को भारत में कोरोना संक्रमण से पहली मौत की पुष्टि हुई और इसी दिन स्टॉक मार्केट भी धराशायी हो गया। बीएसई सेंसेक्स में 8.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और निफ्टी 9 प्रतिशत तक गिर गया। वहीं इसके एक सप्ताह बाद ही भारत के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की पहचान करने में कामयाब रहे और भारत सरकार ने 17 मार्च को निजी लैब्स को वायरस के टेस्ट करने की अनुमति दे दी। राज्यों में कोरोना के बढ़ते प्रसार को देखते हुए राज्यों ने अपने हिसाब से पाबंदियां लगाना शुरू कर दिया। 20 मार्च को हिमाचल प्रदेश में पहली बार कांगड़ा जिला में कोरोना का पहला मामला देखा गया। इसके बाद धर्मशाला में तिब्बतियन मूल के व्यक्ति की पहली मौत हुई थी।

लाॅकडाउन से अनलाॅक की ओर


25 मार्च को लाॅकडाउन लगने के बाद 28 मार्च को भारत में पहले 1,000 मामलों की पुष्टि हुई थी और फिर पहले लाॅकडाउन की अवधी पूरे होने तक 14 अप्रैल तक ही 10 हजार मामले सामने आ चुके थे। इसे देखते हुए नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाने की घोषणा की थी। वहीं इसी दौरान 20 अप्रैल को देश में प्लाजमा थेरेपी के जरिए कोरना से ठीक होने का पहला मामला सामने आया। 1 मई को प्रधानमंत्री ने एक बार फिर लाॅकडाउन को 12 मई तक बढ़ा दिया गया। जबकि 19 मई आते-आते देश में कोरोना संक्रमण के मामले एक लाख को पार कर गए थे। बार-बार लाॅकडाउन की अवधी बढ़ने के साथ देश की जनता ने पाबंदियों के साथ जीना तो सीख लिया लेकिन इसका लोगों की मानसिक अवस्था पर गहरा असर पड़ रहा था। ऐसे मानसिक तनाव के बीच में आईसीएमआर की ओर से एक राहत भरी खबर आई जिसमें आईसीएमआर ने भारत बॉयोटेक के साथ मिलकर कोरोना वैक्सीन बनाने की घोषणा की।
मई माह के अंत तक सरकार कुछ रियायतें देने शुरू की और जून में भारत ने लॉकडाउन से निकलना शुरू किया। 1 जून को भारत सरकार ने अनलॉक-1 की गाइडलाइन घोषित कर दीं। 10 जून को भारत में पहली बार कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों की संख्या संक्रमित लोगों से ज्यादा हो गई। 26 जून को भारत ने संक्रमण के पाँच लाख मामलों का आंकड़ा पार कर लिया जबकि 16 जुलाई को 10 लाख मामलों का आंकड़ा पार हो गया। भारत सरकार ने जुलाई के पहले दिन अनलॉक 2.0 के दिशानिर्देश जारी किए। लेकिन भारत में संक्रमण बढ़ता ही जा रहा था। 6 जुलाई को भारत दुनिया का तीसरा सबसे संक्रमित देश बन गया।

वैक्सीन के लिए प्रयास तेज


दुनिया भर में फैली इस महामारी पर काबू पाने के लिए शोधकर्ताओं ने वैक्सीन निर्माण की दिशा में प्रयास तेज कर दिए। इसी के चलते 15 जुलाई को भारत बायोटेक की देश में बनी कोवैक्सिन वैक्सीन का पहले चरण का क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया। वहीं 3 अगस्त को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को डीसीजीआई से दूसरे और तीसरे चरण का ट्रायल करने की अनुमति मिल गई। 26 अगस्त को सीरम इंस्टीट्यूट ने अपनी वैक्सीन कोवीशील्ड का भारत में ट्रायल शुरू कर दिया। वहीं सितंबर माह में भारत में कोविड की दूसरी लहर देखी गई और इस दौरान रोजाना सामने आ रहे मामलों का आँकड़ा एक लाख के करीब पहुंच गया। 16 जुलाई से 15 सितंबर के बीच भारत में संक्रमण के 40 लाख से अधिक नए मामले सामने आए। अक्टूबर आते-आते संक्रमण के नए मामलों की संख्या में तेजी से गिरावट देखी गई और वैक्सीन आने का विश्वास मजबूत हो रहा था।
भारत में 18 दिसंबर को कोरोना संक्रमण के मामलों का आँकड़ा 1 करोड़ को पार कर गया। पहला मामला सामने आने के 323 दिन बाद भारत में संक्रमण के मामलों की संख्या एक करोड़ को पार कर गई। इसके बाद 16 फरवरी 2021 को भारत में सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू हुआ और अभी तक देशभर में 5 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। वहीं हिमाचल प्रदेश में सवा चार लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।

हिमाचल में इन महिनों में बिगड़े हालात


हिमाचल प्रदेश में पिछले साल मार्च माह में कुल 3 कोरोना के केस थे वहीं 24 मार्च 2021 तक इनकी संख्या 61142 पहुंच गई है। इनमें से 1014 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि अभी भी 1495 लोग का ईलाज प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। कोरोना से प्रभावित होने वाले सबसे अधिक जिलों में शिमला और मंडी जिला है। जहां पर कोरोना प्रभावितों की संख्या 10 हजार से उपर पहुंच चुकी है। हिमाचल में अभी तक 1213047 लोगों की कोरोना जांच की गई है। हिमाचल में कोरोना का पहला मामला मार्च 2020 में आया था और इस महिने में कुल 3 कोरोना पाॅजीटीव पाए गए थे। जबकि अप्रैल में 40, मई में 331, जून में 953, जुलाई में 2564, अगस्त में 6116, सितंबर में 14976, अक्टूबर में 22059, नवंबर में 40518, दिसंबर में 55114, जनवरी 2021 में 57114, फरवरी में 58645 मार्च में अभी तक कुल 61035 लोगों को कोरोना पाजीटिव पाया गया है।


कोरोनाकाल में हिमाचल सूर्खियों में


कोरोनाकाल के दौरान हिमाचल प्रदेश कई बार सूर्खियों में रहा। सरकार ने 25 मार्च 2020 को प्रदेश की सीमाएं बंद करने के साथ एक जिले से दूसरे जिले को जोड़ने वाली सीमाओं को भी बंद कर दिया था। इस दौरान यदि किसी व्यक्ति को दूसरे स्थान में जाना हो तो उसे प्रशासन की ओर से अनुमति दी जा रही थी। इसके बाद 31 मार्च को इस सेवा को बंद कर दिया गया और केवल आपातकालिन सेवाओं में जुटे लोगों को ही आने जाने की सुविधा प्रदान की गई। वहीं हिमाचल में कई स्थानों में सैकडों किलोमिटर का सफर पैदल तय कर पहुंच रहे लोगों को देखते हुए हिमाचल सरकार ने बाहरी राज्यों में फंसे लोगों को वापस लाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया। जिसके चलते 1 लाख से अधिक लोगों को प्रदेश में लाया गया। इसके बाद हमीरपुर और लाहौल स्पीति जिला पूरे देश में कोरोना का हाॅटस्पाॅट बनकर उभरा। कोरोना काल में सेब बागवानी पर असर न पड़े इसके लिए सरकार की ओर से नेपाली लेबर को लाने के लिए भी विशेष इंतजाम करने पड़े। कोरोना काल में स्थिति से निपटने के लिए कई बार केंद्र सरकार ने तो कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल सरकार की सराहना की। चाहे बात आंगबाडी और आशा वर्करों के माध्यम से एक्टीव केस फांइडिंग अभियान को लेकर हो या फिर आॅनलाइन कोविड पास को जारी करने की इसको लेकर प्रदेश के प्रयासों की सराहना हुई है। लेकिन अब एक बार फिर से हिमाचल में कोरोना के केस बड़ने का सिलसिला शुरू हुआ है। जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है।

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