शीतोषण फलों व पौधों को उगाने की दी जानकारी..

शीतोष्ण फलों तथा गेहूं व जौ का वैज्ञानिक उत्पाद" तकनीकी विषय पर अनुसूचित जाति योजना के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, शिमला के बागवानी शोध फार्म, ढांडा में “शीतोष्ण फलों तथा गेहूं व जौ का वैज्ञानिक उत्पाद” तकनीकी विषय पर अनुसूचित जाति योजना के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत डॉ.कल्लोल कुमार प्रामाणिक, अध्यक्ष, क्षेत्रीय केंद्र ददारा मुख्यातिथि निशांत ठाकुर ने की। डॉ.कल्लोल कुमार प्रामाणिक ने इस कैंद्र में चल रहे शोध कार्य से सबको लाभांवित होने के लिए आग्रह किया। उन्होंने किसानों और बागवानों को शीतोष्ण फलों तथा गेहूं व जौ की वैज्ञानिक तरीके से खेती करके आय बढ़ाने के लिये प्रेरित किया ताकि उनकी आय 2022 तक दो गुणी हो सके। इसके लिए उन्नत पौधे बीज/ मूलवृन्त लगाना चाहिए और बागीचों के प्रबंधन के ऊपर ध्यान देना चाहिए ताकि पोषण युक्त तथा अधिक से अधिक पैदावार की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि इस परियोजना के पीछे सरकार का लक्ष्य यह है कि इस परियोजना के तहत अनुसूचित जाति के किसानों व बागवानों को फलों के पौधे, उनको बचाने हेतु शैडिंग नेट व रसायन, गार्डन टूल्ज आदि उपलब्ध करवाए जाए।
मुख्यातिथि निशांत ठाकुर ने बताया कि इस तरह के सरकारी प्रोग्रामों को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिये ताकि किसानों की आय में इजाफा हो सके । उन्होंने इस क्षेत्र में भारतीय कषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र शिमला की सराहना की। उन्होंने विज्ञान, प्रयोगिकी एवं पर्यावरण के बारे में भी सुझाव दिए। उन्होनें इस शोध केंद्र से शीतोष्ण फलों तथा गोहूं व जौ की खेती करने का सूचना उपलब्ध करवाने की सलाह दी। इस संबंध में उन्होंने प्रशिक्षण पुस्तिका का भी विमोचन किया।
डॉ.धर्म पाल, प्रधान वैज्ञानिक ने किसानों व बागवानों को जौ और गेंहू की अधिक पैदावार और उसकी वैज्ञानिक तरीके से कैसे देख रेख की जानी चाहिए जिससे की अधिक पैदावार की जा सके इसके बारे में जानकारी दी। डॉ.अरुण कुमार शुक्ला, प्रधान वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक तरीके से शीतोषण फलों के पौधों को सही तरीके से उगाने के बारे में प्रकाश डाला उन्होने कांट छाट, जैविक व रसायनिक खाद के बारे में भी जानकारी दी। डॉ. मधु पटियाल ने उत्पादन को वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित तरीके से करने के बारे में बताया तथा अधिक से अधिक लाभ उठाने के सूझाव दिए। वहीं डॉ. संतोष वाटपाडे ने पौधों को बिमारियों, कीट पतंगों तथा अन्य खतरों से कैसे बचाया जाता है और कौन-2 सी दवाईयां और उनके उपयोग के बारे में जानकारी दी। मीरा ठाकुर, प्रधान, चायली पंचायत ने इस प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से अधिक से अधिक लाभ उठाने के सुझाव दिए। इस प्रशिक्षण शिविर में 30 से अधिक पुरुष व महिला किसानों और बागवानों ने भाग लिया। इस केंद्र के तकनीकी स्टाफ द्वारा किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण जैसे कि गड्ढे बनाना, खाद को मिलाना व कांट- छांट के बारे में जानकारी दी गई।

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