नर्सिंग सुपरिटेडेंट शिष्टा गौतम की अलग पहचान – कुलदीप चंदेल

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शिखा गौतम

सुपरिटेडेंट शिष्टा गौतम

सिस्टर विलसन , संतोष , इन्द्रा वर्मा , संतोष नड्डा,मधु गौतम आदि एक लंबी फेहरिस्त है , बिलासपुर जिला अस्पताल में मैट्रन के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकीं योग्य महिलाओं की । जिन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय देकर इस अस्पताल को बुलंदियों पर पहुंचाने में अपना योगदान दिया ।

इन दिनों शिष्टा गौतम नर्सिंग सुपरीटेंडेंट के पद पर कार्यरत है । सिस्टर गौतम इसी बिलासपुर की रहने वाली हैं । स्कूल और कॉलेज के समय हॉकी की बेहतरीन खिलाड़ी रह चुकी है । पत्रकार के नाते उनके खेल जीवन को भी कवर किया है । वह फुलबैक के रुप में खेला करती थीं । मजाल क्या कोई विरोधी टीम का फारवर्ड खिलाड़ी गेंद लेकर उसके होते हुए गोल दाग दे । या बाल आगे जाएगा या खिलाड़ी । ऐसा शिष्टा के बारे में उस समय कहा जाता था । और जब स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यभार संभाला तो भी अपने व्यवहार से सबको प्रभावित किया है । कुशल और सहानुभूति पूर्ण व्यवहार ही व्यक्ति की पहचान हुआ करती है ।

हमने इसी अस्पताल में सिस्टर विल्सन को भी स्टाफ नर्स और मैट्रन के रूप में देखा है । सिस्टर विल्सन के पति बाबू विलसन एक उच्च कोटि के कलाकार थे । बिलासपुर के राम नाटक में वह मंच सज्जा आदि किया करते थे ।उनका बेटा रवि विल्सन आजकल इंग्लैंड में है । एक दिन यूं ही रवि से बातचीत हुई कि मैं बिलासपुर अस्पताल की मैट्रनों बारे कुछ लिखना चाहता हूं , तो आप अपनी माता जी का एक फोटो भेजें । उन्होंने फोटो भेजा और बताया कि 1952,53 में इटारसी मध्य प्रदेश से उनके माता-पिता गोबिंद सागर झील में डूबे पुराने बिलासपुर शहर में आए थे ।

1955 में रवि इस दुनिया में आया था । पुराने शहर में खड़यालु में रहते थे । सिस्टर विलसन 1984, 85 तक बिलासपुर में रही । स्टाफ नर्स ,वार्ड सिस्टम , नर्सिंग स्कूल में ट्यूटर के पद पर कार्यरत रही । बहुत ही हंसमुख मिलनसार स्वभाव की महिला थीं । सिस्टर विल्सन से पहले बिलासपुर में संतोष कुमारी हुआ करती थी । वह भी मैट्रन थी । उसे आमतौर पर तोती के रूप में जाना जाता था । तोती के रूप में उनकी पहचान थी । बहुत ही अक्खड़ स्वभाव की थी । और सभी उनसे डरते थे ।मजाल क्या अस्पताल की सफाई व्यवस्था में कोई कोताही कर दे । फिर इंदिरा वर्मा , संतोष नड्डा ,
मधु गौतम आदि को भी देखा । लेकिन आजकल नर्सिंग सुपरीटेंडेंट का कार्यभार शिष्टा गौतम ने संभाल रखा है । या एक नया पद सृजन हुआ है । अब तो अस्पताल तीन मंजिला हो चुका है । पहले इतनी बड़ी इमारत नहीं थी । अस्पताल के मेनगेट पर इमरजेंसी की इमारत बनी है । सीएमओ ऑफिस ऊपर चला गया है। यानि अस्पताल का विस्तार ही बहुत हुआ है । ऐसे में एक मैट्रन को सारे अस्पताल का इंतजाम देखना , सफाई व्यवस्था का ध्यान रखना , सभी नर्सों , मिडवाइफ आदि के बारे में जानकारी रखनी ,कब किसको छुट्टी पर भेजना है ? यह सब सिस्टर गौतम इन दिनों देख रही है ।
नर्सिंग सुपरिटेडेंट का कार्य प्रशासनिक कार्य है । सब का ख्याल रखना पड़ता है । अपने अधीनस्थ सभी कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाना , उनसे हर समय तादात्म्य बना कर रखना होता है । तभी इतने बड़े अस्पताल की सफाई व्यवस्था आदि मेंटेन हो पाती है । सिस्टर गौतम यह काम बखूबी कर रही है । जिस तरह खिलाड़ी टीम भावना से बेहतर खेल खेल कर अपनी टीम को विजय श्री दिलवाते हैं ,उसी भावना से शिष्टा गौतम को काम करते देखा जाता है । इनके उज्जवल भविष्य हेतु शुभकामनाएं ।

नोट…. राकेश चंदेल जी से नई जानकारी मिली कि शिष्टा गौतम नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट है । मैट्रन के पद पर मीना चंदेल और उर्मिल चौहान हैं । हमें इस नए परिवर्तन का पता ही नहीं था। कृपया क्षमा करें। पोस्ट केवल शिष्टा गौतम के व्यक्तित्व को लेकर लिखी है न कि किसी को नीचा दिखाने के लिए। किसी को कमतर आंकना हमारा स्वभाव नहीं है।

पोस्ट साभार

कुलदीप चंदेल स्वतंत्र लेखक

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