अध्यापक और छात्र समेत कुलपति फर्जी डिग्री धारक..एबीवीपी

एबीवीपी ने नियामक आयोग को सौंपा ज्ञापन, छात्रों को दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरित करने की रखी मांग

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एबीवीपी ने निजी विश्वविद्यालय में हुई फर्जी डिग्रियों की धांधली को लेकर कड़ा रोष व्यक्त किया है। फर्जी डिग्री मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की प्रदेश इकाई ने नियामक आयोग के सदस्य एस.पी.कटयाल को यूनिवर्सिटी मानव भारती और इंडस के दाखिले और सभी कोर्स की मान्यता रद्द करने की भी मांग रखते हुए ज्ञापन सौंपा। इकाई ने मानव भारती विश्वद्यालय में वर्तमान समय में पढ़ाई कर रहे छात्रों को शीघ्र ही किसी अन्य विश्वद्यालय में स्थानांतरित किए जाने की मांग की।
विद्यार्थी परिषद ने कहा कि जिन भी यूनिवर्सिटीज में बिना मान्यता की किसी भी विषय की डिग्री गैर कानूनी तरीके से दी गई है उसे फर्जी घोषित किया जाए और अगर इन डिग्रियों के बदले कोई स्कॉलरशिप निजी विश्वविद्यालय ने मांगी है या ली है उसे काले धन के रूप में माना जाए साथ ही इन सभी डिग्रियों को अवैध घोषित किया जाए। इसके अलावा  इकाई ने यूनिवर्सिटी पर अपराधिक मामले दर्ज करने और इन दोनों निजी विश्वविद्यालय पर सरकार एडमिनिस्ट्रेटर नियुुक्ति करनेे की माँग कि ताकि छात्रों का भविष्य बर्बाद ना हो।

इस संबंध में प्रांत मंत्री राहुल राणा ने कहा कि निजी विश्वविद्यालय में पीएचडी और रिसर्च वर्क की भी जांच होनी चाहिए कि कहीं पीएचडी डिस्टेंस मोड पर यूजीसी के नियमों के खिलाफ तो नहीं करवाई जा रही है। राणा ने आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में अध्यापक और छात्र समेत उनके कुलपति भी फर्जी डिग्री धारक हैं। विश्वविद्यालय में कुलपति ने भी 3-3 डिग्रियां ली हैं जो सरासर गलत है।

विद्यार्थी परिषद ने कहा की 3 मार्च को मानव भारती पर एफ आई आर हुई और और 9 मार्च को इंडस यूनिवर्सिटी पर एफ आई आर हुई जहां मानव भारती के पास कई फर्जी डिग्रियां पकड़ी गई वही इंडस यूनिवर्सिटी में 7 वर्ष से एक अध्यापक फर्जी डिग्री के साथ पढ़ा रहा था और इंडस यूनिवर्सिटी ने अपने रेगुलर चार कर्मियों को रेगुलर कोर्स की चार फर्जी डिग्रियां दे दी थी। इंडस यूनिवर्सिटी की मैनेजमेंट ने  खुद प्रेस नोट जारी करके कहा कि इंडस डिग्रियां कॉरेस्पोंडेंस पार्ट टाइम मोड इवनिंग क्लासेस डिस्टेंस एजुकेशन के रूप में देता है मगर ऐसा करने की अनुमति इंडस को कभी नहीं थी और ना ही इसकी मान्यता उन्हें कभी प्रदेश सरकार से मिली थी और अध्यापकों को यह तक कहा कि जो लोग यहां पर काम कर रहे हैं उन्हें बिना कक्षा लगाए हाजिरी दी जाए ताकि वह अपनी परीक्षाएं दे सकें जोकि सरेआम धांधली है ऐसे में यह विषय प्रदेश के लिए शर्म की बात है।     

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