देवभूमि में सपने संजोए बैठा है खटटर

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Dhumal Vs Nadda
प्रदेश भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर प्रो. प्रेम कुमार धूमल और जेपी नडडा का नाम चर्चा में है। ऐसा सभी सोच रहे है। लेकिन एक तीसरा चेहरा भी है जोकि पर्दे के पीछे रह कर राजनीति इच्छाओं के सपने संजोए बैठा है। ये नेता अपने आप को खटटर की तरह मान रहा है, जिस तरह मनोहर खटटर बिलकुल नया राजनीतिक चेहरा था मुख्यमंत्री पद के लिए, उसी तरह उक्त भाजपा का नेता भी मुख्यमंत्री बनने के फील्डिंग सजाने में लगा है। हालांकि सबसे बड़ा पल्स प्प्वाइंट इस नेता यह है कि संघ में अच्छी पैठ रखता है, यहीं नहीं इसी नेता को संगठन का कर्ताधर्ता माना जाता है, भाजपा के नेता गर्दन घुमा कर चुपके से चर्चा करते है कि यहीं नेता देहरा से पहली बार विधायक का चुनाव लडऩे वाला है। यहीं से जीत कर आने के बाद संघ के दम मुख्यमंत्री बनना चाहता है। लेकिन प्रदेश में ऐसा लाजिमी ही नहीं है।

उक्त नेता ने धर्मशाला नगर निगम में अपना पहला प्रेक्टिकल किया था। इस प्रेक्टिकल में पूरी तरह असफल रहा था। उसके बाद प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी का गठन किया। इसमें भी कुछ महत्त्वपूर्ण पदों पर अपनी मनमानी चलाई और उसमे कुछ हद तक सफल भी रहा, यदि ऐसे नेताओं को पार्टी का चेहरा बनाने का प्रयास अगर संघ द्वारा किया जा रहा है, तो भाजपा को हिमाचल में भयंकर परिणाम भुक्तना पड़ेंगे और हाँ मेरे हिसाब से तो ये हिटलर की जीवनी रोज़ पड़ते होंगे, और कार्यकर्ताओं के बीच जानबूझ कर फासला बनाए रखते हैं,लेकिन बड़े नेताओं से मधुर संबध ज़रूर रखते है। अभी दुबक कर बैठे उक्त नेता अपने पूरे पत्ते खोले नहीं है। लेकिन कुछ पत्ते फैंक कर साबित कर दिया है कि मुख्यंमत्री जनता की उम्मीदों के मुताबिक नहीं होगा,बल्कि संगठन के मुताबिक होगा। वहीं जनता तो मुख्यमंत्री के चेहरे को देखकर वोट देती है, न कि पार्टी को विचारधारा को आधार मानकर, अगर उक्त नेता मुख्यमंत्री बन गया, तो कांगड़ा से सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड उनके जेब में चला जाएगा। लेकिन देहरा के भूमि नेता उक्त नेता को अपना मंजा लगाने देंगे। या फिर जुगाड़ की आड़ में मुख्यमंत्री बनेगा। इसका फैसला तो आने वाले समय ही करेगा।

शिमला में करों उनसे बात
संगठन में किसी एंट्री करवानी है या फिर किसी की छुटटी तो दीपकमल के एक कार्यालय का ही पता दिया जाता है। हर नेता उक्त नेता से मिलने के लिए बोलता है। यहां तक अगर 2017 में टिकट चाहिए। तो उक्त नेता ही तय करेगा। यानी भाजपा नडडा धूमल के नाम भले ही जितना मर्जी जप ले । लेकिन तीसरा नाम भी है जोकि पर्दे के पीछे गोटियां फैंके जा रहे है।

नडडा की कार्यकर्ताओं से दूरी
नडडा के नाम को लेकर एंटी धूमल गुट तो अच्छा खुश हो रहा है और साथ ही कांग्रेस का एक धड़ा भी दिवाली मनाता फिरता है लेकिन अभी तक जब भी नडडा हिमाचल में आए तो केवल केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर, कार्यकर्ताओं के साथ बैठके करने के लिए नहीं है। प्रदेश की भाजपा बैठक में बड़े नेता की तरह आते है, और जाते है,जबकि दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री मंडल स्तर की बैठकों में कार्यकर्ता के बीच जा रहे है, ऐसे में अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि कौन किस तरह काम कर रहा है।

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