खाली कक्षाओं के साथ खुले राजधानी के स्कूल

कक्षाओं में ना के बराबर रही छात्रों की उपस्थिति, जारी एडवाइजरी के तहत स्कूल प्रबंधन की ओर से किए गए थे पूरे प्रबंध, थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद ही छात्रों , शिक्षकों और कर्मचारियों को दिया गया स्कूल कैंपस में प्रवेश

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राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पोर्टमोर में कक्षा लगाती छात्राएं

प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में स्कूल खोलने के निर्णय के अंतर्गत आज प्रदेश भर में छह माह के बाद शिक्षण संस्थान खुल गए हैं। शिक्षण संस्थानों में सिर्फ 9वीं से 12 वीं कक्षाओं को ही खोला गया है लेकिन स्कूल खुलने के बावजूद भी आज अधिकतर स्कूलों में कक्षाएं खाली ही रहीं या फिर 5 या 6 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। कोरोना के चलते स्कूल में छात्रों की उपस्थिति ना के बराबर रही। राजधानी शिमला के शिक्षण संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति 10 प्रतिशत भी नहीं रही। जहां कुछ स्कूलों में छात्रों की उपस्तिथि शून्य रही तो वहीं कुछ स्कूलों में 15 से 20 छात्र ही कक्षा लगाने पहुंचे।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के मन में संशय :

कोरोना महामारी के चलते पिछले छह माह से प्रदेश सहित राजधानी शिमला के स्कूल बंद थे और ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बच्चों को शिक्षा दी जा रही थी और अब 2 नवंबर से शिक्षण संस्थानों को खोलने का निर्णय केबिनेट में लिया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की गाइडलाइन्स के तहत स्कूलों के लिए बनाई गई एसओपी के अनुसार स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया गया था। गाइडलाइन्स में अभिभावकों से सहमति पत्र मांगा गया था लेकिन अभिभावक कोरोना संक्रमण के डर के चलते अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है जबकि स्कूलों में स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे प्रबंध किए गए हैं।

पहले दिन स्कूल में छात्रों की उपस्थिति रही कम:

राजधानी शिमला के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर में 9वीं से 12वीं कक्षाओं की 12 सौ से अधिक संख्या की छात्राओं में से कुल 23 छात्राएं ही स्कूल पहुंची। वहीं लालपानी ,फागली स्कूल में एक भी छात्र स्कूल नहीं पहुंचा। खाली कक्षाओं या फिर चार या पांच बच्चों की उपस्थिति के साथ अध्यापकों को कक्षाएं लगानी पड़ी। पोर्टमोर स्कूल के प्रधानाचार्य नरेंद्र सूद ने बताया कि पहले दिन स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बहुत ही कम थी। 9वीं से लेकर 12वीं कक्षा तक सिर्फ 23 छात्र ही उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि अभिभावकों के मन में अभी भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर संशय बना हुआ है जिस कारण वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाह रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही अधिक संख्या में बच्चे स्कूल पहुंचेगे और नियमित रूप से पढ़ाई शुरू होगी ।

एडवाइजरी का किया गया पालन:

स्कूलों में शिक्षा विभाग की ओर से जारी की गई एडवाइजरी के तहत कोरोना बचाव के प्रावधान किए गए थे। स्कूल कैंपस में प्रवेश से पहले छात्रों की थर्मल स्कैनिंग और सेनेटाइजेशन की गई। शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों को भी थर्मल स्कैनिंग और हाथ सेनेटाइज करने के बाद ही स्कूल कैंपस में प्रवेश दिया गया। इसके अलावा सभी छात्रों, शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों को मास्क पहनना अनिवार्य किया गया था।स्कूल परिसर को भी पूरी तरह से सेनिटाइज कर कक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ छात्रों को बिठाया गया।

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