गरीब को इजाज़त नहीं तो 8250 रुपये ही दे दो

मुश्किल हो रहा है गुजर बसर करना

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सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने आयुक्त नगर निगम   पंकज राय से एमसी के दायरे में कार्यरत सभी तहबाजारियों को अन्य दुकानदारों की तर्ज़ पर दुकान खोलने की इजाज़त देने की मांग की है। सीटू ने अपनी मांगों को रखते हुए ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने प्रशासन से दुकान खोलने की इजाजत न देने पर 8250 रुपये मासिक देने की मांग भी की है। वहीं आयुक्त ने भी इस संबंध में सीटू को आश्वासन दिया है कि वह इस संदर्भ में उपायुक्त शिमला को प्रस्ताव भेज कर उचित कदम उठाने का आग्रह करेंगे। मेहरा ने कहा है कि कोरोना महामारी के चलते सभी समुदायों का रोजगार किसी न किसी रूप में प्रभावित हुआ है। इसमें विशेष तौर पर रेहड़ी-फड़ी और तहबाजारी के रोजगार में लगे लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ये लोग रोज़ कमाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले लोग हैं मगर प्रदेश सरकार व प्रशासन ने इनकी स्तिथि पर गौर नहीं किया। प्रशासन ने बड़े दुकानदारों को तो वैकल्पिक दिनों में दुकान खोलने की इजाज़त दे दी पर सबसे गरीब रेहड़ी-फड़ी तहबाजारी को इजाज़त नहीं दी।वहीं जिला सचिव बाबू राम ने कहा है कि भारत सरकार ने माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों पर मार्च 2014 में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट बनाया था। इस कानून के तहत रेहड़ी-फड़ी तहबाजारी का कार्य करने वाले लोगों को संविधान के अनुच्छेद 21 के जीने के अधिकार व अनुच्छेद 14 के समानता के अधिकार के तहत जीविका अर्जित करने का अधिकार दिया गया है। कोरोना के कारण पिछले डेढ़ महीनों में इस कार्य में लगे लोगों का रोजगार पूरी तरह खत्म  हो गया है और अब उनके लिए भोजन की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है इसलिए रेहड़ी फड़ी तहबाजारी को भी कारोबारियों की तर्ज़ पर कार्य करने की इजाज़त दी जाए। अगर प्रशासन यह व्यवस्था नहीं करता है तो फिर नगर निगम शिमला के पास जिन भी लोगों ने स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के अनुसार पंजीकृत होने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ वैंडिंग व आई कार्ड देने के लिए आवेदन किया है उन्हें राज्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन के अनुसार 8250 रुपये की प्रति महीना आर्थिक मदद अप्रैल और मई महीनों के लिए जारी की जाए।
इस मौके पर यूनियन अध्यक्ष सुरेंद्र बिट्टू व महासचिव राकेश कुमार शामिल रहे। 

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