कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार की 5 सूत्रीय रणनीति में टीकाकरण अभिन्न अंग

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शिमला। स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार की कोविड-19 महामारी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में सरकार की 5 सूत्रीय रणनीति परीक्षण, ट्रेसिंग, उपचार, कोविड अनुरूप व्यवहार और टीकाकरण में टीकाकरण एक अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि 80919 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, 51656 फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 1490686 लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक दी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान समय में कोविशिल्ड का टीका लगाया जा रहा है।

प्रवक्ता ने बताया कि यह टीका पूरी तरह से सुरक्षित है और केवल कुछ सावधानियां अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यदि कोविड वेैक्सीन की पहली खुराक लेने के बाद किसी प्रकार को कोई रिएक्शन हुआ हो तो आप कोविड वेक्सीन न लगवाएं। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाने वाली महिलाओं को वैक्सीन न लगवाने का परामर्श दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी से ठीक होने वाले, अस्पताल में कोविड संक्रमण के दौरान प्लाजमा थेरेपी लेने वाले मरीजों या गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को बीमारी से ठीक होने के 4 से 8 सप्ताह तक वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। यह टीका हमेशा अस्पताल में ही लगवाया जाना चाहिए। प्रवक्ता ने बताया कि वे लोग जिनकी कोविड हिस्ट्री है, इम्यूनिटी कम है, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, गुर्दे और फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त है, वे भी इस वैक्सीन को लगवा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि वैक्सीन लगवाने के बाद इन्जेक्शन लगाए गए स्थान पर दर्द, सिरदर्द, थकान, बुखार, ठंड लगना आदि आम बात है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सभी पात्र लोगों से आग्रह किया कि वे आगे आकर शीघ्र अति शीघ्र कोविड वैक्सीन लगवाएं। उन्होंने बताया कि यह पाया गया है कि कोरोना वैेक्सीन लगवाने केे बाद भी यदि कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हो जाता है तो उसकी गंभीरता कम रहती है। उन्होंने सभी व्यक्तियों से अपील की है कि जिन लोगों ने कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक ले ली है वह अपनी दूसरी खुराक, पहली खुराक के 6 से 8 सप्ताह के बाद लंे ताकि प्रभावी प्रतिरक्षा का स्तर विकसित हो सके।

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