बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में गिलोय का काढ़ा अमृत के समान

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करसोग। कोरोना काल सहित बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में गिलोय का काढ़ा अमृत के समान है। ऐसे में लोगों को स्वस्थ व तन्दरूस्त रहने के लिए नियमित तौर पर काढ़े का सेवन करना चाहिए। ये टिप्स पांगणा के चटोल गांव में रविवार को आयोजित एक दिवसीय योग शिविर में दिए गए। इस दौरान शिविर में उपस्थित लोगों को
योग क्रियाओं का भी अभ्यास करवाया गया। जिसमें प्राणायाम, सूक्ष्म व्यायाम, सूर्य नमस्कार का अभ्यास करवाया गया। इस शिविर में विशेषज्ञों ने गिलोय का काढ़ा तैयार करने की विधि सहित सही तरह से सेवन के बारे में जानकारी भी दी। लोगों को बताया गया कि गिलोय काफी सस्ती आयुर्वेदिक औषधि है। जो हर किसी की पहुंच में है। गिलोय को अमृता के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज में गिलोय का इस्तेमाल किया जाता है। गिलोग का रस और काढ़ा का सेवन डेंगू, चिकनगुनिया, बुखार जैसी गंभीर बीमारियों में भी किया जाता है। इसके अलावा बदलते मौसम में गिलोय कई तरह के वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी बचाता है। इन दिनों कोरोना वायरस से बचाव करने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी गिलोय का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस शिविर में महिला पतंजलि योग समिति राज्य सोशल मीडिया प्रभारी देवकी शर्मा, युवा तहसील प्रभारी पुर्ण चंद, योग समिति तहसील प्रभारी जगदीश ,महिला तहसील प्रभारी भीमा व स्थानीय महिला मंडल ने भाग लिया ।

युवा राज्य प्रभारी राजेश शर्मा ने बताया कि योग से निरोग रहने के लिए पांगणा के चटोल गांव में योग शिविर लगाया गया। जिसमें स्थानीय लोगों को योगाभ्यास सहित गिलोय के काढ़े के फायदे के बारे में जानकारी दी गई।

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