प्रदेश की जनता ने रिवाज नहीं राज बदलने का दिया जनादेश, 40 सीटों के साथ कांग्रेस पूर्ण बहुमत में

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शिमला। प्रदेश की जनता ने कांग्रेस पार्टी को पूर्ण बहुमत देकर सत्ता में वापस लाने का जनादेश दिया है इस तरह से भारतीय जनता पार्टी के रिवाज बदलने के मंसूबों पर भी पानी फिर गया है कांग्रेस पार्टी 40 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत प्राप्त करने में सफल हुई है कांग्रेस को जीत के द्वार तक पहुंचाने में जिला शिमला, कांगड़ा, ऊना, सोलन, सिरमौर और हमीरपुर का बहुत बड़ा हाथ रहा है , जहां से भाजपा को बड़ी निराशा हाथ लगी है । प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा से कांग्रेस पार्टी को 10 जबकि भाजपा को केवल 4 सीटों पर ही जीत हासिल हुई है वही यहां से निर्दलीय प्रत्याशी होशियार सिंह जीत दर्ज करने में कामयाब हुए है । जिला शिमला में केवल एक सीट पर ही भाजपा को जीत मिली है यहां से 7 सीटों पर कांग्रेस ने विजय हासिल की है । जिला सोलन में भी कांग्रेस को चार जबकि भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली है ,यहां से नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भाजपा के बागी उम्मीदवार के एल ठाकुर विजयी रहे हैं वहीं जिला सिरमौर में हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने के बावजूद भी भाजपा को निराशा ही हाथ लगी है और यहां से 5 में से केवल 2 सीटें भाजपा के पक्ष में गई है ।जबकि 3 सीटें कांग्रेस ने जीती है यहां से भाजपा के दिग्गज राजीव बिंदल को भी हार का मुंह देखना पड़ा है जिला हमीरपुर से भी भाजपा को बड़ी निराशा हाथ लगी है । पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के गृह जिला होने के बावजूद भी बड़ा शून्य हाथ लगा है और यहां कांग्रेस ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि आशीष शर्मा ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की है। ज़िला ऊना में कांग्रेस चार जबकि भाजपा एक सीट पर अपनी जीत दर्ज कर पाई। जनजातीय ज़िला किन्नौर और लाहौल स्पीति से भी कांग्रेस के ही उम्मीदवार विधानसभा पहुंचने में सफल हुए हैं । केवल मात्र जिला मंडी, बिलासपुर और चंबा ही भाजपा की कुछ इज्जत बचा पाए है मंडी से 10 में से 9 सीटों पर भाजपा को जीत मिली है और पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के पुत्र रजत ठाकुर को हार का सामना करना पड़ा है । बिलासपुर से तीन भाजपा जबकि एक सीट कांग्रेस के पाले में गई है । वहीं चंबा से भाजपा को तीन जबकि कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली है । ज़िला कुल्लू से भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों को दो-दो सीटें प्राप्त हुई हैं । सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी की जय राम सरकार की केवल दो मंत्री ही विधानसभा पहुंचने में सफल हो पाए हैं यहां से विक्रम ठाकुर और सुखराम चौधरी जीत दर्द ने दर्ज करने में कामयाब रहे हैं हालांकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अब तक की प्रदेश की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड बनाया है लेकिन वह सरकार बनाने में नाकाम रहे हैं जयराम ठाकुर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद कांग्रेस के प्रत्याशी चेतराम को 28 हजार से अधिक मतों से पराजित किया है। भारतीय जनता पार्टी की हार के पीछे सबसे बड़ा कारण टिकटों का गलत बटवारा और पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के दिग्गज नेता प्रेम कुमार धूमल की अनदेखी को भी माना जा रहा है, हालांकि कांग्रेस पार्टी ने ओ पी एस लागू करने और महिलाओं को 15-15 सौ रुपए प्रतिमाह देने का जो वादा किया था उससे भी उसे राज बदलने के सपने को साकार करने में सफलता हासिल हुई है । कांग्रेस पार्टी को भले ही पूर्ण बहुमत मिल गया हो लेकिन अभी भी उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का चयन करने की रहेगी । फिलहाल किसी एक नाम पर सहमति बनती नज़र नहीं आ रही । वही दूसरी चुनौती मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ओपीएस लागू करने और महिलाओं को पंद्रह सौ रुपये प्रतिमाह देने के वादे को पूरा करने की भी एक बहुत बड़ी चुनौती रहेगी । अब सबकी नजरें इस पर टिकी है कि कांग्रेस अपने इस वादे को पूरा करती है या पूर्व की बेरोजगारी भत्ते और आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाने के वादे की तरह इन वादों को भी ठंडे बस्ते में डालती है ।

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