40 सालों से पक्की नहीं हुई सड़क,अब पीडब्ल्यूडी विभाग को दिया टारिंग का अल्टीमेटम

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करसोग। प्रदेश में भले ही सड़कों का जाल बिछाए जाने के दावे किए जा रहे हो, लेकिन बहुत सी सड़कें ऐसी भी हैं, जो दशकों से पक्की नहीं हुई हैं। आज भी लोग इन सड़कों पर ठोकरें खाने को मजबूर है। ऐसी ही सड़क उपमंडल करसोग के तहत नगलोग से स्यांज बगड़ा है। जो पिछले करीब 40 सालों से पक्की नहीं हुई है। यहां चार दशकों से लोग सड़क के कायाकल्प होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि टारिंग के लिए एक साल पहले टेंडर भी लग चुका है, लेकिन दो सीजन बीतने पर भी सड़क की सुध नहीं ली गई है। इस सड़क पर रोजाना एचआरटीसी सहित प्राइवेट बस के चार से पांच रूट हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में छोटी गाड़ियों सड़क मार्ग से होकर गुजरती है, लेकिन टारिंग न होने से गाड़ियों का भी नुक्सान हो रहा है।


ऐसे में पीडब्ल्यूडी की सुस्ती से नाराज खादरा पंचायत के नवनिर्वाचित प्रधान अधिशाषी अभियंता से मिले और जल्द टारिंग का अल्टीमेटम दिया है। अगर अब कार्य शुरू नहीं हुआ तो क्षेत्र की जनता पीडब्ल्यूडी का घेराव करने के लिए मजबूर होगी।

1.98 करोड़ का लगा है टेंडर:
नगलोग से स्यांज बगड़ा तक करीब 8 किलोमीटर सड़क की टारिंग के लिए करीब एक साल पहले 1.98 करोड़ का टेंडर लगाया गया है। अभी तक सड़क को पक्का करने का कार्य शुरू नहीं हुआ है। हालांकि सड़क की मेटलिंग पहले ही की जा चुकी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक 1980 में ये सड़क बनी थी। स्टेट हेड से बनी इस सड़क की चार सड़क दशकों में भी टारिंग नहीं हो पाई है। वर्तमान में 3 हजार के करीब की आवादी सड़क सुविधा का लाभ उठा रही है। ऐसे में सड़क की अब जल्द टारिंग की मांग जोर पकड़ने लगी है।

खादरा पंचायत के प्रधान रमेश कुमार का कहना है कि नगलोग से स्यांज बगड़ा सड़क की टारिंग का मामला अधिशाषी अभियंता से उठाया गया। उन्होंने कहा कि टेंडर के बाद भी सड़क की टारिंग का कार्य शुरू नहीं हुआ है। इससे लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

करसोग के विधायक हिरालाल का कहना है कि जल्द ही सड़क को पक्का किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले सीजन में सड़क की टारिंग के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।

क्या कहती है स्थानीय जनता

नरेश कुमार का कहना ह्रै की यह सड़क मार्ग बडी वर्षों से बदहाली का शिकार ह्रै जल्द इसकी दशा सुधारी जाये।

टेक चंद ने कहा की हमने क्ई वार यह मामला सरकार के ध्यान मे लाया ह्रै, लेकिन विभाग व सरकार के कान मे जुं तक नही रेगी़।

नवीन कुमार ने कहा की वाहन चालको को हमेशा गाडी के नुक्सान का खतरा रहता ह्रै सडकी की दुर्दशा से वहुत दुखी ह्रै।

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