प्राकृतिक खेती ने आर्थिकी में लाया सुधार, सालाना आय में डेढ़ लाख की बढ़ोतरी,,,पहले खेती में करते थे डेढ़ लाख के रसायनों का प्रयोग, अब 3 हजार रूपये खर्च कर कमा रहे मुनाफा

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शिमला। खेती में रसायनों के बढ़ते प्रयोग और बढ़ती लागत से तंग आकर प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले मंडी जिला के किसान को प्राकृतिक खेती के चमत्कारिक परिणाम देखने को मिले हैं। मंडी जिला के बालीचौकी ब्लॉक के कांगर गांव के किसान पून्ने राम ने प्राकृतिक खेती विधि को अपनाकर न सिर्फ अपनी कृषि लागत को डेढ़ लाख से 3 हजार रूपये तक पहुंचाकर खेती लागत को कम किया है, बल्कि कम लागत में रसायनिक खेती के मुकाबले कुल आय को साढे़ 4 लाख रूपये से 6 लाख रूपये तक पहुंचाकर अन्य किसानों के सामने कृषि को उन्नत व्यवसाय बताने का काम किया है। नगवांई पंचायत के 39 वर्षीय किसान पून्ने राम ने दसवीं की पढ़ाई करने के बाद कृषि को अपनी आजीविका का साधन बनाया। पून्ने राम बताते हैं कि जब उन्होंने जब खेती शुरू की थी तो खेती में इतनी दवाईयों और खादों को प्रयोग नहीं होता था, लेकिन समय के साथ इनका प्रयोग बढ़ता गया और खेती में लागत बढ़ने के साथ आय कम होती गई। इससे तंग आकर मैंने प्राकृतिक खेती को अपनाया और इसके मुझे शुरूआती दौर में ही बेहतर परिणाम देखने को मिले।
पून्ने राम ने बताया कि मैंने 2018 में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण इस खेती विधि के जनक पदम्श्री सुभाष पालेकर से प्राप्त किया। इसके बाद मैंने इसे अपनी 10 बीघा जमीन में करना शुरू किया। पून्ने राम बताते हैं कि इस खेती विधि में देसी गाय को बहुत महत्व है इसलिए मैंने योजना के तहत मिले अनुदान से पंजाब से साहिवाल नस्ल की गाय खरीदी और इस खेती विधि को बताए अनुसार करना शुरू कर दिया।


पून्ने राम बताते हैं कि इस खेती विधि को अपनाने के बाद मेरी खेती की लागत 3 हजार रूपये रह गई है जबकि पहले मैं 50 हजार रूपये की दवाईयों और 1 लाख रूपये के उर्वरकों की खरीद करता था। इसके अलावा जो पहले मैं खेती करता था तब मेरी कुल सालाना आय साढे 4 लाख रूपये थी जो अब बढ़कर 6 लाख रूपये तक पहुंच गई है।
पून्ने राम का कहना है कि प्राकृतिक खेती विधि से मैंने अनार, सेब और सब्जियों का उत्पादन लेना शुरू किया है। वे बताते हैं कि इस विधि में हम एक साथ बहुत सारी फसलें लगाकर मिश्रित खेती करते हैं जिससे यदि कोई एक फसल अच्छी न हो या बाजार में उसका अच्छा भाव न मिले तब दूसरी फसल उसकी प्रतिपूर्ती कर देती है। इसके अलावा बहुत सारी फसलें लगाने से किसान को थोड़े-थोड़े समय में कुछ न कुछ आय होती रहती है।
पून्ने राम के उत्कृष्ट प्राकृतिक खेती मॉडल को देखकर अब क्षेत्र के अन्य किसान भी उनसे प्राकृतिक खेती विधि के गुर सीख रहे हैं। पून्ने राम अन्य किसानों को इस खेती विधि में प्रयोग होने वाले आदानों के निर्माण और उनके प्रयोग के बारे में प्रशिक्षण तो देते ही हैं, साथ में यदि खेती में कोई दुविधा आती है तो उसका भी निवारण करते हैं।


बालीचौकी ब्लॉक में प्राकृतिक खेती विधि का प्रचार-प्रसार करने वाली कृषि विभाग की खंड तकनीकी अधिकारी दिव्या ठाकुर ने बताया कि पून्ने राम बहुत मेहनती किसान हैं और उन्होंने अपने खेतों में इस खेती का बेहतरीन मॉडल तैयार किया है। कृषि विभाग की ओर से शुरू की गई प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत किसानों को पून्ने राम के खेतों में प्रशिक्षण और भ्रमण के लिए लाया जाता है, ताकि किसान उनके खेती मॉडल को देखकर प्रेरणा पाकर प्राकृतिक खेती को अपना सकें।

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