भारतीय परंपरा, ज्ञान और संस्कृत मूल्यों से ओत-प्रोत है राष्ट्रीय शिक्षा नीति: गोविंद ठाकुर

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कुल्लू। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय परम्पराओं, ज्ञान, व संस्कृत मूल्यों पर आधारित है। यह नीति वर्तमान व भावी पीढ़ी को एक सुसंस्कृत मानव बनाने में पूरी तरह सक्षम है जिससे एक समृद्ध समाज की परिकल्पना साकार होगी। यह बात शिक्षा, कला, भाषा एवं संस्कृति मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने मंगलवार को कुल्लू के समीप संध्या पैलेस में समग्र शिक्षा राज्य परियोजना द्वारा डाईट कुल्लू के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति संवाद एवं हितधारक विचार-विमर्श पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कही। इससे पूर्व उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शिक्षा पर्व पर उद्बोधन सुना जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 100 साल बाद का भारत कैसा होगा, संभवतः यह आधुनिक शिक्षा का प्रतिफल होगा।
         गोविंद ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति कस्तुरी नंदन की अध्यक्षता में देशभर के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों के सुझावों का समावेश है जो समाज को एक नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रयास कर रहे हैं ताकि हिमाचल प्रदेश शिक्षा नीति को कार्यान्वित करने वाला देश का पहला राज्य बने और प्रदेश में भी जिला कुल्लू इसमें अग्रणी भूमिका निभाए, इस संकल्प के साथ सभी को कार्य करना है। उन्होंने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य अच्छे इंसान का निर्माण करना है। शिक्षा में निवेश सर्वाधिक लाभकारी है। उन्होंने कहा भारत के युवा प्रगतिशील हैं और यही कारण है आज विश्व के अनेक विकसित देशों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं।
         शिक्षा मंत्री ने कहा 7 सितम्बर से 17 सितम्बर तक शिक्षा पर्व मनाया जा रहा है जो शिक्षकों के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा नई शिक्षा नीति में शिक्षकों की भूमिका बहुत अधिक और सम्माननीय होगी। गुणात्मक शिक्षा पर बल दिया गया है। बच्चों स्कूलों में खुशी का वातावरण तैयार होगा। उनको किसी प्रकार के मानसिक तनाव से बाहर निकालने पर आधारित है यह शिक्षा नीति। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति की भावना को समझना प्रत्येक हितधारक के लिए जरूरी है ताकि जल्द से जल्द इसे व्यवहार्य बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि निचले स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।  नीति 21वीं सदी के युवा का कौशल उन्ययन सुनिश्चित करेगी जिससे वह रोजगारोन्मुख बन सके। नीति मौलिक कर्तव्यों के प्रति भावना उत्पन्न करने वाली है। उन्होंने कहा प्रदेश में नीति को जमीन पर उतारने के लिए काम तेजी के साथ हो रहा है। गत वर्ष 8 सितम्बर को राज्य टास्क फोर्स का गठन किया जा चुका है। 11 चैप्टर समितियों का भी गठन किया जा चुका है। प्रदेश में अध्यापकों, शिक्षार्थियों व अन्य समस्त हितधारकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल सिद्धांतों के बारे में जितना जल्द जानकारी होगी, उतनी ही तेजी से नीति धरातल पर उतरेगी। नीति बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आप को प्रस्तुत करने के लिए सक्षम बनाएगी।
इससे पूर्व, शिक्षा मंत्री ने हर घर पाठशाला पर ई. पुस्तक का भी ऑनलाईन विमोचन किया।
शिक्षा भारती के अध्यक्ष, शिक्षाविद एवं मुख्य वक्ता डॉ. देस राज शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति गुणवत्तायुक्त होगी जो ज्ञान आधारित समाज का निर्माण करेगी। यह नीति 21वीं सदी की आकांक्षाओं और लक्ष्यों को पूरा करेगी तथा भारत को विश्व गुरू बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। पश्चिमी सोच वाली शिक्षा लुप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा शिक्षा नीति बहुत बड़ा बदलाव है जो अखण्ड भारत का निर्माण करेगी। शिक्षक से उम्मीद की गई है कि वह समूचे समाज का शिक्षक बने।
देस राज ने शिक्षा की मूल भावनाओं और उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत में शिक्षा पर संवाद दुनिया का सबसे बड़ा संवाद है। उन्होंने कहा शिक्षा नीति को जल्द से व्यवहार्य बनाने के लिए सभी को काम करना है। नीति बन चुकी है। सुझाव अब केवल इसके कार्यान्वयन को लेकर दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा शिक्षक की भूमिका बहुत बड़ी है। शिक्षक की गल्ती से सभ्यताएं लुप्त हो जाती है। समाज कमजोर पड़ जाता है। इसलिए शिक्षक को गैर जिम्मेवार विल्कुल नहीं होना है। उन्होंने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बड़ी बात है कि फोरेन यूनिवर्सिटीज भारत में आएंगी लेकिन एमओयू में यहां की संस्कृति और मूल्यों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा। भारत के बच्चे विदेशों में लाखों खर्च करके शिक्षा ग्रहण करते हैं, उन्हें अब अपने देश में ही यह सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। यहां के विश्वविद्यालय बाहरी देशों में खोले जाएंगे। इस प्रकार से वैश्विक आदान-प्रदान की शिक्षा होगी। उन्होंने कहा अध्यापकों को हर जगह पर प्रत्येक बच्चे व अभिभावक से शिक्षा नीति की बात करनी है। नीति का व्यापक प्रचार करने की जरूरत है।
हि.प्र. स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. एस.के. सोनी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बदलाव क्या है, इसके बारे में जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को तनावमुक्त करना है। फाऊंडेशन स्टेज तीन से छः साल आयु की होगी जिसमें बालवाड़ी अथवा बाल वाटिका की आंरम्भिक शिक्षा होगी तथा 6 से 8 साल में बच्चा दूसरी कक्षा में जाएगा जबकि 8 से 11 साल आयु में तीसरी से पांचवीं कक्षा पूरी करेगा। अध्यापक बच्चों की 50 प्रतिशत आंकलन करेंगें जबकि 50 प्रतिशत एग्जाम के माध्यम से होगा। योग, खेल मं से एक में भाग लेनेा सभी को जरूरी होगा। गैर शिक्षण गतिविधियों के 25 नम्बर होंगे। हर विद्यार्थी को राष्ट्रीय गीत, गान व प्रार्थना का ज्ञान होना जरूरी होगा। माध्यमिक अवस्था छटी से आठवीं कक्षा तक होगी। नौवीं व 10वीं में वार्षिक परीक्षा प्रणाली होगी। बोर्ड में वस्तुनिष्ट व वर्णात्मक दोनों की प्रश्न डाले जाएंगे।
विधायक सुरेन्द्र शौरी तथा विधायक किशोरी लाल ने भी कार्यशाला को संबोधित किया।
इससे पूर्व, राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा विरेन्द्र शर्मा ने स्वागत किया तथा कार्यशाला की जानकारी दी। उन्होंने नीति के अनेक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, एपीएमसी के सलाहकार रमेश शर्मा, योजना बोर्ड के सदस्य युवराज बोद्ध, जिला भाजपा महामंत्री अखिलेश कपूर, नगर परिषद मनाली के अध्यक्ष चमन कपूर, जिला परिषद सदस्या विभा सिंह, रेखा गुलेरिया के अलावा गौरव भारद्वाज व प्रताप ठाकुर सहित जिला के विभिन्न स्कूलों के शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी व अन्य हितधारकों ने कार्यशाला में भाग लिया।

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