अदानी की लूट से बागवानों को बचाने की कुलदीप राठौर ने प्रदेश सरकार से की मांग

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शिमला। कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह अदानी की लूट से बागवानों को बचाए।उन्होंने कहा है कि अदानी ने इस बार सेब के खरीद मूल्यों में 16 रुपए की कमी कर सेब की 50हजार करोड़ की मार्किट को प्रभावित करने की कोशिश की है।उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस बार सेब के बेहतर दाम मिलेगे पर ऐसा नही हुआ।बागवान पूरी तरह हताश है।उन्होंने कहा है कि कांग्रेस इस बारे चुप बैठने वाली नही और बागवानों व किसानों का शोषण नही होने दिया जाएगा।आज कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राठौर ने कहा कि सरकार की मिलीभगत से सेब के दाम गिराए गए है।उन्होंने आरोप लगाया कि लदानी,अदानी को सरकार का पूरा सरंक्षण है।उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इसकी जांच करें और इसपर हस्तक्षेप करते हुए बागवानों के हितों की रक्षा करें।राठौर ने कहा कि आज किसानों बागवानों को तीन नए कृषि कानूनों का खमियाजा भुगतना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि क्या सरकार यह चाहती है कि किसानों की तरह अब बागवान भी आत्महत्या करें।उन्होंने कहा कि आज एक पेटी की लागत 450 से 500 रुपए के बीच पड़ रही है जबकि वह मार्किट में 600 रुपए के आसपास बिक रही है।उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में  1984 से कृषि उपकरणों के साथ साथ कीट नाशको,फफूंद नाशक व अन्य दवाओं पर सब्सिडी,अनुदान देती थी पर अब दुर्भाग्यवश भाजपा सरकार ने इन सब पर रोक लगा दी है।उन्होंने कहा कि सरकार एंटी हेल नेट खरीद पर 50 प्रतिशत की  सब्सिडी देती थी,पर अब सरकार ने यह नेट खरिदने के लिए सब्सिडी पात्रता केवल कुछ ही निर्माताओं को अधिकृत किया है जो बागवानों के साथ एक बड़ा अन्याय है।उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो किसानों की ही कोई मदद की और न ही बागवानों की।उन्होंने कहा कि बेमौसमी बर्फबारी, ओलावृष्टि से बागवानों को सेब के बगीचे, पेड़ों का भारी नुकसान हुआ।वह इस संदर्भ में मुख्यमंत्री से भी मिले थे।दुख की बात है कि न तो मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का कोई दौरा किया व न ही बागवानी मंत्री ने ही।राठौर ने बागवानी मंत्री को आड़े हाथ लेते हुए कहा की उन्होंने 1135 करोड़ के बागवानी प्रोजेक्ट पर कुंडली मारते हुए बागवानों से जो अन्याय किया है लोग उसका चुनावों में पूरा बदला देंगे।राठौर ने सरकार से सेब की नेफेड से खरीद और अच्छे स्तर के सेब का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने की मांग फिर दोहराई है।

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