इंदिरा गांधी खेल परिसर में जुडो चैपिंशिप के 57 किलोग्राम मुकाबले में प्रियंका ने हासिल किया प्रथम स्थान

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शिमला। राजधानी शिमला के इंदिरा गांधी खेल परिसर में शनिवार को जुडो प्रतियोगिता  का आगाज हुआ. इस जूडो प्रतियोगिता में 70 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।जिला जूडो एसोसिएशन की तरफ से इंदिरा गांधी खेल परिसर में यह  जूडो प्रतियोगिता करवाई जा रही थी। इस प्रतियोगिता के मुख्यातिथि अतुल चटकारा  रहे।उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं होती रहनी चाहिये।इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।आज के होने वाले मुकाबले में 44 किलोग्राम में घनहाटि की आरती ठाकुर ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं घनहाटि की मनस्वी ने   द्वितीय स्थान हासिल किया।48 किलोग्राम में खेल परिसर की सलोनी ने प्रथम स्थान हासिल किया और इशिका ने दूसरा स्थान हासिल किया।52 किलोग्राम मुकाबले में घनहाटि शिर्या ने प्रथम स्थान हासिल किया और मल्याना कि पलक ने दूसरा स्थान हासिल किया।57 किलोग्राम मुकाबले में प्रियंका ने प्रथम स्थान हासिल किया और यक्षिका ने दूसरा स्थान हासिल किया।जूनियर वर्ग में 52 किलोग्राम मुकाबले में कृतिका ने प्रथम और दिव्यांशी ने दूसरा स्थान हासिल किया।

वहीं, डीएस चंदेल टूर्नामेंट निदेशक   ने बताया कि इस जूडो चैंपियनशिप में 70 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं. इस प्रतियोगिता में कोरोना से बचाव के सभी तय मापदंडों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा जो बच्चे इस प्रतियोगिता से चयनित होंगे, उनका चयन राज्यस्तरीय की प्रतियोगिता के लिये किया जाएगा।उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिता करवाने का मकसद बच्चों को नशे से दूर रखना है।डीएस चंदेल ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिता से बच्चे शारिरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत होते हैं.

चालों से अपनी प्रतिद्वंद्वी को हराने की कला है जूडो

बता दें कि जूडो खेल को डॉ. कानो जिगोरो की ओर से 1882 में जापान में इजाद किया गया था. एक आधुनिक जापानी मार्शल आर्ट और लड़ाकू खेल है. इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका प्रतिस्पर्धी तत्व है, जिसका उद्देश्य अपने प्रतिद्वंद्वी को या तो जमीन पर पटकना, गतिहीन कर देना या नहीं तो कुश्ती की चालों से अपने प्रतिद्वंद्वी को अपने वश में कर लेना या ज्वाइंट लॉक करके यानि जोड़ों को उलझाकर या गला घोंटकर या दम घोंटू तकनीकों का इस्तेमाल करके अपने प्रतिद्वंद्वी को समर्पण करने के लिए मजबूर कर देना है. हाथ और पैर के प्रहार और वार के साथ-साथ हथियारों से बचाव करना जूडो का एक हिस्सा है, लेकिन इनका इस्तेमाल केवल पूर्व-व्यवस्थित तरीकों में होता है क्योंकि जूडो प्रतियोगिता या मुक्त अभ्यास में इसकी इजाजत नहीं दी जाती है.

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