सरकार…आर्थिक तंगी से जूझ रही जनता कैसे करेगी भारी बिलों की अदायगी …नागरिक सभा

भारी भरकम बिलों के खिलाफ नागरिक सभा करेगी विरोध प्रदर्शन

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शिमला नागरिक सभा ने भारी भरकम  बिजली,पानी,कूड़े के बिलों व प्रॉपर्टी टैक्स का कड़ा विरोध किया है और सरकार से इन करों को कोरोना महामारी के मद्देनजर पूर्ण तौर पर माफ करने की मांग की है। साथ ही नागरिक सभा इन भारी भरकम बिलों के खिलाफ 29 जून को नगर निगम कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन करेगी।

नहीं मिली राहत:

इस संबंध में नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व सचिव कपिल शर्मा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने कोरोना काल में आर्थिक तौर पर बुरी तरह से प्रभावित हुई जनता को कोई भी आर्थिक सहायता नहीं दी है। प्रदेश में कोरोना के कारण 70 % लोग कोरोना के कारण पूर्ण अथवा आंशिक रूप से अपना रोज़गार गंवा चुके हैं और इन्हें अब तक  मुख्यमंत्री राहत कोष अथवा पीएम केयर फंड से किसी भी तरह की कोई भी आर्थिक मदद नहीं मिली है।

रोटी जुटाना भी मुश्किल:

नागरिक सभा का कहना है कि शिमला शहर में होटल व रेस्तरां उद्योग पूरी तरह ठप्प हो गया है। इसके कारण इस उद्योग में सीधे रूप से कार्यरत लगभग पांच हजार मजदूरों की नौकरी चली गयी है। पर्यटन उद्योग का कार्य बिल्कुल खत्म हो गया है। इसके चलते शिमला शहर में हज़ारों टैक्सी चालकों,कुलियों,गाइडों,टूअर एंड ट्रैवल संचालकों आदि का रोज़गार खत्म हो गया है। इससे शिमला में कारोबार व व्यापार भी पूरी तरह खत्म हो गया है क्योंकि शिमला का लगभग 40% व्यापार पर्यटन से जुड़ा हुआ है। आज कोरोना वायरस ने पर्यटन उद्योग की कमर पूरी तरह से तोड़ दी है। हज़ारों रेहड़ी-फड़ी तहबाजारी और छोटे कारोबारी तबाह हो गए हैं। दुकानों में कार्यरत सैंकड़ों सेल्समेन की नौकरी चली गयी है। विभिन्न निजी संस्थानों में कार्यरत मजदूरों व कर्मचारियों की छंटनी हो गयी है। निजी कार्य करने वाले निर्माण मजदूरों का काम पूरी तरह ठप्प हो गया है। ऐसी स्थिति में शहर की आधी से ज्यादा आबादी को दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। 

आमदनी चवन्नी खर्चा रुपया वाली स्थिति से गुजर रहे लोग:


विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि ऐसी विकट परिस्थिति में प्रदेश सरकार,नगर निगम व बिजली बोर्ड से जनता को आर्थिक मदद की जरूरत व उम्मीद थी परंतु इन सभी ने जनता से किनारा कर लिया है। नगर निगम के हाउस ने भी जनता की इस हालत से मुंह मोड़ लिया है। जनता को हज़ारों रुपये के बिजली व पानी के बिल थमा दिए गए हैं। नगर निगम व बिजली बोर्ड की गलती का खामियाजा जनता क्यों भुगते। हर माह जारी होने वाले बिलों को चार महीने बाद जारी किया गया है व इन बिलों को जमा करने के लिए नाममात्र समय दिया गया है। चार महीने के बिलों से मीटर रीडिंग रेट कई गुणा ज़्यादा बढ़ गया है। अगर हर महीने बिल जारी होते तो चार महीने के इकट्ठे बिल के मुकाबले उपभोक्ताओं का आधा भी बिल नहीं आता। कोरोना के  समय में लूट बड़े पैमाने पर जारी है। कूड़े के बिल भी हज़ारों में थमाए गए हैं जिस से घरेलू लोग तो हताहत हुए ही हैं साथ ही कारोबारियों व व्यापारियों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। ऐसी विकट परिस्थितियों में भवन मालिकों को हज़ारों रुपये के प्रोपर्टी टैक्स के बिल भी थमा दिए गए है। लोग आमदनी चवन्नी खर्चा रुपया वाली स्थिति से गुजर रहे हैं।

करेगी विरोध प्रदर्शन:

सभा ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में नगर निगम शिमला,बिजली बोर्ड व प्रदेश सरकार को मार्च से जून 2020 के बिल पूरी तरह माफ कर देने चाहिए व जनता को राहत प्रदान करनी चाहिए बावजूद इसके नगर निगम लोगों की जेबों पर करों का अतिरिक्त भार डाल रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब लोग पहले ही आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं तो ऐसे में लोग भारी भरकम करों की अदायगी कैसे करेगी।
नागरिक सभा ने इन करों को माफ करने की मांग की है साथ ही कहा कि सभा इस संबंध में नगर निगम कार्यालय के सामने 29 जून को धरना प्रदर्शन करेगी।

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