हिमांशी बनेगीं अपने क्षेत्र की पहली लाइफ सेवियर

ग्रामीण क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्र में ही सेवाएं देने की इच्छुक हिमांशी ।

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कहते हैं कि जब निश्चय दृढ़ हो और हौसले बुलंद हो तो मंज़िलें खुद ब खुद क़रीब आ जाती हैं। बचपन से ही अपने गांव और क्षेत्र में रहने वाले रोगियों की तीमारदारी व सेवा को अपना लक्ष्य मान कर मन में डॉक्टर बनने की चाह ने जिला सिरमौर के छोटे से गांव कोटी पधोग की रहने वाली हिमांशी ने अपने सपने को साकार करने की ओर एक अहम कदम उठाया है। इस क्षेत्र से अभी तक कोई भी डॉक्टरी की पढ़ाई कर स्वास्थ्य सेवाओं में नहीं आया है। अब जबकि इस क्षेत्र की बालिका ने नीट की परीक्षा उतीर्ण कर डॉ.वाई.एस.परमार राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय नाहन में एम.बी.बी.एस.कोर्स में दाखिला पा कर अपना स्थान सुनिश्चित किया है, तो समूचे इलाके में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी है।

हिमांशी बचपन से ही तीक्षण बुद्धि और पढ़ाई में होशियार रही है। शिमला के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पोर्टमोर से विज्ञान संकाय में 94% अंक प्राप्त कर अपने विद्यालय, गुरुजनों और अविभावकों को गौरवान्वित किया है | हिमांशी के पिता जगबीर सिंह नेगी राज्य सरकार में कर्मचारी हैं और माता गृहिणी है। पिता का कहना है कि बेटियां- बेटों से कम नहीं है और उन्होंने अपनी बेटी की परवरिश बेटे की तरह की है और अपने सामर्थ्य अनुसार यथासंभव तमाम अवसर प्रदान करने का प्रयास किया है और बेटी की इस उपलब्धि के लिए स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहें हैं |

हिमांशी एक कुशल डॉक्टर बन कर अपने क्षेत्र , प्रदेश और देशवासियों के साथ समूची मानवता की सेवा करना चाहती है। उसका कहना है कि देश के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी चिकित्सकों की कमी है, जिसकी वजह से लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं लेने के लिए अपने घर से दूर जाना पड़ता है। वह परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने की इच्छा दर्शाती है |

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