सैन्य अफसर देने में छोटा सा पहाड़ी राज्य हिमाचल देश के टाॅप टेन में

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चाहे बात देश में सर्वप्रथम सेना के सबसे बड़े सम्मान परमवीर चक्र पाने की हो या किसी भी युद्ध में अपने साहस और बलिदान का लोहा मनवाने की, इसमें छोटा सा पहाड़ी राज्य हिमाचल को हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहा है। देश में पहला परमवीर चक्र हिमाचल के सपूत मेजर सोमनाथ शर्मा ने पाया था अभी तक हिमाचल के वीर सपूत कुल चार सर्वाेच्च सम्मान पा चुके हैं। इतना ही नहीं सेना में अफसर देने में हिमाचल प्रदेश पिछले कई दशकों से टाॅप टेन में जगह बनाए हुए है। हिमाचल की आबादी देश की आबादी का मात्र 0.057 फीसदी लेकिन इसके बावजूद हर साल देश की तीनों सेनाओं में हिमाचल के 100 से अधिक सैन्य अफसर बनकर देश की सरहदों की रक्षा करने जा रहे हैं। हाल ही में आईएमए की पासिंग आउट परेड में हिमाचल के 18 कैडेट सैन्य अफसर बनकर निकले हैं। जबकि जून माह में हिमाचल की वीरभूमि ने देश को 21 वीर अफसर दिये हैं। यदि पिछले दस सालों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो इन सालों में हिमाचल जैसे छोटे से पहाड़ी राज्य अकेली भारतीय थल सेना के लिए आईएमए से कैडेट सैन्य अफसर के तौर पर 400 से अधिक अफसर दे दिये हैं। वहीं ओटीए, एनडीए और टैक एंट्री के माध्यम से भी हर साल हिमाचल के दर्जनों युवा देश की सेनाओं में जा रहे हैं।

आईएमए से पास होने वाले हिमाचल के अफसर

वर्ष सैन्य अफसर

2019 39

2018 37

2017 30

2016 40

2015 33

2014 66

2013 40

सैन्य अफसर देने में कई बड़े राज्यों को पिछे छोड़ा

सेना में अफसर देने के मामले में हिमाचल प्रदेश देश के कई बड़े राज्यांे को कई वर्षाें से लगातार पिछे छोड़ रहा है। सेना को अफसर देने में इस बार भी पंजाब हमसे पीछे है। पंजाब से 11, तमिलनाडु से 9, दिल्ली से 16, केरल से 10, जम्मू कश्मीर से 06, मध्यप्रदेश से 10, कर्नाटक से 07, पश्मिच बंगाल से 06, आंध्र प्रदेश से 06, उड़ीसा से 01, आसाम से 2, मणिपुर, चंडीगढ़, गुजरात और झारखंड से 4, आसाम से 2 और मिजोरम, उडीसा, सिक्किम और अंडमान निकोबार से 1-1 जांबाज सैन्य अफसर बने हैं

देश की सेवा के लिए मिले सम्मान

जब देश पर मर मिटने की बात आती है तो इसमें हिमाचल का कोई सानी नहीं। भारतीय सेना को हिमाचल ने एक से बढ़कर एक शूरवीर दिए हैं। कारगिल युद्ध में चाहे वह शहीद कैप्टन विक्रम बतरा और सौरभ कालिया हो या पहला परमवीर चक्र हासिल करने वाले मेजर सोमनाथ शर्मा। हिमाचल के सपूतों को कुल 998 वीरता चक्र मिल चुके हैं। अभी तक चार सर्वाेच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र, 2 अशोक चक्र , 10 महावीर चक्र, 21 कीर्ति चक्र, 55 वीर चक्र, 92 शौर्य चक्र, 453 सेना, वायुसेना और नौसेना मैडल, 164 बहादुरी पुरस्कार और अन्य 197 मेडल मिल चुके हैं। इसके अलावा आजादी से पहले भी हिमाचल के वीर जवानों को दो विक्टोरिया क्रास और जाॅर्ज क्रास सम्मान प्राप्त हो चुका है।

इन्होंने बढ़ाया है वीरभूमि हिमाचल का नाम

देश के पहला परमवीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा को मिला था जबकि इसके बाद कारगिल वार में कैप्टन विक्रम बतरा और राइफल मैन संजय कुमार को भी यह सम्मान मिल चुका है। इसके अलावा भंडारी राम और लाला राम को विक्टोरिया क्रास और नायक किरपा राम को जाॅज क्रास सम्मान मिल चुका है। कारगिल युद्ध में हिमाचल के 52 जवानों ने देश के लिए सर्वाेच्च बलिदान दिया है जिसके लिए देश उनका हमेशा ऋणी रहेगा। वहीं कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता है।

देश के हर दसवां जवान हिमाचली

देश के हरेक दसवें सैनिक होने का गौरव भी हिमाचल प्रदेश के पास है। थल सेना की डोगरा रेजीमेंट में 75 फीसदी भागिदारी हिमाचल की है। इतना ही नहीं वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 1 लाख 10 हजार से अधिक सेवानिवृत सैनिक हैं। जबकि युद्ध विधवा एवं पूर्व सैनिकों की सामान्य विधवाओं की संख्या लगभग 33 हजार है। देश की सीमाओं की रक्षा के लिए दिए गए योगदान को देखते हुए प्रदेश सरकार सेवारत सैनिकों और पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों के कल्याण के लिए अनेक कार्य कर रही है। सेवारत सैनिकों व पूर्व सैनिकों को राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सैनिक कल्याण विभाग और पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड कार्य कर रहा है। राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए विशेष रोजगार कक्ष स्थापित किया है, जो पूर्व सैनिकों को सेवानिवृति के उपरान्त रोजगार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों को सरकारी सेवाओं में 15 प्रतिशत का आरक्षण प्रदान किया जा रहा है।

भर्ती के कोटे को बढ़ाने से युवाओं को होगा फायदा

पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड के चैयरमैन ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर का कहना है कि देश की सेनाओं में हिमाचल के जवानों की बहुत अधिक योगदान है। प्रदेश के युवाओं को सेना में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सके इसके लिए भर्ती के कोटा यानि रिक्रूटेबल मेल पाॅप्युलेशन को बढ़ाया जाना चाहिए और प्रदेश के लिए एक अलग से रेजिमेंट का गठन करने की मांग भी केंद्र सरकार के समझ रखी गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केंद्रिय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भेंट कर अलग रेजिमेंट की मांग रखी है। ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर का कहना है कि सेवानिवृत जवानों को रोजगार दिलवाने के लिए बोर्ड की ओर से अनेक कदम उठाए गए हैं जिनका फायदा जवानों को मिल रहा हैं। उन्होंने कहा कि

म्मान पाने वाले जवानों के लिए प्रोत्साहन राशि

सेनाओं में देश की सेवा करने वाले जवानों के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 के बजट में परमवीर चक्र विजेताओं तथा अशोक चक्र विजेताओं को दी जाने वाली एक मुश्त राशि 25 लाख रुपये को बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी है, जबकि वार्षिक राशि को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये तथा महावीर चक्र विजेताओं की एक मुश्त 15 लाख रुपये की राशि को बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया गया है और वार्षिक राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया है। प्रदेश सरकार द्वारा सेना मेडल मेन्शन-इन-डिस्पैच के विजेताओं की वार्षिकी राशि को भी 3000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया है। राज्य सरकार ने धर्मशाला स्थित युद्ध स्मारक संग्राहलय के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

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