दाल-चावल देने से नहीं चलेगा… सरकार, जनता चाहती है आर्थिक मदद ..सुधीर शर्मा

केंद्र सरकार से किया सवाल ...सरकार के लिए राशन की परिभाषा क्या?क्या आटा, चावल तथा दाल देने से हो जाएगा गरीब लोगों का जीवन यापन

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एआईसीसी के सचिव एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने केंद्र पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने केंद्र सरकार और पीएम मोदी को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना पर प्रश्नचिन्ह लगाया है। सरकार पर प्रहार करते हुए उन्होंने देश भर में कोरोना काल में चल रही समस्याओं पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर जुमलेबाजी करती रही। बात-बात पर खड़ी हो जाने वाली सरकार आज पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जा रही है।

मुफ्त आटा चावल जनता के साथ मजाक:

सरकार से तीखे स्वर में सुधीर शर्मा ने पूछा है कि उनके लिए राशन की परिभाषा क्या है? क्या 80 करोड़ गरीबों को आगामी 3 माह तक मुफ्त में आटा, चावल तथा एक किलो दाल दिए जाने से उनका जीवन यापन हो जाएगा? सुधीर शर्मा ने कहा कि क्या केेंद्र की घोषणाा को राशन की परिभाषा मानते हुए राष्ट्रीय मानदंड मान लिया जाए? उन्होंने पूछा कि क्या राशन में नमक, चीनी, हल्दी, मसाला, तेल, घी इत्यादि नहीं होना चाहिए। पूर्व मंत्री ने कहा कि 80 करोड़ लोगों को तीन माह तक मुफ्त में आटा, चावल तथा एक किलो दाल देने की जो घोषणा केंद्र ने की है, क्या वह गरीब लोगों के साथ मजाक करना जैसा नहीं है।

आर्थिक राहत दे सरकार:

उन्होंने कहा कि सरकार राहत देने की बात करती है।सरकार की मंशा यदि राहत देने की है तो ऐसी देनी चाहिए, जिससे सभी लोग संकट के इस काल में बिना परेशानी के जीवन यापन कर सके। आटा और दाल मुफ्त में देने से घर की रसाई नहीं चलती। उन्होंने कहा कि सरकार को आम जनता को आर्थिक राहत दे कर लोगों की मदद करनी चाहिए। लोगों के खातों में एक मुश्त वाजिब नगदी डाले ताकि संकट की इस घड़ी में लोगों को उसका लाभ मिल सके। सुधीर शर्मा ने कहा कि कारोना काल में करोड़ लोगों की नौकरी चली गई और लोग बेरोजगार हो गए। ऐसे में उन्हे नगदी की आवश्यकता है ताकि वे बिना किसी के सामने झुके और पूरे सम्मान से अपने परिवार का पालन पोषण कर सके। उन्होंने कहा कि एक परिवार की कई जरुरत होती है, ऐसे में आटा व चावल देकर सरकार अपनी जिम्मेवारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती है। उन्होंने पूछा कि क्या 5 किलो चावल या आटा देने से लोगों की जरुरत पूरी हो जाएगी?

आत्महत्याओं के बढ़ते मामले चिंताजनक:

पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि कोरोना काल में आत्महत्या के बढ़ते मामले चिंताजनक है।आत्महत्याओं के लागातार सामने आते मामलों से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि संकट की इस घड़ी में आम जनता कितनी परेशानियों से गुजर रहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना से ज्यादा लोग आत्महत्याओं से मरे है। ऐसे में केंद्र और प्रदेश सरकार को धरालत पर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। लारे-लप्पे और झूठे वायदों से जनता का राहत नहीं मिल सकती।

सरकार के मदद के हाथ नजर नहीं आए:

सुधीर शर्मा ने कहा कि लोगों ने केंद्र और राज्य सरकार को कोविड फंड पर जितना हो सका, उतना अंशदान किया लेकिन सरकार के मदद के हाथ नजर नहीं आए। उल्टे जनविरोधी निर्णय लेकर जनता की परेशानियों को बढ़ाने के प्रयास हुए। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग का डीए बंद कर दिया गया। प्रदेश में सस्ते राशन में कैंची चला दी। पैट्रोल डीजल के दामों में बढ़ौतरी कर जनता पर मंहगाई थोपी गई। उन्होंने कहा जब तक कोरोना की वेक्सीन नहीं आ जाती है बसों में 100 प्रतिशत सवारियों को सफ़र करने की अनुमति देना गलत निर्णय है।

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