राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय छम्यार की दीवार पत्रिका “बाल उद्यान” ने फिर रचा इतिहास

अब पत्रिका के डिजिटल अंक को एक लिंक के जरिए कहीं भी, कोई भी पढ़ सकता

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सुंदरनगर: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय छम्यार, जिला मंडी की दीवार पत्रिका “बाल उद्यान” ने एक बार फिर इतिहास रचा है। कोरोना काल के इस मुश्किल समय में भी विद्यालय की इस दीवार पत्रिका ने 15 सितंबर, 2020 को हिंदी पखवाड़े में अपना तीसरा अंक ‘लॉकडाउन विशेषांक’ एक डिजिटल संस्करण अप्रैल-सितंबर, 2020 के रूप में निकालकर एक मिसाल कायम की है। इस पत्रिका ने अपनी रचनात्मकता को कायम रखते इस बार इस पत्रिका का पहला डिजिटल संस्करण अप्रैल-सितंबर 2020 भी लांच किया है। यह हिमाचल की किसी भी दीवार पत्रिका का पहला डिजिटल अंक है। इस पत्रिका को जहां स्कूल के विद्यार्थी दीवार पर टंगी रहकर पढ़ते थे आज वही विद्यार्थी अब इसे घर में बैठकर आराम से कोरोना के पूरे नियमों का पालन करते हुए पढ़ सकेंगे। इस डिजिटल अंक के चलते अब पत्रिका को एक लिंक के जरिए कहीं भी, कोई भी पढ़ सकता है। इससे इस दीवार पत्रिका को विस्तार मिला है। यह कार्य सबके लिए प्रेरणास्पद है। इसे अंजाम दिया है युवा साहित्यकार व स्कूल के हिंदी के प्रवक्ता पवन चौहान ने, जो पत्रिका के मार्गदर्शक भी हैं। 
दीवार पत्रिका “बाल उद्यान” के इस अंक के विद्यार्थी संपादक गीतांजलि और प्रीति हैं जो 11वीं कक्षा की कला संकाय की छात्राएं हैं। इन बेटियों के कुशल सम्पादन में यह अंक कोरोना काल को समर्पित है। इस अंक के रचनाकार हैं गगन, दीपिका, गीतांजलि, प्रीति, दीक्षा, विशाल, आकाश, स्नेहा, गुंजन, भविष्य, बबली, मुकेश, तनीषा, खुशबू, जिज्ञासा, पायल और वर्षा। इस बार के इस अंक की ख़ास बात यह है कि यह अंक संपादकीय टीम ने विभिन्न कोरोनावरियर्स को समर्पित किया है जो आज भी लोगों के जीवन को बचाने के लिए दिए गए कार्यों को अपनी जान की परवाह किए बगैर बखूबी निभा रहे हैं। साथ ही इस अंक के माध्यम से विद्यालय की 12वीं कक्षा की छात्रा प्रीति को विनम्र श्रद्धांजलि भी अर्पित की है जो असमय मृत्यु की गोद में चली गई। महादेव गांव के इन बच्चों की मदद से ‘दीवार पत्रिका’ को मिला साकार रूपवैसे इस दीवार पत्रिका को सीसे छम्यार में ही तैयार किया जाना था लेकिन कोरोना के चलते स्कूल अभी बंद पड़े हैं। स्कूल खुलने के लंबे इंतजार के चलते छम्यार स्कूल की इस दीवार पत्रिका को मार्गदर्शक पवन चौहान की निगरानी में महादेव गांव के विभिन्न स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की मदद से साकार रूप प्रदान किया। इस पत्रिका को साकार रूप देने में शिवा, अभय, स्वाति, स्मृति, आस्था, सुजल, अंतरिक्ष और श्रेया ने अपनी भूमिका निभाई है। इस पूरे रचनात्मक कार्य में पवन ने इन बच्चों को जहां दीवार पत्रिका की संकल्पना से परिचय करवाया वहीं इसके उद्देश्य की भी जानकारी बच्चों में बांटी। सभी बच्चों की रुचि को देखकर तय हुआ कि यदि ये बच्चे अपनी रचनात्मकता पर कार्य करते रहेंगे तो महादेव में भी बच्चों की अपनी डिजिटल या फिर दीवार पत्रिका निकला करेगी। बच्चों को पवन ने बहुत सारी बाल पत्रिकाएं भी पढ़ने को दी।

स्कूल से मिली बधाई :

विद्यालय के कार्यकारी प्रधानाचार्य श्री हेम सिंह ने और सभी शिक्षकों ने इस कार्य की सराहना करते हुए कोरोना काल के इस मुश्किल दौर में ऑनलाइन प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका के लिए पूरी संपादकीय टीम के साथ रचनाकारों को बधाई दी है। पत्रिका पढ़ने के लिए लिंक यह है-
https://www.flipsnack.com/PPPKK/deewar-patrika-_bal-udyaan_-digital-issue-_gsss-chhamyar_-tnign9przp.html

क्या है दीवार पत्रिका :

बता दें कि दीवार पत्रिका बच्चों का वह रचनात्मक प्लेटफार्म है जिसमें बच्चे अपने अनुभवों, संस्मरणों व मन में चल रही उथल-पुथल और अपनी संवेदनाओं को साहित्य की विभिन्न विधाओं के जरिए रचते हैं। यह वह पत्रिका है जो किसी शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों की रचनाओं के सहयोग से तैयार की जाती है। विद्यार्थियों की रचनाओं को किसी बड़ी शीट पर चिपकाकर इस पत्रिका को दीवार पर टांग दिया जाता है। बच्चे आते-जाते या खाली समय में इस पत्रिका को पढ़ सकते हैं। इस पत्रिका में हर विषय को केंद्र में रखकर बच्चों को कुछ लिखने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस प्रक्रिया द्वारा विद्यार्थी बहुत नजदीकी से अपने विषय के साथ जुड़ जाता है और जिस विषय को लेकर वह अपने विचारों को रखता है वह ताउम्र उसे याद रहता है। जानकारी के अनुसार इस प्रकार की पत्रिका इससे पहले भारत में उतराखंड, उतरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में प्राइमरी स्कूल से लेकर काॅलेज तक विद्यार्थियों के माध्यम से कई वर्षों से नियमित तैयार की जा रही हैं। यह पत्रिका आज देश के लगभग 1200 विद्यालयों में सुचारू रूप से चल रही है और विद्यार्थियों को लाभान्वित कर रही है। यह पत्रिका विद्यार्थियों में वर्षों से दिमाग में चल रहे पढने के डर को समाप्त करती है और उन्हें अपनी पाठ्यपुस्तकों के नजदीक लाती है। यह नवाचार किसी भी विषय को लंबे समय तक याद रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

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