डिस्ट्रिक्ट और एमसी एडमिनिस्ट्रेशन आमने सामने

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कोरोना पॉजिटिव युवक की मृत्यु के मामले को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम आमने सामने आ गए हैं। एक ओर जिला प्रशासन का कहना है कि कोविड -19 के इस मामले में नगर निगम की पूरी जिम्मेदारी बनती थी,दूसरी ओर नगर निगम का कहना है कि हमने एन एच एम की गाइडलाइंस के तहत अपना पूरा दायित्व निभाया है।

मंगलवार शाम को मंडी के सरकाघाट के 21 वर्षीय युवक की कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो गई थी और रात को ही उसके शव का दाह-संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर एसडीएम शहरी नीरज चांदला ही मौजूद रही ।उन्होंने कहा कि कोविड-19 मामलों में एमसी की जिम्मेदारी बनती है और मंगलवार को एमसी की ओर से कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था। उनके बार-बार फोन करने पर जवाब दिया गया कि यह हमारे प्रोटोकॉल में नहीं आता है। एसडीएम ने इस संबंध में अपने उच्च अधिकारियों को भी रिपोर्ट दी है।

वहीं एमसी के जॉइंट कमिश्नर का कहना है कि इस मामले की कोई भी आधिकारिक तौर पर सूचना न ही कमिश्नर और न ही जॉइंट कमिश्नर को दी गई है। पता चलने के बाद एमसी के प्रोटोकॉल में तय मानकों का पूरा पालन किया गया है। अस्पताल से लेकर कनलोग क्रिमिनेशन सेंटर तक के मार्ग को सेनाटाइज किया गया साथ हीं शवगृह के कर्मचारियों को पीपीई किट भी मुहैया करवाई गई । उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि एमसी के 6 सदस्य रात 2:30बजे तक शवगृह में मौजूद रहे।


ऐसे में अब जिला प्रशासन और एमसी अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं पर फिलहाल यह स्प्ष्ट हो गया है कि जिला और एमसी प्रशासन में कहीं भी तालमेल नहीं है। शिमला शहर में अभी तो कोरोना पॉजिटिव की मौत का यह पहला मामला था ऐसे में प्रशासन में आपसी सामंजस्य में असंतुलन चिंता का विषय है।

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