नवरात्र में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को मिलेगी पूरी सुविधा …गोविंद सिंह ठाकुर

गोविन्द सिंह ठाकुर ने नवरात्री संबंधी तैयारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

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कुछ ही दिनों में देवी के पावन पर्व नवरात्र शुरू होने वाले हैं और मंदिरों में निश्चित तौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ेगी। कोरोना महामारी के चलते लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और नवरात्र में लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए भाषा ,कला और संस्कृति विभाग सजग हो गया है। नवरात्र में श्रद्धालुओं को मंदिरों में किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो और सरलता से भगवान के दर्शन कर सकें इसके लिए विभाग ने आज समीक्षा बैठक की।

श्रद्धालुओं को मिलेगी दर्शन की सुविधा :

भाषा, कला एवं संस्कृति मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने आज वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के उपायुक्तों के साथ आगामी नवरात्री की तैयारियों संबंधी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को नवरात्रों में प्रदेश और अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ कोविड-19 संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गोविन्द सिंह ठाकुर ने कहा कि सभी उपायुक्त अपने संबंधित जिलों की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोविड-19 के दृष्टिगत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर श्रद्धालुओं को सुविधाजनक दर्शन की सुविधा उपलब्ध करवाएं।

अधिक समय तक रहेगा मंदिर खुला:

उन्होंने कहा कि इस दौरान शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर को अधिक समय तक खुला रखने की व्यवस्था भी स्थापित की जाए। उन्होंने कहा कि नवरात्री के दौरान मंदिरों में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए जाए। कोविड-19 से संबंधित स्वच्छता संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ पुजारियों, दुकानदारों आदि को भी आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।

दूरदर्शन के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध संस्कृति होगी प्रसारित:

गोविन्द सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की अपनी एक समृद्ध धार्मिक संस्कृति है जिसका वृत्तचित्र के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश से सभी मंदिरों से जुड़े वृत्तचित्र का दूरदर्शन के माध्यम से प्रसारित करके प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को देश के कोने-कोने में पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिरों के परिसरों में नवग्रह वाटिका का निर्माण कर संबंधित मंदिर न्यास और ग्रामीण लोग इसका रख-रखाव करें। मंदिर न्यास अपने साथ स्वयं सहायता समूहों को जोड़कर मंदिर में चढ़ने वाले फूलों से अग्रबत्ती या धूप तैयार कर महिलाओं को आर्थिक लाभ प्रदान करने के प्रयास करें। श्रद्धालुओं को मंदिरों से जुड़ी जानकारी से अवगत करवाने के लिए जिलों में सांस्कृतिक केन्द्रों को भी स्थापित किया जाए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव भाषा, कला एवं संस्कृति आरडी धीमान, निदेशक भाषा, कला एवं संस्कृति कुमुद सहित सभी संबंधित जिलों के उपायुक्त इस बैठक में उपस्थित थे।

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