फिर उठी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के इस्तीफे की मांग

कांग्रेस ने सरकार से कोविड -19 की आड़ में काम न करने वाले अधिकारियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने की मांग की

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स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटालों पर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर विपक्ष लगातार प्रहार कर रही है। चूंकि स्वास्थ्य विभाग मुख्यमंत्री के पास है इसीलिए कांग्रेस उनको बैक फुट पर डालने की पुरजोर कोशिश कर रही है। आज एक बार फिर पत्रकार वार्ता के माध्यम से विधायक शिमला ग्रामीण विक्रमादित्य सिंह ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का इस्तीफा मांगा। उन्होंने सीएम के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनके रहते स्वास्थ्य विभाग में चल रहे घोटालों की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। जयराम सरकार को हर क्षेत्र में विफल बताते हुए विक्रमादित्य ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में सीएम की नाक के नीचे हुए घोटालों की वजह से प्रदेश शर्मसार हुआ है और आज राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की चर्चा घोटालों के कारण हो रही है।

उन्होंने राज्यपाल से सरकार द्वारा की जा रही जांच पर अविश्वास जताते हुए हाई कोर्ट के माध्यम से जांच की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि अगर दो दिन के भीतर सरकार उनकी मांग नहीं मानती है तो पार्टी इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका दायर करेगी। 
कांग्रेस युवा नेता विक्रमादित्य ने कहा कि सीएम की कथनी और करनी में अंतर है। सीएम एक बात कहते हैं और उनकी सरकार के अधिकारी अलग बात। सीएम की बात का प्रभाव उनके अधिकारियों की बात से कम है। आज राज्य में हालात ये है कि कोरोना के मामले तो बढ़े ही हैं लेकिन इसके साथ ही प्रदेश के पर्यटन उद्योग और बागवानी को भी बहुत नुकसान हुआ है। आज हर क्षेत्र में सरकार विफल हो रही है। प्रदेश सरकार कोरोना से निपटने की व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में उन्होंने अपने नेताओं के साथ राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और सीएम से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि सरकार को कोरोना संकट में विपक्ष द्वारा होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों को बिजली ,पानी करों में छुट्ट देकर राहत देने का सुझाव दिया गया था लेकिन सरकार ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया बल्कि  सीएम ने राज्य को कोरेंटिन इंडस्ट्री बनाने की बात कही जिसका सभी होटल व्यवसाइयो ने विरोध किया।

कांग्रेस के युवा नेता विक्रमादित्य ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के विभागों के आला अधिकारियों ने कोरोना की आड़ में काम करना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि लोगों से सीधे तौर पर जुड़े विभाग के अधिकारियों से बात करने पर वह कोरोना का बहाना बना देते हैं। विक्रमादित्य ने ऐसे अधिकारियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग करते हुए  कहा कि ये अधिकारी जब एक विधायक के सामने बहाना बना देते हैं तो आम आदमी की तो बात कैसे सुनेंगे ? उन्होंने कहा कि कोरोना के साथ चलते हुए विकास के कार्यों को गति देनी पड़ेगी। 

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