गुमनाम शिकायत पत्र से अहम सुराग तक पहुंची शिमला क्राइम ब्रांच, आरोपी गिरफ्तार

वेंटीलेटर खरीद मामले में पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने पत्रकार वार्ता में सांझा की जांच की कड़ियां

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हिमाचल प्रदेश में वेंटीलेटर की खरीद को लेकर प्रदेश सरकार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग पर घोटालों के आरोप लगे। पक्ष-विपक्ष में आरोपों-प्रत्यारोपों का जबरदस्त दौर चलता रहा। सरकार पर विपक्ष द्वारा लगातार दबाव बनाता रहा। आखिरकार इन घोटालों की जांच क्राइम ब्रांच को दे दी गई और 4 जून 2020 को विभाग को मिली गुमनाम शिकायत से शुरू हुई जांच के तहत क्राइम ब्रांच की तहकीकात अहम सुराग तक पहुंच गई और आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। आज पुलिस मुख्यालय में हुई पत्रकार वार्ता में पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने जांच की गई कड़ियों को सांझा किया।

चिकित्सा उपकरण निर्माता संघ के सचिव के नाम शिकायत :

उन्होंने बताया कि 4 जून, 2020 को हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर क्राइम ब्रांच सीआईडी शिमला को एक गलत नाम नाम से कंप्लेंट प्राप्त हुई थी। इस शिकायत में कुछ अनजान लोगों द्वारा हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन का नाम बदनाम करने की साजिश रचने और घोटालों का आरोप लगाया था। यह शिकायत चिकित्सा उपकरण निर्माता संघ के सचिव के नाम पर की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ने घटिया और कम लागत वाले वेंटिलेटर को 10 लाख प्रति यूनिट में खरीदा जबकि हिमाचल हरियाणा के निजी अस्पतालों में यह वेंटिलेटर 3 लाख रुपये में बेचे गए।

शिकायत पत्र को आधार बनाकर शुरू की गई तफ्तीश:

क्राइम ब्रांच ने इस शिकायत के आधार पर आईपीसी की 203, 500, 505 और 120B और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 52 के तहत क्राइम ब्रांच में यह मामला दर्ज किया और इस पर छानबीन शुरू की गई। क्राइम ब्रांच ने शिकायत के आधार पर तफ्तीश की और यह पता लगाया कि यह शिकायत हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन को कैसे और कहां से भेजी गई है। हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने बताया कि जांच में मेडिकल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया नाम की कोई भी संस्था नहीं पाई गई और यह भी जानकारी मिली कि शिकायत पत्र में दिया गया एड्रेस भी पूरी तरह से गलत है। अंततः जांच में क्राइम ब्रांच को चिट्ठी के चंडीगढ़ के सेक्टर 47 से स्पीड पोस्ट द्वारा भेजे जाने का पता चला। इसी दौरान जांच में यह भी पता लगा कि इसी पोस्ट ऑफिस से हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के विजिलेंस विभाग और हरियाणा के मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को भी इसी तरह की गुमनाम चिट्ठी प्राप्त हुई थी। पुलिस को जांच के दौरान व्यक्ति के विषय में पता नहीं लग पाया क्योंकि पोस्ट ऑफिस के आसपास कोई भी सीसीटीवी नहीं लगा हुआ था। हालांकि यह चिट्ठी स्पीड पोस्ट द्वारा भेजी गई थी लेकिन पोस्ट ऑफिस में चिट्ठी भेजने वाले व्यक्ति का कोई भी विवरण दर्ज नहीं था। चिट्ठी में वेंटिलेटर सप्लाई करने वाली कंपनी का मोहाली के ऑफिस की गोपनीय दस्तावेज भी साथ में लगाए गए थे। लिहाजा क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने इस कंपनी के मोहाली स्थित ऑफिस में जाकर जांच की और एक संदिग्ध पूर्व कर्मचारी के बारे में पता कर लिया। क्राइम ब्रांच ने पूरी जांच के दौरान लगभग 50 से ज्यादा लोगों से गहन पूछताछ की और यह पता कर लिया कि कार्डियो लैब का यह संदिग्ध पूर्व वरिष्ठ कर्मचारी इस गुमनाम चिट्ठी का सूत्रधार है। जांच के दौरान वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करके कार्यालय में उक्त व्यक्ति से बुलाकर पूछताछ की। पूछताछ में हिमाचल सरकार इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश हुआ।

बदले की भावना से रची साजिश:

पुलिस जांच के दौरान आरोपी ने बताया कि मोहाली में 2014 से 2019 तक काम किया था और कंपनी के मालिक ने उसे नवंबर 2019 में काम से निकाल दिया था। मालिक से बदला लेने की भावना के चलते उसने ही यह गुमनाम चिट्ठी लिखने की साजिश रची।

पुलिस निदेशक कुंडू उन्होंने बताया कि गोपनीय दस्तावेज आरोपी के पास थे और हिमाचल प्रदेश सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा 30 मार्च के 10 वेंटिलेटर की खरीद ऑर्डर की कॉपी मिलने के बाद वह पोस्ट ऑफिस से चला गया था। उन्होंने बताया कि सीआइडी के एसपी वीरेंद्र कालिया की अगुवाई में इस साजिश का भंडाफोड़ हुआ है और शीघ्र ही इस मामले में जांच करके आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया जाएगा। फिलहाल अभी आरोपी जमानत पर है।

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