मुख्यमंत्री ने 62 नए घोषित राष्ट्र उच्च मार्गों की विस्तृत परियोजना कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश

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मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने लोक निर्माण विभाग को 31 मार्च, 2018 तक प्रदेश के लिए 62 नए घोषित राष्ट्रीय उच्च मार्ग की विस्तृत परियोजना रिर्पोट तैयार करने के लिए परामर्श सेवाएं आबंटित करने के लिए निर्देश दिए। मुख्यमंत्री आज लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समय पर विस्तृत परियोजना रिर्पोट तैयार किए जाने की आवश्यकता है ताकि इन राष्ट्रीय उच्च मार्गों का कार्य शीघ्र आरम्भ किया जा सके। वर्तमान में 4400 किलोमीटर कुल लम्बाई की 69 उच्च राष्ट्रीय मार्ग घोषित किए गए है जिनमें 62 राज्य सरकार के अधीन एक सीमा सड़क संगठन, दो हिमाचल प्रदेश सड़क एवं अन्य अधोसंरचना विकास निगम तथा तीन राष्ट्रीय उच्च मार्ग एवं अधोसंरचना विकास निगम के अधीन है। एक राष्ट्रीय मार्ग संयुक्त रूप से हिमाचल प्रदेश सरकार व अन्य एजेंसी के अधीन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जमीन स्तर पर कार्य देखना चाहते हैं, ताकि प्रदेश के लोगों की लोक निर्माण विभाग से जो आशाएं हैं उन्हें धरातल पर लाया जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान सड़क परियोजनाओं का विस्तार तथा रख-रखाव को भी बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विभाग को ऐसी पंचायतों जो अभी तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ी है के लिए रोड़ मैप तैयार करने के भी निर्देश दिए और आगामी योजना में ऐसे गांवों व बस्तियों को जोड़ना होगा जो अभी तक सड़क सुविधा से वंचित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग को वित्त वर्ष के दौरान कितने किलोमीटर सड़कों व पुलों का निर्माण किया जाना है इसकी योजना पहले ही तैयार की जानी चाहिए ताकि निर्धारित लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य का निगरानी करना अतिआवश्यक है और वे चाहते है कि उनकी इच्छा है कि सम्बन्धित अधिकारी कार्य का नियमित रूप से अनुश्रवण सुनिश्चित बनाए। उन्होंने कहा कि सरकार ठेकेदार या अन्य किसी द्वारा कार्य में गुणवत्ता व टाल-मटोल के रवैइये पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि यदि बिना किसी उचित कारणों से कार्य में देरी होती है तो सम्बन्धित अधिकारियों को कार्यवाही का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री ने पखवाड़े के लिए लक्ष्य निर्धारित करने तथा तीन मुख्य परियोजनाओं का अनुश्रवण सुनिश्चित करने का भी सुझाव दिया। बैठक में यह भी बताया गया कि नाबार्ड के अर्न्तगत 634 करोड़ रुपये की लागत की 170 विस्तृत परियोजना रिर्पोट का कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त 487.21 करोड़ रुपये की लागत के 26 पुलों तथा 16 सड़क परियोजनाओं और 17 ब्लैक स्पॉट के उन्नयन का मामला केन्द्रीय भूतल एवं उच्च मार्ग मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अर्न्तगत 384 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिर्पोटों को भी केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है।
मुख्य सचिव विनित चौधरी ने सड़क निर्माण के कार्य विशेषकर पुलों के कार्य में तेजी लाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पुलों का निर्माण निर्धारित समय के भीतर पूरा किया जाना चाहिए क्योंकि कुछ पुलों का निर्माण सालों से लम्बित है जिसकी विभाग द्वारा पुनः समीक्षा की जानी चाहिए कि और कहा कि लोक निर्माण विभाग को अपने कार्यों में बदलाव लाने की आवश्यकता है। उन्होंने विभाग को सभी कार्यों को पूर्ण करने के समय में कटौती करने की सलाह दी और यह भी कहा कि सभी कार्यों में गुणवत्ता वर्करार रखी जाए जिस पर कोई भी समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस वर्ष अप्रैल व मई माह तक जमीनी स्तर पर बदलाव देखना चाहती है।

मुख्य सचिव ने निर्माणधीन राष्ट्रीय उच्च मार्गों पर सूचना पट स्थापित करने की भी सलाह दी। उन्होंने इसके लिए शिमला-परमाणु फोर-लेन परियोजना का उदाहरण दिया, जिसमें यात्रियों को हो रही असुविधा के लिए खेद बारे सूचना पट स्थापित किए जाने चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा नाबार्ड की दर्ज पर राज्य सड़क परियोजनाओं में भी परियोजनाओं के ठेकेदार का नाम कार्य की लागत व परियोजना का नाम का सूचना पट लगाने के भी निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण अनिल खाची ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने प्रत्येक बस्ति को सड़क से जोड़ने के लिए विजन दस्तावेज 2017 तैयार किया है। उन्होंने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता में सुधार करने में तथा निर्धारित समय में कार्य पूरा करने के लिए नई सड़क नीति आरम्भ की जाएगी।

उन्होंने कहा कि विभाग ने अपने लिए गुणवत्ता, सुरक्षा व धनराशि का सदुपयोग का सिद्धांत निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सड़क प्रबन्धन व अनुश्रवण प्रणाली को वैब आधारित सड़क प्रबन्धन प्रणाली से स्तरोन्नयन किया जा रहा है, जिससे सभी सड़कों व पुलों के बारे में विस्तृत सूची ऑनलाईन उपलब्ध होगी। सड़क सर्वेक्षण डाटा संग्रहण, आधुनिक सड़क सर्वेक्षण, डाटा अधिग्रहण सॉफटवेयर जैसे उपकरणों के साथ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़क प्रबन्धन एवं अनुश्रवण प्रणाली में विश्वभर में अनेक मुख्य चुनौतीपूर्ण सड़क परियोजनाओं के सफल निष्पादन में सहायक सिद्ध हुई है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर सड़कों व पुलों के बारे में एकत्रित डाटा का मुख्यालय पर नियमित रूप से विश्लेषण किया जाता है तथा उच्च मार्ग विकास मॉडयुल-4 विभिन्न सड़कों व पुलों के वार्षिक रख-रखाव के लिए योजना तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नन्दा, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन,चीफ, मुख्य अभियन्ता, व अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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