भारत छोड़ो आन्दोलन की 75वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में किया ‘युद्ध संग्रहालय’ का लोकार्पण

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‘अगस्त क्रांति’ के नाम से प्रसिद्ध ऐतिहासिक भारत छोड़ो आन्दोलन की 75वीं वर्षगांठ को देश में मनाए जाने के अवसर पर आज मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने धर्मशाला में लोगों को 9.85 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘युद्ध संग्रहालय’ का लोकार्पण किया तथा दाड़ी में स्वतंत्रता सेनानी स्मारक की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों को अपने सन्देश में कहा कि वह आजादी की लड़ाई के महान नायकों और उन सभी शूरवीरों को नमन करते हैं, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युद्ध संग्रहालय हिमाचल प्रदेश के विक्टोरिया क्रॉस के प्राप्तकर्ताओं से लेकर शूरवीर सैनिकों के बलिदान को याद करवाता है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय राष्ट्र के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा से लेकर कैप्टन विक्रम बतरा, सौरभ कालिया तथा राष्ट्र के लिए अपने प्राणों का बलदान करने वाले अन्य वीर सैनिकों के बारे में जानने का एक अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि ‘मैं हिमाचल के शहीद हुए वीर पुरूष व वीरांगनाओं को नमन करता हूं और साथ ही उनके परिजनों को भी नमन करता हॅूं जिनका स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक किसी न किसी रूप में देश के लिए बराबर का योगदान रहा है।

कारगिल युद्ध के नायकों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के सैनिकों द्वारा कई बलिदान किए गए और हिमाचली भूमि के 52 वीर पुत्र शहीद हो गए और इस युद्ध संग्राहलय में उनके बलिदानों तथा उनकी वीरता को पीढ़ियों तक जीवित रखने के लिए उल्लेखित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युद्ध कभी भी लाभकारी नहीं होता, लेकिन कभी-कभार यह अनिवार्य हो जाता है और यह वह समय होता है, जब हमारे सैनिक अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा के लिए दुश्मनों से लड़ते हुए अपने अदमय साहस का परिचय देते हैं। महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि 8 अगस्त, 1942 को मुंबई में उनके भारत छोड़ो भाषण में ‘करो या मरो’ के आह्वान के कारण ही हम औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता प्राप्त कर सके। उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आन्दोलन भारत की आजादी की लड़ाई के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

2190 वर्ग मीटर के कुल क्षेत्रफल में फैले संग्रहालय के बाहरी भाग में जनरल जोरावर सिंह और वीरों के भित्ति चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। अन्दर के भाग में वीरचक्र पुरस्कार विजेताओं, जमादार बन्धन राम तथा जमादार लाला की स्वर्ण पृष्ठ भूमि में दीवार पर लिखी गाथा को दर्शाया गया है। परमवीर चक्र तथा वीर चक्रों के विजेताओं में मेजर सोमनाथ शर्मा, मेजर धान सिंह थापा, बैप्टन विक्रम बतरा, मेजर सुधीर वालिया, ऑनरेरी कैप्टन संजय कुमार को शामिल किया गया है। संग्र्रहालय में देश के सभी परमवीर चक्र विजेताओं की फोटो गैलरी के अलावा विक्टोरिया क्रॉस, अशोक चक्र, वीरचक्र इत्यादि सहित विभिन्न वीरता पुरस्कारों के पदक शामिल किए गए हैं।

संग्रहालय में 52 फुट आयात के अशोक स्तम्भ के अलावा पाकिस्तान से जीते गए झण्डे, रेजिमेंटल झण्डा, मीडियम मशीन गन इत्यादि को भी शामिल किया गया है। हालांकि, भारत सरकार से मिग-21 तथा अन्य सैन्य शस्त्रों का प्रदर्शन करने के उदद्ेश्य हेतु उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि ‘राज्य शहीद स्मारक सेवा तथा विकास सोसाईटी’ के प्रतिनिधियों को इस पुनीत व श्रद्धेय स्मारक की ओर ध्यान देना चाहिए। इससे पूव मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया के साथ हार-जलाड़ी में दौलतपुर-हार-जलाड़ी-खार्ट सड़क पर बनेर खड्ड पर 3.43 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित होने वाले 104 मीटर लम्बे पुल तथा कांगड़ा में 2.40 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित होने वाले 33 केवी विद्युत सब स्टेशन की आधारशिलाएं रखी। यह विद्युत उप-केन्द्र कांगड़ा तथा इसके उपनगरों की आठ पंचायतों की 60 हजार की आबादी को बिजली उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने धर्मशाला में डल झील के सौन्दर्यीकरण, लगभग 10 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित होने वाले राजकीय डिग्री कालेज मटौर तथा चामुण्डा मन्दिर परिसर में 5.87 करोड़ रूपये की लागत की एशियन विकास बैंक परियोजना की भी आधारशिला रखी।

उन्होंने धर्मशाला में 9.85 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित युद्ध संग्रहालय तथा करदयाणा की इक्कू खड्ड पर 1.35 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित पुल का लोकार्पण भी किया । उन्होंने 34,330 की वर्तमान जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए 17.43 करोड़ की लागत से कांगड़ा शहर के लिए उठाऊ पेयजल आपूर्ति योजना के सम्वर्द्धन का भी लोकार्पण किया । सन् 2046 तक इस योजना से लगभग 47,600 की आबादी को पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी । बनेर खड्ड से पानी उठाने के साथ इस योजना में 22 अग्निशमन हाईड्रैंट भी चलाए जाएंगे।

इससे पूर्व, मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि गद्दी बोर्ड के अध्यक्ष से जुड़े मेरे वक्तव्य को मीडिया द्वारा तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है जबकि मेरे कहने का तात्पर्य यह था कि प्रदेश में भाजपा राज्य अध्यक्ष के मुकाबले राज्य गद्दी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के ज्यादा अनुयायी हैं । उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासन में ही गद्दी कल्याण बोर्ड का गठन हुआ तथा प्रदेश को इस समुदाय पर गर्व है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सदैव गद्दी समुदाय के कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी रहेगी। उन्होंने कहा कि बात का बतंगड़ बनाना भाजपा की पुरानी आदत है। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, मुख्य संसदीय सचिव जगजीवन पाल, विधायक संजय रतन, अजय महाजन, पवन काजल, राज्य वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिह पठानिया, हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष बलवीर टेगटा भी अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित इस अवसर पर उपस्थित थे।

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