लाहुल स्पीति में पुर्नजीवित होने लगा छोलो खेल

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लाहुल स्पीति में पुर्नजीवित होने लगा छोलो खेल

विलुप्त हो चुके छोलो खेल स्नो फेस्टिवल में बना आकर्षण केंद्र

छोलो खेल
ये नाम सुनने में काफी अलग लग रहा होना । लेकिन लाहुल स्पीति में ये छोलो खेल पिछले कई सालों से खेला आ रहा है। छोलो खेल उस समय अधिक खेला जाता था जब कई महीनों तक लाहुल स्पीति बर्फ से पूरी तरह ढका रहता था। लेकिन जैसे जैसे तकनीक ने अपने पैर पसारने शुरू किए । छोलो खेल लोगों की पंसद से दूर जाता रहा। पिछले तीन दश्कों में इस खेल को खेलने वाले केवल बुजुर्ग लोग ही रह गए है। युवा पीढ़ी इस खेल में कोई रूचि नहीं दिखाती है। लेकिन इस बार लाहुल स्पिति प्रशासन ने स्नो फेस्टिवल में पुरानी संस्कृति को जीवित रखने के लिए कई खेल, और रीतियों को आगे लाने की मुहिम शुरू की है। इस फेस्टिवल में लाहुल स्पीति के कई गांवों में छोलो खेल को पुर्नजीवित किया जा रहा है । कई ग्रामीण इस खेल में हिस्सा ले रहे है। प्रशासन की ओर से आपस में प्रतियोगिताएं करवाई जा रही है ताकि खेल में रूचि बढ़ जाए।
छोलो खेल
छोलो खेल एक तरह खेल है जिसमें पासे होते है। इसमें अधिकतम छह खिलाड़ी हिस्सा ले सकते है। इसमें चाल चलनी होती है पास में एक से लेकर 12 तक के अंक होते है, जिनके हिसाब से चाल होती है।दूसरे शब्दों में ये भी कहा सकता है कि यह सांप सीढ़ी की तरह का खेल है। पुराने में समय में इस खेल में विजय हासिल करने वाले को इनाम या फिर अन्य वस्तु जो पहले से तय की होती है उसे दिया जाता है।
लहुल स्पिति के रहने वाले कुंदन शर्मा ने कहा कि ये खेल काफी पुराना है। विलुप्त होने की कगार पर ये खेल पहुंच चुका है । क्योकि अब इंटरनेट का जमाना है। आज के युवा नई नई खेलों में रूचि दिखाते है। छोलों खेल को नजरअंदाज किया जा रहा है। लेकिन इस बार स्नो फेस्टिवल में छोलो खेल की प्रतियोगिता में कई गांवों के लोगों ने हिस्सा लिया है युवाओं में भी इस बार खेल को सीखने की हौैड़ मची है।
जिलाधीश लाहुल स्पिति पंकज राय हमारे इस फेस्टिवल का उदेश्य यहां की संस्कृति को आगे ले जाना है कई पंरम्पराएं जो विलुप्त हो रही है उन्हें पुर्नजीवित करके लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बनाने की है। छोलों में लोग रूचि ले रहे है। छोलो खेल के प्रचार प्रसार के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रयासरत है।

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