कोरोना संक्रमित की मृत्यु के बाद बढ़ जाती हैं चुनौतियां

संक्रमित का पूरी सावधानी से किया जाता है दाह संस्कार

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सुंदरनगर : वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना संक्रमितों के लिए डेडिकेटेड कोविड अस्पताल नेरचौक में स्थापित किया गया है। डब्ल्यूएचओ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशानुसार सेनेटाईजेशन का कार्य भी अस्पताल में बखूबी से कोरोना योद्धाओ द्वारा निभाया जा रहा है। वहीं अगर कंटेनमेंट जोन की बात करें तो नगर परिषद नेरचौक द्वारा कोरोना पाजिटिव मामले आने के तुरंत बाद क्षेत्र का सेनेटाईजेशन किया जा रहा है। डेडिकेटेड कोविड अस्पताल नेरचौक में कोविड पॉजिटिव डेडबॉडी के लिए अस्पताल प्रबंधन और सेनिटेशन विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में सेनेटाइजेशन के संसाधन मौजूद हैं। सोडियम हाइपोक्लोराइइड का इस्तेमाल कोविड पॉजीटिव डेडबॉडी और कंटेनमेंट इलाकों को सेनेटाइज करने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। इस सेनेटाईजेशन घोल का अनुपात 1:9 रहता है, जिसमें 9 लीटर पानी में एक लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइड का इस्तेमाल किया जाता है।

डेडिकेटेड कोविड अस्पताल नेरचौक में अभी तक कोरोना महामारी से 10 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनका दाह संस्कार उनके धर्म के मुताबिक सुकेती खड्ड के किनारे बल्ह घाटी के कंसा में सेनेटाईजेशन करने के उपरांत प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है। किसके साथ सेनाटाइजेशन स्टाफ की भूमिका इस कोरोना कॉल में अति महत्वपूर्ण रही है।


मेडिकल कॉलेज नेरचौक के एसएमएस डा. जीवानंद चौहान ने बताया कि मैडीकल कॉलेज नेरचौक में अभी तक 10 कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है जिसमे से मंडी जिला के 7 और अन्य 3 लोग अन्य जिलो से संबंध रखते थे। उन्होंने कहा की कोरोना संक्रमित की मौत होने पर बॉडी के लिए स्टैंडर्ड पैरामीटर के हिसाब से सेनेेटाईजेशन किया जाता है उन्होंने कहा की कर्मियो को सेनेेटाईज करने की पूरी ट्रेनिग दी गई। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित कि बॉडी में वायरस कहीं भी हो सकता है जिस कारण वायरस फैलने का खतरा रहता है। उसी वायरस को रोकने के लिए बॉडी के साथ पुरे क्षेत्र को सेनाटाईज करना जरुरी है ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा की मैडीकल कॉलेज में आउटसोर्स कर्मचारियों का पूरा स्टाफ तैनात है उन्ही के द्वारा अस्पताल सहित कोरोना संक्रमित की मौत होने से सेनाटाईजेशन का कार्य किया जाता है।


मेडिकल कॉलेज नेरचौक के सेनाटाइजेशन डिपार्टमेंट के सुपरवाइजर डोलाराम का कहना है कि जैसे ही कोई पॉजिटिव केस अस्पताल में पहुँचता है तो शुरुआत से लेकर कोरोना वार्ड तक पॉजिटिव मरीज के पीछे-पीछे पुरे क्षेत्र को सेनेेटाईज किया जाता है उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित की मौत होने पर एक डेड बॉडी के लिए लगभग 40 से 50 लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइड इस्तेमाल किया जाता है उन्होने कहा की मैडीकल कॉलेज में 244 सफाई कर्मचारी और सभी कर्मचारियो की सेनेेटाइजेशन के लिए स्पेशल ड्यूटी लगाई जाती है उसी के हिसाब से सभी कर्मचारी अपनी-अपनी ड्यूटी निभाते है उन्होंने कहा की अगर किसी कोरोना संक्रमित की मौत होती है उस डेड बॉडी को वार्ड से लेकर डेड हाउस तक और डेड हाउस से लेकर अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया तक सेनाटाईजेशन किया जाता है ताकि वायरस फैल ना सके। और उन्होंने कहा कि यह कार्य बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहता है।


नगर परिषद नेरचौक के पार्षद रजनीश सोनी ने ने बताया कि जहां से भी नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन द्वारा दिशा निर्देश दिए जाते हैं उसी के तहत क्षेत्र को सेनाटाईज किया जाता है उन्होंने कहा कि कंटेनमेंट जोन में सेनेटाइजेशन करना एक चुनौती भरा कार्य रहता है लेकिन परिवार की रोजी रोटी के लिए कर्मियों को यह कार्य करना पड़ता है जिसके लिए नगर परिषद नेरचौक के कर्मियों की टीम 24 घंटे तैनात रहती है।


एसडीएम बल्ह व नगर परिषद नेरचौक के कार्यकारी अधिकारी आशीष शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमित की मौत होने पर मेडिकल कॉलेज नेरचौक का मुख्य किरदार रहता है मेडिकल कॉलेज के कर्मियो द्वारा डेड बॉडी को लिक फ्रूफ बैग में सोडियम हाइपोक्लोराइड सलयूशन के साथ पैक किया जाता है उन्होंने कहा की कोरोना संक्रमित की मौत होने के बाद कोरोना फैलने का खतरा कम है लेकिन सावधानी के तौर पर डेड बॉडी को लिक फ्रूफ बैग में पैक किया जाता है उन्होंने कहा कि मैडीकल कॉलेज के कर्मियो द्वारा डेड बॉडी को समशान घाट तक पहुँचाया जाता है और डेड बॉडी को जलाने के लिए वन विभाग द्वारा लकड़ी का इंतजाम किया जाता है और इस पुरे कार्य को नगर परिषद के ठेकेदार अंजाम देते है और पंडित सहित हवन सामग्री का कार्य पटवारी और कानूनगो के माध्यम से पूरा किया जाता है उन्होंने कहा कि यह कार्य बहुत ही चुनौती भरा रहता है।  

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