32 मरीजों की जान बचा चुकी डॉ. शिखा ने दी एक और मरीज को जिंदगी,की ट्रांस जुग्लर लिवर बायोप्सी

आईजीएमसी में इस तरह का हुआ पहली बार ऑपरेशन,पहले मरीजों को जाना पड़ता था चंडीगढ़ या एम्स नई दिल्ली

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गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए डॉक्टर्स भगवान से कम नहीं होते, जो ऐसे गंभीर मरीजों को ऐसी स्थिति से बाहर निकाल कर उन्हें नया जीवन प्रदान करते हैं। आईजीएमसी शिमला में ऐसा ही एक ऑपरेेेशन कर डॉ. शिखा सूद ने मरीज को नई जिंदगी दी है।आईजीएमसी में गंभीर बीमारी के कारण लंंबे समय से दाखिल महिला का ऑपरेशन जब डॉ. शिखा सूद ने किया तो ऑपरेेेशन के बाद मरीज स्वयं चलकर अपने वार्ड गया। आईजीएमसी में बुधवार को डॉ. शिखा सूद ने टीजेएलबी (ट्रांसजुग्लर लिवर बायोप्सी) की। उन्होंने इसऑपरेशन में मरीज के गले की नस से जाते हुए दिल के रास्ते से सारे औजार ले जाते हुए जिगर की एक नस में पहुंचकर जिगर से चार टुकड़े निकाल कर बायोप्सी की।

मरीज के जिगर व तिल्ली का बढ़ गया था आकार :

23 वर्षीय अनुपा जो कि चिड़गांव की रहने वाली है, गंभीर अवस्था में आईजीएमसी में दाखिल की गई थी। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन करके डॉ. शिखा सूद ने पाया कि उनका जिगर व तिल्ली का आकार बेहद बढ़ गया है, जिसके कई कारण हो सकते हैं। डॉ. शिखा ने एनसीपीएफ (नॉन-सिरोटिक पोर्टल हाईपरटेंशन) का डायगनोज बनाया जिसके लिए मरीज के जिगर की बायोप्सी होनी आवश्यक होती है। चूंकि तिल्ली के बढ़े होने के कारण मरीज को खून की कमी थी और उसका प्लैटलेट काउंट बेहद कम था। अत: साधारण बायोप्सी करने पर उसकी तुरंत मौत हो सकती थी। डॉ. शिखा सूद ने मरीज का टीजेएलबी करना तय किया।

दिल्ली से गैस्ट्रो इंटरस्टाइनल रेडियोलॉजी में की फैलोशिप:

यह एक जटिल ऑपरेशन है जिसमें बिना चीर-फाड़ किए मरीज की गले की नस से जाते हुए, सारे औजार दिल से गुजारते हुए, जिगर में पहुंचाया जाता है तथा जिगर से बायोप्सी की जाती है। हाल ही में डॉ. शिखा सूद एम्स नई दिल्ली से गैस्ट्रो इंटरस्टाइनल रेडियोलॉजी में फैलोशिप करके आई हैं तथा उन्होंने ऐसे कई प्रकार के जटिल आपरेशन करने में महारथ हासिल की है।

ऑपरेशन होते हुए मरीज मॉनिटर पर स्वयं देख सकता है:

डॉ. शिखा सूद ने मरीज का सारा हार्डवेयर नई दिल्ली से मंगवाया और सफलतापूर्वक यह ऑपरेशन किया। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इस जटिल ऑपरेशन में मरीज पूरी तरह से होश में रहता है, डॉक्टर से बातें करता रहता है तथा अपना ऑपरेशन होते हुए मॉनिटर पर स्वयं देख सकता है। ऑपरेशन के बाद पेशेंट स्वयं चलकर अपने वार्ड में गए।

आईजीएमसी में इस तरह का हुआ पहली बार ऑपरेशन:

आईजीएमसी के इतिहास में इस तरह का ऑपरेशन पहली बार किया गया है तथा बातचीत में डॉ. शिखा सूद ने बताया कि अब आईजीएमसी में इस तरह के ऑपरेशन आसानी से हो सकेंगे। मरीजों को इसके लिए अब हिमाचल से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। इससे पहले ऐसे सभी ऑपरेशनस के लिए हिमाचल के मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ या एम्स नई दिल्ली जाना पड़ता था।

पिछले दो माह में डॉ. शिखा सूद ने 32 मरीजों की बचाई जान:

पिछले दो माह में डॉ. शिखा सूद ने 32 मरीजों की जान बचाई है। इस ऑपरेशन के वक्त डॉ. शिखा सूद ने अपने पीजी स्टूडेंट्स को पढ़ाया और उन्हें इसको लेकर विस्तृत जानकारी भी दी। इस ऑपरेशन के समय रेडियोग्राफर तेजेंद्र व सिस्टर भी मौजूद रहीं।

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