सीमा तक पहुंच ही नहीं, लोगों के जीवन में बदलाव लाएगी अटल टनल

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रोहित पराशर

12 महीने बर्फ से ढ़के रहने वाले रोहतांग दर्रे के नीचे पहाड़ का सीना चीरकर बनाई गई अटल टनल सामरिक, रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। चट्टानों का कलेजा काटकर बनाई गई इस अटल टनल ने न सिर्फ कबाईली क्षेत्र लाहौल-स्पीति और लेह और लद्दाख के लोगों को सदियों की कैद से मुक्ति दिलाकर उनकी दुश्वारियों को कम किया है। बल्कि चीन और भारत के बीच चल रहे तनाव के बीच भारत की तैयारी को और अधिक मजबूत कर दिया है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस टनल के बनने से अब सेना लेह-लद्दाख से लगती सीमा तक जल्दी और कम खर्च में जल्दी तो पहुचेगी ही साथ ही अब सीमा तक पहुंचने के लिए छह माह तक का इंतजार भी खत्म होगा। सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण अटल टनल को हाल ही में 3 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम समर्पित किया है। टनल के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी के नाम पर बनी इस टनल के खुलने के साथ ही दुनिया के सबसे अधिक उंचाई वाले क्षेत्रों में बनी सबसे लंबी और आधुनिक टनल होने का रिकार्ड भी अटल टनल के नाम दर्ज हो गया है। रणनीतिक महत्व वाली यह टनल कई मायनों में लाहौल-स्पीति, लेह, लद्दाख के लोगों के जीवन में आर्थिक, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य, सुरक्षा, परिवहन और सांस्कृतिक तौर पर बदलाव लाएगी साथ में पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका अदा करेगी। साथ अभी तक देश-दुनिया से छह माह तक कटे रहने वाले इस शांत क्षेत्र में इसके बुरे प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। जिसको लेकर अभी से लाहौल और लेह-लद््दाख क्षेत्र के लोगों को चिंता सताने लगी हैं।

अटल टनल में विशेष:

हिमालय के पूर्वी पीर पंजाल रेंज में रोहतांग दर्रे के नीचे 10,171 फुट की ऊंचाई पर बनी यह टनल आधुनिक वास्तुकला का अनूठा नमूना होगा और पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक तकनीक वाली टनल है। 3000 मीटर की उंचाई पर घोड़े की नाल के आकार की यह टनल 9.2 किमी है। इससे जहां एक तरफ लाहौल क्षेत्र के लिए 12 माह वाहनों की आवाजाही होगी वहीं दूसरी तरफ रोहतांग दर्रे को पार करने में लगने वाले 5-6 घंटों के समय की भी बचत होगी। इसके अलावा इस टनल के निर्माण से मनाली से केलांग की 46 किलोमीटर की दूरी भी कम होने से समय और पैसे की बचत होगी।

घोड़े की नाल के आकार की अटल टनल दो मंजिला है। इसकी एक मंजिल में साधारण यातायात रहेगा। जिसकी चैड़ाई 10 मीटर है। जबकि इसके निचे आपातकाल के लिए एक सुरक्षा टनल बनाई गई है जिसकी चैड़ाई 3.6 मीटर और उंचाई 2.5 मीटर है।

दुनिया में अभी तक 3000 मीटर की उंचाई पर अटल टनल की लंबाई की बराबरी करने वाली टनल का निर्माण नहीं किया गया है।

टनल के सामरिक महत्व को देखते हुए इस टनल की सुरक्षा में तैनात होने वाले सुरक्षा कर्मियों की संख्या अन्य टनलों के मुकाबले कहीं अधिक है।

टनल के हर 1 किलोमीटर बाद पार्किंग स्पेस रखा गया है।

इमरजेंसी एग्जीट टनल में जाने के लिए हर 500 मीटर पर एस्केप रूट है।

टनल की निगरानी के लिए हर 250 मीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

हर 150 मीटर के बाद टेलीफोन की सुविधा है।

टनल में हर 60 मीटर के बाद फायर हाईड्रेंट लगे हैं।

इससे रोजाना करीब 1500 भारी वाहन और 3000 हलके वाहन, 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजर सकेंगे।

टनल के भीतर हवा की क्वालिटी जांचने के लिए हरेक किलोमीटर पर एयर क्वालिटी माॅनिटरिंग सिस्टम लगा है।

आपातकाल की सूचना के लिए आधुनिक ब्राॅडकाॅस्ट सिस्टम लगाए गए हैं।

टनल के निर्माण से संबंधित एक प्रदर्शनी भी तैयार की गई है।

अटल टनल के खुल जाने से जहां लाहौल और लेह-लद्दाख क्षेत्र के लिए बारह माह की आवाजाही शुरू होगी। इससे इन क्षेत्रों में आर्थिक, सामाजिक और ढांचागत विकास का गति मिलेगी वहीं दूसरी ओर इन क्षेत्रों में बाहरी दखल कहीं अधिक बढ़ जाएगा। जिससे जनजातिय क्षेत्रों में अशांति फैलने और यहां के सांस्कृतिक मूल्यों के लिए भी खतरा खड़ा हो गया है। जनजातिय क्षेत्र लाहौल के निवासी शाम आजाद कहते हैं कि अटल टनल लाहौल क्षेत्र के लिए विकास की नई ईबारत लिखने वाली है। इससे क्षेत्र के लोगों का विकास होगा, लोग अपनी सब्जियों और फलों को समय पर बाजार तक पहुंचा सकेंगे। साथ ही पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे लोगों को आर्थिक लाभ होगा। इसके साथ ही उनका मानना है कि बाहरी लोगों के आने से क्षेत्र के शांत माहौल में असर पड़ेगा। बाहरी लोगों की अधिक आमद से पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों पर असर और अपराध की घटनाओं का बढ़ना भी तय है। इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए अभी से प्रशासन और जनता को तैयारी कर लेनी चाहिए।

इसके अलावा अटल टनल के खुलने से न सिर्फ चीन की सीमा बल्कि पाकिस्तान के घुसपैठ वाले कारगिल, द्रास सेक्टर तक सेनाओं और गोला-बारूद और रसद को 12 महिने तक समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी। क्योंकि एयर कनेक्टिविटी के अलावा यदि इन क्षेत्रों में सेना की पहुंच बनानी है तो सिर्फ जोजीला पास वाला हाईवे ही काम आता है ऐसे में इसके बंद होने से यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मनाली लेह सड़क मार्ग इन क्षेत्रों तक पहुंचने में अहम भूमिका अदा करता है। गौर रहे कि कारगिल वाॅर के दौरान भी मनाली लेह मार्ग का प्रयोग रसद पहुंचाने के लिए किया गया था और इसी दौरान रोहतांग टनल की जरूरत को समझा गया था। भविष्य में यह टनल लेह लद्दाख में तैनात भारतीय सेना के लिए भी लाइफ लाइन साबित होगी।

साल के अधिकतर समय बर्फ होने के चलते रोहतांग पास देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। लेकिन यहां पर वाहनों के अत्यधिक आवाजाही के चलते एनजीटी को सख्त कदम उठाते हुए रोहतांग पास जाने वाले वाहनों की संख्या को नियंत्रित करना पड़ा था। लेकिन अब टनल के बनने से लाहौल और लेह जाने वाले लोगों को रोहतांग नहीं जाना पड़ेगा जिससे इस क्षेत्र में वाहनों की संख्या में भारी कमी आएगी जो पर्यावरण की दृष्टि से बेहद फायदेमंद होगा। इस टनल से लाहौल क्षेत्र में न सिर्फ यातायात सुविधांए खुलेंगी बल्कि लाहौल क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सबंधी दिक्कतों से छुटकारा मिल जाएगा। सर्दियों में बर्फबारी के दौरान रोहतांग पास के कठिनाई भरे रास्ते के बंद होनेे की वजह से लाहौल क्षेत्र के लोगों को हवाई सेवाओं पर पूरी तरह से निर्भर रहना पड़ता है। टनल के बन जाने से लोग आसानी से मरिजों को कुल्लू और अन्य बड़े अस्पतालों तक पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा टनल के खुलने से क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं को भी बल मिलेगा। इससे क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की उपलब्धता हो सकेगी।

भारत की सीमाओं तक पहुंच बढ़ाने और मनाली से लेह तक के सड़क मार्ग को 12 माह खुला रखने के लिए के लिए भारत सरकार ने बीआरओ को अटल टनल के अलावा अन्य तीन टनल का निर्माण करने का जिम्मा सौंपा है। यह टनलें 16040 फीट उंचाई वाले बारालाचा ला पास में 13.2 किमी लंबाई वाली टनल, लाचुंग ला पास में 16800 फीट पर 14.78 किमी और 17480 फीट उंचाई पर तांगलांग ला पास में 7.32 किमी लंबी टनल बनाई जाएगी। हाल ही में अटल टनल के बनने से बौखलाए चीन ने इस टनल को सीमा तक सेनाओं की पहुंच के लिए लाभदायक सिद्ध न होने के बयान जारी किए थे जिससे चीन की बौखलाइट का पता चलता है। भारत की ओर से सीमा से सटे क्षेत्रों के लिए पहुंच बढ़ाने के लिए बनाई जा रही सड़कों और टनल के निर्माण से युद्ध होने की स्थिति में मजबूती मिलेगी वहीं सीमा से सटे लोगों के जीवन में सुधार होगा।

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