अपनी कार्यप्रणाली पर फिर घिरा एचपीयू प्रशासन, बरती जा रही मूल्यांकन प्रक्रिया में लापरवाही..

छात्रा को दिया गणित के पेपर में जीरो, अभाविप ने कार्यवाही की मांग करते हुए उठाए अन्य छात्र हित के मुद्दे ..दी चेतावनी नहीं मानी मांगे तो होगा प्रदर्शन

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https://youtu.be/62y5qEmJjto

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की मूल्यांकन प्रक्रिया एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है। छात्र संगठन एबीवीपी ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से विवि प्रशासन पर आरोप लगाए हैं कि प्रशासन की अनदेखी व लापरवाही की वजह से छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय मूल्यांकन प्रक्रिया की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है जिसका खामियाजा बीएससी की छात्रा को गणित के पेपर में जीरो अंक लेकर भुगतना पड़ रहा है। जब इस पेपर को आरटीआई के माध्यम से निकाला गया तो यह तथ्य सामने आया कि छात्रा के उत्तरपुस्तिका को सही से नहीं जांचा गया है और उत्तरपुस्तिका के सभी पन्नों पर निरीक्षक द्वारा क्रॉस लगाया है। एक भी प्रश्नों के जवाब निरीक्षक ने सही नहीं माने हैं। जबकि अन्य विशेषज्ञ अध्यापकों की माने तो छात्रा को कम से कम 40 से 45 अंक उत्तर पुस्तिका में प्राप्त हो सकते थे।

कोरोना की आड़ में प्रशासन भाग रहा जिम्मेदारी से:

एबीवीपी छात्र संगठन ने मांग की है कि की मूल्यांकन प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाए और इस प्रकार की लापरवाही बरतने वाले अध्यापकों और निरीक्षकों के खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जाए। इसके अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विशाल वर्मा ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा की कोरोना काल में सबसे अधिक असर शैक्षणिक क्षेत्र पर पड़ा हैं और ऐसे में कोरोना की आड़ एचपीयू प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से भागता नजर आ रहा है। साथ ही यूजीसी की आड़ में प्रदेश भर के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने पर उतारू है।

भुला अपना दिया आश्वास :

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रवेश परीक्षाओं को करवाने की मांग करते हुए प्रशासन द्वारा प्रवेश परीक्षा की जगह मेरिट के आधार पर पीजी कक्षाओं में दाखिला देने की बात का विरोध किया है। विद्यार्थी परिषद ने कहा कि प्रशासन छात्रों से एंट्रेेंस के नाम से पहले ही फीस वसूल चुकी है और अब यूजीसी निर्देशों के बहाने से प्रवेश परीक्षा नहीं करवा रहा है। अभाविप ने कहा कि यह हज़ारों छात्रों के साथ धोखा है। कोरोना काल में यूजी की परीक्षा करवाने से पहले प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य से बाहर रह रहे छात्रों और किसी वजह से पेपर न दे सकने वाले छात्रों को आश्वासन दिया था कि उनकी परीक्षाओं के लिए अलग से प्रबंध किया जाएगा लेकिन अब शायद सरकार और विश्वविद्यालय यह भूल चुके है और विश्वविद्यालय तो पीजी कक्षाओं में एडमिशन की तैयारी में है ऐसे में उन छात्रों के साथ भी धोखा है जो अंतरराज्यीय परिवहन बन्द होने और कोरोना संक्रमित होने की वजह से परीक्षा नही दे पाए हैं ।

अभाविप ने की मांग:

इन सभी मुद्दों को लेकर विद्यार्थी परिषद ने मांग की है कि पीजी कक्षाओं में दाखिले प्रवेश परीक्षा के आधार पर होने चाहिए। छात्रों से होस्टल निरंतरता फीस न लेकर छात्रों से कोरोना काल में सिर्फ ट्यूशन फीस ही ली जाए। साथ ही जो छात्र अंतरराज्यीय परिवहन बन्द होने व कोरोना संक्रमित होने या संपर्क में आने की वजह से परीक्षा नहीं दे पाए थे पहले उनकी परीक्षा ली जाए तभी पीजी कक्षाओं में दाखिले हों। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शिक्षक व गैर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पुरी हो। यूजी पेपर चेक में आ रही अनयिमित्ताओं को भी शीघ्र दूर किया जाए।

मांगो पर अमल नहीं किया गया तो होगा प्रदर्शन:

अध्यक्ष विशाल वर्मा ने कहा कि अगर विवि प्रशासन और सरकार उनकी मांगों को नहीं मानता है तो विद्यार्थी परिषद से 10 से 17 अक्टूबर तक आंदोलन करेगी जिसकी रूपरेखा यूं रहेगी। 10 – 13 अक्टूबर तक ऑनलाइन व ऑफ़लाइन माध्यम से हस्ताक्षर अभियान व व्यापक ईमेल अभियान चलाया जाएगा अगर उसके बावजूद भी अगर सरकार ब प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया तो 13-15 अक्टूबर को विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया जाएगा और 17 अक्टूबर को डीएम का घेराव किया जाएगा ।

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