अवैध तस्करी पर नहीं किया गया नियंत्रण तो 10 लाख जीव-जंतु खो देंगे अपना अस्तित्व

हिम्कोस्ट द्वारा"वाइल्ड लाइफ एंड इट्स कंजर्वेशन" पर वेबिनार का किया गया आयोजन

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हिमकोस्ट द्वारा 2-8 अक्टूबर से मनाए गए वन्यजीव सप्ताह में वन्यजीवों के संरक्षण पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद (हिम्कोस्ट ) ने कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन माध्यम से “वन्यजीव सप्ताह” मनाया। वेबिनार के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम “वाइल्ड लाइफ एंड इट्स कंजर्वेशन” थीम पर आधारित था।

कार्यक्रम में डॉ.सविता, आई.एफ.एस. प्रधान मुख्य वन संरक्षक ,एच.पी.वन विभाग, शिमला ने कहा की हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने बंदरों की समस्या से प्रदेश वासियों को राहत दिलाने के लिए बहुत से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गंगा के जीर्णोद्धार के लिए उठाए गए कदम काफी कारगर रहे हैं और अब यह देश की 9 अन्य नदियों के लिए भी उठाए जाएंगे।

अवैध तस्करी वन्यजीवों के लिए सबसे बड़ा खतरा:

आई.पी.एस, अतिरिक्त निदेशक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यू सी सी बी),भारत सरकार तिलोत्तमा वर्मा ने आगाह किया कि संयुक्त राष्ट्र के 150 सदस्यों वाले एक संगठन के शोध के अनुसार अगले कुछ वर्षों में वन्यजीवों की लगभग 10 लाख प्रजातियाँ विलुप्त हो जाएंगी। अवैध तस्करी सबसे बड़ा खतरा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अवैध वन्यजीव और लकड़ी व्यापार लगभग चालीस अरब डॉलर का है। भारत वनस्पतियों और जीवों के लिए एक समृद्ध देश है और यहां से कई तरह के जीवजंतु दक्षिण पूर्व एशिया और चीन में तस्करी किए जाते हैं। तस्करी किए जाने वाली प्रमुख प्रजातियों में टाइगर, तिब्बती मृग (चिरु), पैंगोलिन, सांप, कछुए और तितलियां हैं। इस श्रेणी में हिमाचल प्रदेश से बर्फानी तेंदुआ, तेंदुआ, सांप, पेंगोलिन इत्यादि रिपोर्ट किए गए हैं।
तिलोत्तमा वर्मा ने कहा कि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो इन जीवों के अवैध व्यापार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि तस्कर बहुत ही आधुनिक तरीकों और हथियारों का उपयोग कर रहे हैं और इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न विभागों को एक साथ आना होगा।

डॉ.जी अरीन्द्रन गोपाला ने वन्यजीवों की ट्रेकिंग में इस्तेमाल की जाने वाली विभिन तकनीकों जैसे रेडियो जीपीएस, सैटलाइट, कैमेरा, राडार, ड्रोन, श्रवण, वीएचएफ ट्रैकिंग, कंजर्वेशन जेनेटिक्स, आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस, आई ओ टी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लगभग 2 घंटे तक चले इस वेबिनार में विद्यार्थिओं, शोधकर्ताओं और वन विभाग के अधिकारिओं ने भाग लिया। उनके द्वारा पूछे गए प्रश्नों का विशेषज्ञों ने बहुत सरल भाषा में उत्तर दिया। सभी विशेषज्ञों ने एक मत से कहा की वन्य प्रजातिओं को बचाने के लिए सभी लोगों को प्रयास करने होंगे।
वेबिनार में 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
डॉ. अपर्णा, समन्वयक, एनविस ने वेबिनार की मेजबानी की और इस सप्ताह महत्त्व पर प्रकाश डाला।

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