आखिरकार रिज मैदान पर लौटा घुड़सवारी का आनंद

बरसात के बावजूद भी लोग ले रहे रिज मैदान पर घुड़सवारी का मजा

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राजधानी शिमला के अनलॉक-2 में प्रवेश करते ही रिज मैदान की शान घुड़सवारी भी आखिरकार लोगों ने शुरू कर दी है। एक दशक से चली आ रही घुड़सवारी कोरोना महामारी के कारण बंद हो गई थी और अब तीन महीने के लॉक डाउन के बाद आर्थिक तंगी से परेशान घोड़ी वाले लौट आए हैं। फिलहाल अभी पर्यटक नहीं हैं लेकिन शिमला के स्थानीय निवासी ही घुड़सवारी का आनंद ले रहे हैं। बरसात का मौसम होने के बावजूद भी छोटे-छोटे बच्चे घुड़सवारी कर रहे हैं। सरकार के द्वारा लॉक डाउन -2 में अधिक्तर गतिविधियों को खोलने के निर्देश दे दिए थे। ये घोड़ी वाले भी जिला प्रशासन और नगर निगम से फिर से अपने घुड़सवारी के काम को शुरू करने की मांग कर रहे थे। सुरक्षा निर्देशों को पालन करने की शर्त के साथ उन्हें अनुमति दे दी गई। शिमला में कुल पंजीकृत 15 घोड़ी वाले हैं जिनमें से फिलहाल अभी 3,4 घोड़ी वालों ने ही काम शुरू किया है।

चेहरों पर लौटी रौनक :

वहीं काम के फिर से शुरू होने से घोड़ी वालों के चेहरे पर भी रौनक लौट आई है। उनका कहना है कि अभी काम बहुत कम है। लोग कोरोना के डर से कम ही घरों से निकल रहे हैं पर काम के खुलने से हम खुश हैं और सभी की गुजारे लायक दिहाड़ी लग रही है। उन्होंने कहा कि लगातार तीन माह के लॉक डाउन के कारण उन्हें अपना और अपने परिवार का गुजारा कर पाना मुश्किल हो रहा था साथ ही उन पर अपनी घोड़ियों की देखरेख और उनके खानपान का भी खर्चा था। ऐसे में नोबल वेलफेयर सोसाइटी और कुछ मददगार लोगों का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि सोसाइटी और लोगों के द्वारा की गई मदद से यह मुश्किल वक्त कट पाया है।

कोरोना बचाव के सभी दिशा-निर्देशों का कर रहे पालन:

शेरदीन जो पिछले 38 सालों से रिज मैदान पर लोगों को घुड़सवारी करवा रहे हैं उनका कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी माहमारी पहली बार देखी है जिसने पूरी दुनिया को घरों में बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि वह भी तीन महीने अपने घर पर कैद रहे। उन्होंने कहा इस लॉक डाउन ने न सिर्फ इंसानों पर असर डाला है बल्कि उनकी घोड़ियों पर भी असर डाला है लेकिन अब काम खुलने से राहत है। उन्होंने कहा कि वह कोरोना से बचाव की सरकार द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पूरा पालन कर रहे हैं। सवारियों के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखते हुए वह हर सवारी के बाद घोड़ी की काठी को सेनेटाइज करते हैं और खुद भी मास्क पहनते हैं और सवारी को भी मास्क पहनने के लिए बोलते हैं ताकि वह स्वयं ,उनकी सवारी और साथ ही उनकी घोड़ी भी कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहे।

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