■ मुकेश जी, आप वक़्त याद करो,जयराम जी आप वक़्त सम्भालो

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उदयवीर पठानिया, धर्मशाला

बड़ा हल्ला मचा हुआ है कि शुक्रवार को विधाननसभा में वैचारिक दंगा हो गया। हाथापाई भी हो गई। बहुत कुछ हुआ। भाजपा-कांग्रेस नेता इसे एतिहासिक घटना का खिताब भी दे रहे हैं। पर इसे कोई एतिहासिक नहीं है,यह काला दिन था। दोनों पार्टियां इतिहास के हमाम में बेपर्दा हैं। कुछ सवालों के जबाव नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री,मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अपेक्षित हैं,क्योंकि आपके मलयुद्ध में उपेक्षित जनता रही है…

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【 मुकेश अग्निहोत्री जी यह था आपका वक़्त 】
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सर,आज आप खफ़ा हो गए कि महामहिम राज्यपाल ने पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ा। चलिए,आपकी बात मान लेते हैं। पर इन सवालों का जबाव दीजिए…

1) क्या यह पहली दफा हुआ है ?
2) आप अगर खफा थे तो राज्यपाल का घेराव क्यों ?
3) क्या राज्यपाल जो सदन में पढ़ते हैं,वह उनके दिमाग की उपज होती है ? इसे कौन लिखता है ?

नहीं, सर। यह पहली दफा नहीं हुआ है। और जिस तरह से हुआ है वह पहले भी हो चुका है और आपके सत्ता काल में ही हुआ था। साल 2015 के मार्च की है। आप तब संसदीय कार्य मंत्री थे। कार्यकारी राज्यपाल थे कल्याण सिंह। दिन था 12 मार्च का और वह भी बजट सत्र ही था। तब कल्याण सिंह ने सिर्फ सवा चार मिनट ही वीरभद्र सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया था और वह भी निकल गए थे। फर्क इतना है कि तब राज्यपाल भाजपाई विचारधारा के थे और आप कांग्रेसी। तब नेता विपक्ष प्रो प्रेम कुमार धूमल थे। तब भी उन्होंने वही कहा था जो आज आप कह रहे हैं। धूमल ने यह कहा था कि जब सरकार की कोई उपलब्धी है ही नहीं तो राज्यपाल क्या कहते ? आप यह कह रहे हैं कि अभिभाषण झूठ का पुलिंदा था। जब झूठ ही था तो क्या जरूरत थी उनके मुखारवृन्द से सुनने की ? घेराव करने की क्या जरूरत थी ? झूठ था तो सुनना जरूरी था क्या ?

सर,राज्यपाल का अभिभाषण सरकारी अफसरों ने लिखा होता है। उन्होंने नहीं। वह सिर्फ मेरी सरकार ने यह किया है,मेरी सरकार यह करेगी,यही बोलते हैं। आप जानकार हैं। नेताओं को घेरते,सीएम को घेरते,अफसरों को लपेटते । पर नहीं,आप के निशाना बना गए राज्यपाल। आपने भी भाजपा को उसी सुरंग में फंसाया है,जिसे एक दौर में आपकी पार्टी गुजरी थी। यह वक़्त आपका था,जनाब।

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【 जयराम जी,आप वक़्त सम्भालो 】
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मिस्टर चीफ मिनिस्टर, आज जो कुछ हुआ उसको लेकर आप और आपकी सरकार की भूमिका जिम्मेदार है। आपको क्या लगता था कि आपके मित्रवत व्यवहार से कांग्रेसी जमात और आपके अफसर आपसे भी मित्रवत व्यवहार करेंगे ? आज इतना हंगामा बरपा, कौन जिम्मेदार है इसके लिए ?

कांग्रेस आपके सत्ताकाल के पहले साल ही चुप रही। उसके बाद से लगातार हमलावर बनी हुई है। विपक्ष जितना गर्म हुआ,आप और आपकी सरकार उतनी नरम बनी रही है।वन मंत्री राकेश पठानिया को एकतरफ रख दिया जाए तो सदन और सरकार में और कोई कितना दमदार है,यह फैसला आप खुद कर लीजिए। फैक्ट एंड फिगर्स से हमला करने वाले भाजपाई नेताओं की जमात में आप स्वयं चेहरे तलाश लीजिए।

सर, कांग्रेस सुप्रीमों वीरभद्र सिंह से आपके सम्बंध जगजाहिर हैं। यह हो सकता है यह आपके सामाजिक संस्कार हों। यह भी हो सकता है कि यह रिश्ता उनके साथ उनके बड़प्पन की भी वजह हो। मगर यह भी हो सकता है कि यह आपका वीरभद्र सिंह को पॉलिटिकली हैंडल करने का तरीका हो ? वीरभद्र सिंह भी आपके लिए सज्जन और बड़ों की भूमिका में हैं। उनको आपके लिए तीखा बोलते हुए किसी ने नहीं सुना।

ठाकुर साहब, यह आपको एहसास होगा कि वीरभद्र जितने आपके लिए चुप हैं,बकाया कांग्रेसी उतने ही मुखर।बहुत पीछे जाने की जरूरत नहीं है। दो-तीन दिन पहले खबर आई कि सीआईडी ने कांग्रेस के खिलाफ बनी चार्जशीट पर काम शुरू कर दिया है। हल्ला हुआ और सारे कांग्रेसी हमलावर हो गए। फिर आपका बयान आ गया कि ऐसा अभी कुछ नहीं हो रहा है। तहकीकात चली हुई है। शायद आपको यह लगा होगा कि आप मित्रवत रहेंगे तो विपक्ष शांत रहेगा। कांग्रेसी यहां भी जीत गए। एक पत्थर उखाड़ेंगे तो ढेरों कांग्रेसी हमलावर निकल आएंगे। आपके पॉलिटिकल थिंक टैंक कहां रहते हैं ? एडवाइजर किस रोल में रहते हैं ? क्यों सीआईडी की टीम कांग्रेसी रणनीति का पता नहीं लगा पाती ? वक़्त आपका है, ठाकुर साहब। आप वक़्त सम्भालिए।

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【जनता का वक़्त ही खराब है】
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अब अहम बात यह है कि सत्ता पक्ष-विपक्ष किसके हक में हैं ? विपक्ष जिससे सबसे अधिक आस होती है,उसके लिए अपनी-अपनी आस अहम है । सरकार इस वहम में है कि जनता को कोई दुख दर्द नहीं है। सांझा सवाल है भाजपा-कांग्रेस दोनों से, क्या आपको हर दिन तो छोड़ो, हर पल बढ़ती महंगाई,बेरोजगारी नजर नहीं आती ? विधानसभा में बैठने की भी कीमत जनता अपनी जेब से चुकाती है। हम यह कैसे आत्मसात करें कि आप हमारी बात करने की बजाए अपने-अपने स्कोर सैटल करें ? सियासत में जनता का भी भला-बुरा सब कुछ छिपा होता है। पर जनता का तो वक़्त ही खराब है,क्योंकि आप दोनों अपने-अपने वक़्तों को सहेजने-सुधारने में लगे रहते हैं…

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