हिमाचल भाजपा में फिर मचेगी धूमल के नाम की धूम!

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हिमाचल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनावी साल ने दस्तक दे दी है। इसी महीने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के चार साल पूरे हो रहे हैं। नया साल चढऩे से पहले ही चुनावी रण सज जाएगा। कांग्रेस 25 दिसंबर को अपनी सरकार के चार साल पूरा होने के जश्न के बहाने प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा के धर्मशाला से चुनावी जंग की शुरुआत करेगी तो भाजपा इससे एक दिन पहले वीरभद्र सिंह सरकार के खिलाफ राज्यपाल को आरोपों से लैस चार्जशीट सौंपेगी। इसी परिदृश्य में आगामी चुनाव को लेकर एक अहम सवाल हिमाचल भाजपा के चेहरे से जुड़ा है। क्या इस बार भी हिमाचल भाजपा में चुनावी रण के दौरान प्रेम कुमार धूमल के नाम की ही धूम मचेगी?

हिमाचल भाजपा के समीकरण बताते हैं कि ये चुनाव भी धूमल की प्रत्यक्ष या परोक्ष अगुवाई में लड़े जाएंगे। इस बात की तस्दीक दो तस्वीरों से होती है। मंडी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान मंच पर प्रेम कुमार धूमल उनके साथ ही बैठे थे। बीच-बीच में पीएम नरेंद्र मोदी प्रेम कुमार धूमल से चर्चा करते रहे। पूरे आयोजन में धूमल को काफी अहमियत मिली। उसके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सोलन रैली से पहले भी धूमल ने उन्हें प्रदेश की राजनीतिक हालात को लेकर ब्रीफ किया। पार्टी के दो सर्वोच्च नेताओं द्वारा प्रेम कुमार धूमल को दिए जा रहे अधिमान से ये संकेत तो साफ निकल रहे हैं कि आगामी चुनाव में उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी के भीतरी समीकरणों को देखें तो संगठन में भी धूमल खेमे के नेता अधिक हैं।

तीसरी बार पार्टी अध्यक्ष बने सतपाल सिंह सत्ती भी प्रेम कुमार धूमल कैंप के माने जाते हैं। संगठन के लिहाज से देखें तो भाजपा के अधिकांश संगठनात्मक जिलों के मुखिया धूमल कैंप के हैं। कार्यसमिति में भी धूमल समर्थकों का दबदबा है। नए अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने राजनीतिक चतुराई से धूमल, शांता व नड्डा कैंप में संतुलन साधा है, लेकिन समूचे संगठन में प्रभाव धूमल गुट का ही नजर आता है। इस समय धूमल गुट के अपोजिट जेपी नड्डा खेमे को देखा जा रहा है। नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जरूर हैं, लेकिन हिमाचल का दौरा करने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। वे कई कार्यक्रमों में शिरकत करने के लिए हिमाचल आ चुके हैं। नड्डा से हर बार विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका के बारे में सवाल किया जाता रहा है, लेकिन ऐसे सवाल वे चतुराई से टाल जाते हैं। शिमला में एक आयोजन के बाद मीडिया ने नड्डा से भविष्य के सीएम को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने राजनीतिक चतुराई वाला जवाब दिया कि वे केंद्रीय मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं।

चूंकि नड्डा काफी समय से केंद्र की राजनीति में हैं, लिहाजा हिमाचल में उनका नेतृत्व अचानक से थोपने के आसार कम हैं। फिर प्रेम कुमार धूमल की प्रदेश भर में भाजपा कार्यकर्ताओं में पैठ है। वे दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी आगामी चुनाव में प्रदेश भाजपा के मिशन फिफ्टी प्लस को सफल बनाने के लिए धूमल के नाम पर ही दाव खेलेगा। जहां तक बात शांता कुमार व उनके खेमे की है, तो फिलहाल वो राजनीतिक हाशिए पर दिखाई दे रहे हैं। अब देखना होगा कि टिकट वितरण के समय प्रेम कुमार धूमल खेमे की कितनी सुनी जाती है। टिकट वितरण से ही सारे समीकरण साफ होंगे। फिलहाल की स्थितियां तो प्रेम कुमार धूमल के हिमाचल में पार्टी पर अप्पर हैंड की तरफ संकेत कर रही हैं।

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