हिमाचल प्रदेश बनेगा सड़क हादसे रोकने वाला देश का पहला राज्य

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road accidents in himachal
हिमाचल प्रदेश अत्याधुनिक आर ए डी एम एस तकनीक से सड़क हादसे रोकने वाला देश का पहला राज्य बनाने जा रहा है। इस तकनीक का सफल ट्रायल हो चुका है और आगामी 13 जुलाई को मुख्यमंत्री इसका लोकार्पण करेंगे। इस सारी योजना को सिरे चढ़ाने मैं यूरोप की जानी मानी एजेंसी ट्रांसपोर्ट रिसर्च लैब यानि टी आर एल तकनीकी सहयोग देगी, जबकि हिमाचल पुलिस और लोक निर्माण विभाग पूरी कार्य योजना की नोडल एजेंसियां रहेंगी। परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग इसकी सहायक एजेंसी रहेंगे, ।

शुरू मैं प्रदेश के सभी 250 पुलिस थानो और चौकियों मैं एक एक आदमी को आर ए डी एम एस के सॉफ्टवेर से युक्त टैबलेट दिया जाएगा और बाद मैं हादसों के स्थानो के हिसाब से इसे विस्तार दिया जाएगा । पूरी योजना पर करीब पाँच करोड़ खर्च होंगे जिसके लिए विशव बैंक मदद कर रहा है। पुलिस ने इस तकनीक के माध्यम से शिमला और मंडी जिलों की शत प्रतिशत मैपिंग भी कर ली है जिसके उत्साहवर्धक नतीजे सामने आए हैं। आई जी टी टी आर ज़हूर जैसी के मुताबिक इस तकनीक की मदद से एक साल के भीतर ही सड़क हादसों मैं तीव्र कमी देखि जा सकेगी और इस लिहाज से ये सारी योजना काफी लाभ दायक रहेगी। हिमाचल मैं सड़क हादसो की दर इस समय देश मैं सबसे अधिक है और हर साल करीब तीन हज़ार सड़क हादसे होते हैं। इनमाइन औसतन 14सौ लोग अकाल मृत्यु का शिकार होते हैं जबकि अढ़ाई हज़ार गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। ऐसे मैं लंबे समय से इस तरह की योजना की जरूरत महसूस की जा रही थी जो सड़कों पर पसरी मौत को लगाम दे सके।

इसी के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने इस महातव्कांक्षी योजना को मूर्तरूप दिया है। हालांकि प्र्शसनिक गति के धीमे होने से ये योजना पूरे छह माह बाद शुरू हो रही है। लेकिन पुलिस विभाग को उम्मीद है की अगले छह महीने के भीतर पूरे प्रदेश की डाटा मैपिंग हो जाएगी जिसके बाद इसकी सफलता जल्द शिखर छूएगी।

इस योजना के तहत विभिन्न विभागो के हादसो संबन्धित आंकड़े और दूसरी जानकारियाँ एक कंट्रोल रूम मैं एक क्लिक पर उपलव्ध रहेंगी। ये कंट्रोल रूम फिलहाल राज्य पुलिस मुख्यालय मैं स्थापित किया गया है झान एक बारी मैं 15 लोग इस पर काम करेंगे और कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे काम करेगा। इसके लिए टी आर एल राज्य के विभिन्न स्तरों के बीस अधिकारियों को अपने मुख्यालय लंदन मैं प्रशिक्षित कर चुका है।

कैसे कम करेगा सॉफ्टवेर:
कहीं भी सड़क हादसा होने की स्थिति मैं सॉफ्टवेर से लैस टैबलेट के माध्यम से पुलिस कर्मचारी घटनास्थल की तस्वीरें और ब्योरा भेजेगा । सोफ्टवेयर मैं कुल 88 फीचर हैं और सभी को अपडेट करना आवश्यक है। इसमे घटनास्थल , सड़क, गाड़ी, उसकी स्पीड सड़क की ढलान समेत तमाम जानकारी रहेगी। बाद मैं इसके आधार पर ये तय किया जाएगा की हादसे की असल वझ क्या है सड़क की खराबी, गति , गाड़ी या आँय कारण। बाद मैं इन सब चीजों का मिश्रित अनुसंधान करके हादसे रोकने के लिए पर्याप्त प्रयासों की अनुसंशा की जाएगी। जबकि आम तौर पर वहाँ चालक या सड़क की खराबी को कारण मानकर मामला खत्म समझा जाता है। इस तरहा से ये भी पता चल जाएगा की कहाँ और किस वजह से ज्यादा हादसे होते है । किस उम्र के चालक कितने हादसे कर रहे हैं। यहाँ तक की निजी और सरकारी वाहनो से होने वाले हादसों का भी अलग अलग विश्लेषण किया जाएगा।कहाँ सड़क सुधरी जाए और किस स्ट्रेच पर मेडिकल सुविधा तैनात की जाए ये चिन्हित किया जाएगा।

कैसे कम करेगा कंट्रोल रूम:
मौजूदा व्यवस्था मैं अगर कहीं कोई सड़क हादसा होता है तो उसकी सूचना 100 नंबर के माध्यम से निकटव्रती पुलिस थाने मैं जाती है…लेकिन आर ए डी एम एस के शुरू हो जाने से ऐसी तमाम काल सीधे केंद्रीय कंट्रोल रूम मैं आएंगी। काल आते ही पुलिस कर्मी पीड़ित या सूचना देने वाले से बात करते करते संभावित सथान का डिजिटल चित्रांकन करके नजदीकी पुलिस स्टेशन को भेजेगा । यही नहीं फीडबैक भी ली जाएगी की की टीम घटनास्थल के लिए निकली या नहीं। बाद मैं सूचना देने वाले को भी बताया जाएगा की क्या कारवाई हुयी। इस प्रकार फुलप्रूफ सिस्टम के तहत राहत पहुंचाई जाएगी।

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