हिमाचल की कांग्रेस सरकार अल्पमत में, सरकार ज्यादा दिन तक चलने वाली नहीः विपिन सिंह परमार

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शिमला

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार अल्पमत हैं और यह ज्यादा दिन तक चलने वाला नहीं है। शिमला में प्रैस कांफ्रेंस में विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता में ही रोष नहीं है बल्कि इसके विधायकों में ही भारी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि जब से कांग्रेस विधायकों ने हर्ष महाजन को समर्थन दिया है, तब से पूरी कांग्रेस पार्टी हिल सी गई है। आज हालात यह है कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ इसके मंत्रियों में ही रोष है।

विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस के छह विधायकों की सदस्यता रद्द करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर जगह सुनवाई व दलील होती है, मगर इन विधायकों को एक फरमान से ही अयोग्य करार दिया गया।

भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी डूबती सरकार को बचाने का काम कर रहे हैं। विधायकों तक को कैबिनेट रैंक के साथ चेयरमैन  बनाया जा रहा है लेकिन मुख्यमंत्री अपनी सरकार को बचा नहीं पाएंगे।

उन्होंने बागी विधायकों के लिए मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू द्वारा काले नाग की संज्ञा देने पर आपत्ति जताते कहा कि ऐसा बोलना दुर्भाग्यपूर्ण है।  उन्होंने कहा कि विधायकों का रोष अपनी सरकार के खिलाफ सामने आ रहा है।  यह सारी परिस्थियां दर्शाती हैं कि कांग्रेस में आपकी लड़ाई चरम पर है और इनके  कारण यह राजनीतिक स्थिति आज प्रदेश में बनी है।

विपिन परमार ने कहा कि सरकार के मंत्री व विधायकों द्वारा अपनी उपेक्षा और अनदेखी के आरोपों से सरकार व कांग्रेस संगठन की असलियत जनता के सामने आ गई है। उन्होंने सरकार पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार की खींचतान व विधायकों की उपेक्षा से आज प्रदेश में राजनीतिक संकट पैदा हुआ है।

भाजपा नेता ने  आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार योजनापूर्वक से जगह-जगह झगड़े करवा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने 6 विधायकों को हटा दिया है। ज्यादातर धरना प्रदर्शन इनको लेकर हो रहे है और लड़ाइयां की जा रही हैं जिनको रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार जिस तरह से काम कर रही है वो असंवैधानिक व लोकतंत्र के खिलाफ़ है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से पहले 15 भाजपा विधायकों को विधानसभा सत्र के दौरान सस्पेंड कर बजट पारित किया गया वो अलोकतांत्रिक है।  वहीं अब जिस प्रकार से 6 विधायकों की विधानसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई,वो भी अलोकतांत्रिक है।

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