सोशल मीडिया पर भी छिड़ी चुनावी जंग, देश में सबसे अधिक हिमाचल की टेलीडेंसिटी

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    शिमला। लोकसभा की चुनावी जंग सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। हिमाचल की बात करें तो यहां की टेलीडेंसिटी देश में सबसे अधिक है। फिर हिमाचल की साक्षरता दर भी प्रभावशाली है। हिमाचल की टेलेडेन्सिटी 136 फीसदी है। यहां 90 लाख सिम कार्ड एक्टिव हैं। भाजपा व कांग्रेस ने अपनी अपनी सोशल मीडिया टीम तैयार की है। ये टीम फ़ेसबुक से लेकर व्हाट्सएप पर सक्रिय है। इसका लाभ भी राजनीतिक दलों को मिल रहा है। भाजपा व कांग्रेस अपना प्रचार इसके जरिये दूर दराज तक ले जाने में कामयाब हुई है। खास कर युवाओं तक इन दलों की पहुंच बनी है। 90 लाख के करीब सिम एक्टिव होने से पलक झपकते ही प्रचार कोने कोने तक चला जाता है। करीब 70 लाख की आबादी वाले हिमाचल प्रदेश में 90 लाख मोबाइल फोन उपभोक्ता हैं। यहां हर व्यक्ति के पास एक से अधिक मोबाइल फोन व एक से अधिक कंपनियों के सिमकार्ड हैं। सरकारी उपक्रम बीएसएनएल पर भरोसा करने वालों की संख्या भी हैरान कर देने वाली है। प्रदेश में बीएसएनएल की सिम यूज करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 26 लाख है। प्रदेश में 90 लाख मोबाइल उपभोक्ताओं के महीने का औसतन खर्च 200 रुपए भी रखा जाए तो पूरे महीने का खर्च 1 अरब, 80 करोड़ रुपए बैठता है। इसके अलावा पोस्टपेड उपभोक्ताओं व नेट उपभोक्ताओं का खर्च अलग से है। ये खर्च भी कम से कम 1.5 अरब रुपए महीने का है। इस तरह पूरे महीने का खर्च 3 अरब रुपए से अधिक है।

    हिमाचल में मोबाइल क्रांति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले शिमला शहर में मोबाइल फोन शॉप्स की संख्या 700 से अधिक है। प्रदेश के दूरदराज गांवों में भी लोगों के पास एंड्रायड फोन हैं। सस्ते नेट पैक के कारण यहां के उपभोक्ता सोशल मीडिया का भी जमकर उपयोग करते हैं। रिलांयस जिओ के सस्ते नेटपैक के बाद बीएसएनएल भी कई पैकेज जारी कर चुका है। लोगों ने नेटवर्क के हिसाब से सिमकार्ड लिए हैं। कई जगह बीएसएनएल का सिग्नल मजबूत है तो कहीं रिलायंस, एयरटेल व आइडिया का। इस कारण भी लोगों के पास एक से अधिक सिम हैं। संचार नियमों के मुताबिक एक व्यक्ति अधिकतम नौ सिमकार्ड रख सकता है। इसी वजह से मोबाइल डैंसिटी के मामले में हिमाचल देश में नंबर एक है। यहां बता दें कि हिमाचल प्रदेश में लैंडलाइन फोन की शुरूआत अस्सी के दशक में हो गई थी। उस समय दो डिजिट के टेलीफोन नंबर हुआ करते थे और टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए उपभोक्ता बात कर पाते थे। संचार क्रांति में हिमाचल प्रदेश ने अपना उल्लेखनीय स्थान बनाया है और अब प्रदेश के दूरदराज इलाकों में भी मोबाइल फोन उपभोक्ता हैं। हिमाचल की जनता का सबसे अधिक भरोसा सरकारी उपक्रम भारतीय संचार निगम लिमिटेड पर है। बीएसएनएल के 26 लाख उपभोक्ता हैं। इसके अलावा एयरटेल, वोडाफोन, रिलांयस जिओ, आइडिया आदि प्रमुख कंपनियां हैं। रिलांयस जिओ ने तो इस क्षेत्र में क्रांति लाई है। हिमाचल की जनता की बीएसएनएल पर भरोसा इसलिए भी है कि यहां मोबाइल उपभोक्ता की निजता सुरक्षित है। बीएसएनएल की सीडीआर सुरक्षित मानी जाती है। अन्य कंपनियां भी सुरक्षा पर काफी फोकस रखती है। दूरसंचार जिला शिमला के महाप्रबंधक एमसी सिंह के अनुसार इस दूरसंचार जिला में 105 एक्सचेंज हैं। यहां 292 टू-जी मोबाइल बीटीएस स्थापित की गई हैं। शिमला दूरसंचार जिला में 198 थ्री-जी मोबाइल बीटीएस हैं और यहां प्रदेश भर में सबसे अधिक डाटा उपयोग होता है। यहां 37 उपभोक्ता सेवा केंद्र हैं और बीएसएनएल जिला शिमला ने 206 फाईबर टू होम कनेक्शन प्रदान किए हैं। बीएसएनएल ने शिमला में फाइबर टू होम योजना आरंभ की है। इसमें उपभोक्ता को एक साथ कई सेवाएं दी जाती हैं। हॉटस्पॉट भी इसमें शामिल है। इसके अलावा नेक्स्ट जेनरेशन नेटवर्क की भी सुविधा है, जिसमें ऑल इंडिया स्तर का सीयूजी तैयार किया जा सकता है। पहले यह सुविधा सर्कल स्तर तक ही उपलब्ध होती थी। एमसी सिंह के मुताबिक बीएसएनएल शिमला इस साल सभी टूजी बीटीएस को थ्री-जी में अपग्रेड कर देगा।

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