विद्यार्थी जीवन में विकसित वैज्ञानिक दृष्टिकोण माँ भारती को पहुंचाएगा परम वैभव तक : धूमल

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एनआईटी हमीरपुर में विज्ञान भारती द्वारा आयोजित विद्यार्थी विज्ञान मंथन कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री ने नवाज़े होनहार विद्यार्थी और उन्हें अपनी संस्कृति, भाषा व पूर्वजों के गौरवमय इतिहास से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का किया आह्वान

               " विद्यार्थी जीवन में ही बच्चों में विकसित हुआ वैज्ञानिक दृष्टिकोण माँ भारती को परम् वैभव तक पहुंचाएगा। जो काम समाज में बहुत पहले प्रारम्भ हो जाना चाहिए था वो काम कुछ वर्षों से विज्ञान भारती संस्था कर रही है, मैं उनको साधुवाद देता हूँ ",   यह उद्गार हमीरपुर के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में विज्ञान भारती संस्था द्वारा आयोजित विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2020-21 कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि उपस्थित वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो० प्रेम कुमार धूमल ने व्यक्त किए। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री ने होनहार विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए उन्हें अपनी संस्कृति, भाषा और पूर्वजों के गौरवमयी इतिहास से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। 

                प्रो० धूमल ने कहा कि वर्षों की गुलामी के बाद हम लोग इतनी हीन भावना से ग्रस्त हो गए कि स्वतंत्र भारत के शासकों ने राम सेतु को काल्पनिक बताने वाला हलफ़नामा अदालत में दे दिया, जबकि सच्चाई तो यह है कि विश्व भर में वह हमारे पूर्वज प्रभु श्रीराम थे जिन्होंने समुद्र पर ही पुल बना दिया था, जिसे हम राम सेतु के नाम से जानते हैं। हमारे पूर्वजों ने रामायण काल में पुष्पक विमानों जैसे आवागमन के हवाई साधन बना लिए थे। यह हमारा गौरवमयी इतिहास है, आज की पीढ़ी को अपना इतिहास जान कर उससे प्रेरणा लेनी चाहिए, जिससे वह अपना आत्मविश्वास बढ़ाएंगे और अंततः देश को आगे ले जाने में योगदान देंगे। डॉ श्यामा प्रशाद मुखर्जी ने कहा था जो लोग अपना इतिहास नहीं जानते, वह कभी उस पर गर्व महसूस नहीं कर सकते और न ही उनमें आत्मविश्वास पैदा होगा तो वह राष्ट्र कैसे आगे बढ़ा सकेंगे। 

              पूर्व मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमें अपनी संस्कृति को समझ कर, जान कर उससे प्रेरणा लेने की ज़रूरत है। हमारी वर्षों पुरानी संस्कृति ने विश्व के कई देशों को दिशा दी है, आगे बढ़ने की राह दिखाई है। जर्मनी सरीखे विश्व के महाशक्तिशाली देश संस्कृत भाषा मे लिखे वेदों को अपने यहां ले गए, वहां के वैज्ञानिकों ने हमारे वेदों को पढ़ कर आगे बढ़ने की प्रेरणा ली। यह हमारी संस्कृति और हमारी भाषा का गौरव है। जिसका ज्ञान हमें होना चाहिए। लेकिन हम पाश्चात्य रंगों से आकर्षित होकर अपनी भाषा ही भूल गए। हमारे ही वेदों को हमने अंग्रेजी भाषा के मोह में वेदा कहना शुरू कर दिया, योग को योगा। हमें अपनी गलती सुधारनी होगी। इसका सही माध्यम है जानकारी, इन्फॉर्मेशन। जब हमें अपने गौरवशाली इतिहास, महान संस्कृति और भाषा का सही ज्ञान होगा तभी हम उस पर गर्व महसूस कर अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकेंगे। 

          प्रो० धूमल ने कहा कि हमसब बहुत सौभाग्यशाली हैं जो हमें प्रधानमंत्री नरेन्दर मोदी जी जैसे वैज्ञानिक सोच रखने वाले नेता मिलें हैं। आज भारत के वैज्ञानिक कोविड वैक्सिनेशन बना कर न केवल देशवासियों की रक्षा करने में बल्कि विश्व के कई देशों को यह वैक्सिनेशन देने में सफल हुए हैं तो यह प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सोच और दृढ़ संकल्पित नेतृत्व का परिणाम है जो भारत को विश्वगुरु बना कर माँ भारती को परमवैभव तक पहुंचाना चाहते हैं। हमारे देश के वैज्ञानिकों ने कोरोना महामारी जिससे दुनिया त्रस्त है, के रोकथाम के लिए दो वैक्सिनेशन बना भी ली और चार वैक्सिनेशन औऱ लगभग बनने को तैयार हैं। इस बात का हमें गर्व होना चाहिए। दुनिया ने कई महामारियों का प्रकोप झेला है, तब देशों के देश और दुनिया की महाशक्तियां सयुंक्त रूप से उन परिस्थितियों से झूझती थी और आज अकेला भारत ही न केवल अपने लोगों को बल्कि विश्व के कई देशों को इस बीमारी के प्रकोप से बचाने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। 

       प्रो० धूमल ने कहा कि हमारे नित्य जीवन के कई हिस्सों में वैज्ञानिक योग होता है। ज़रूरत है वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उसे समझने और परखने की। यही आदत देश की वैज्ञानिक प्रतिभा को निखारेगी भी और उसे आगे भी लायेगी। जब देश की वैज्ञानिक प्रतिभा निझरेगी तब देश को आगे बढ़ने से कोई भी नहीं रोक पायेगा। प्रो० धूमल ने कहा कि विद्यार्थी विज्ञान मंथन जैसे प्रतिस्पर्धात्मक कार्यक्रम आयोजित कर विज्ञान भारती संस्था निस्संदेह देश को आगे ले जाने कि दिशा में सही कदम बढ़ा रही है। इस अवसर पर एनआईटी के डायरेक्टर प्रोफेसर ललित अवस्थी व विज्ञान भारती संस्था के प्रोफ़ेसर धीमान सहित अन्य कई बुद्धिजीवी, विद्यार्थी और उनके अभिभावक उपस्थित रहे।

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