प्रदेश की राजधानी के एयरपोर्ट से उड़ान होगी या नहीं। इसका खुलासा मंगलवार को दिल्ली से आने वाली उच्च स्तरीय टीम करेगी। केंद्रीय नागरिक उडडयन मंत्रालय के तहत काम करने वाली डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन संस्था के साथ अलायंस एयर के अधिकारी दो दिवसीय दौरे पर शिमला आ रहे हैं।
प्रदेश सरकार के आला अधिकारियों की टीम के साथ 29 सितंबर को बैठक हुई थी। जिसमें शिमला दौरे के लिए समय निर्धारित हुआ था। जुब्बडहटटी एयरपोर्ट से क्या हवाई उड़ाने संभव है या नहीं। इसको प्रमाणिक करने के लिए ये टीम सभी पहलुओं पर विचार करेगी। इसके बाद ही पता चलेगा कि यहां पर नॉन शेडयूल व शेडयूल उड़ाने होंगी। फिलहाल एयरपोर्ट रिपेयर के लिए पिछले तीन महीनों से बंद पड़ा हुआ था। किसी प्रकार की कोई उड़ान यहां से नहीं हो रही थी। तीन महीनों के दौरान एयरपोर्ट अथारिटी ने पटटी की चौड़ाई को 23 मीटर से बढ़ाकर 30 मीटर कर दिया है। इसके अतिरिक्त रन-वे के दोनों ओर लाइट टेस्टिंग व रव-वे की मुरम्मत कर दी है।
12 सितंबर 2012 से उड़ान नहीं
जुब्ब्डहटटी एयरपोर्ट से किंग फिशर की अंतिम उड़ान हुई थी। उसके बाद यहां से शेडयूल उड़ाने बंद पड़ी हैं। 12 सितंबर 2012 के बाद से उड़ाने शुरू करने का मामला केंद्र सरकार के समक्ष बार-बार उठता रहा है। लेकिन रन-वे की लंबाई सहित कई खामियों के कारण जहाज उड़ाने का फैसला लटकता रहा।
उड़ान यहां क्यों नहीं
सवाल महत्वपूर्ण है कि हवाई उड़ानें यहां क्यों नहीं हो रही। जबकि भूंतर का एयरपोर्ट शिमला से छोटा है। वहां पर एटीआर-72 उतरता है। इसी तरह से गगल एयरपोर्ट पर एटीआर-72 लंबे अर्से से लैंड व टेकओवर कर रहा है। सरकार ने सुझाया है कि कम यात्रियों को लेकर जुब्ब्डहटटी में भी दोनों एयरपोर्ट की तरह एटीआर-72 उतर सकता है।
हमें उम्मीद है कि जुब्ब्डहटटी में दिवाली तक हवाई उड़ाने शुरू हो जाएंगी। एयरपोर्ट में मौजूद सभी खामियां दूर कर दी गई है। यदि चाहें तो रात को भी उड़ान हो सकती है।
परविंद्र तिवारी, निदेशक एयरपोर्ट शिमला।