बड़े नेताओं की लड़ाई से चिंतित भाजपा चिंतपुरनी की शरण

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Chintpurni temple
पूर्व मुख्यमंत्रि शांता कुमार की चिट्ठी के बाद प्रदेश भाजपा मे शुरू हुयी बयानबाजी और छीछालेदर से उपजी चिंताओं के निवारण के लिए प्रदेश भाजपा अब माँ चिंतपुरनी की शरण मे जाएगी। पार्टी ने पहली अगस्त को चिंतपुरनी मे दो दिवसीय राज्य स्तरीय अभ्यास शिविर का आयोजन रखा है। हालांकि शिविर पहले से तय था और इसमे महासंपर्क अभियान की समीक्षा समेत अन्य कार्यों की रूप रेखा बननी थी लेकिन मौजूदा दौर की छींटाकशी का कड़ा संगयान लेते हुये भाजपा हाई कमान ने राज्य इकाई को साफ निर्देश दिये हैं की अभ्यासवर्ग मे सभी तरह की बातें क्लीयर करके आगे बढ़ा जाए। इस अभ्यास वर्ग मे पार्टी के सभी बड़े नेताओं समेत तमाम छोटे बड़े पदाधिकारी रहेंगे और ऐसे मे हाई कमान इसे शांति वार्ता के सुनहरे अवसर के रूप मे देख रही है।
शिविर मे शांता कुमार, प्रेम कुमार धूमल और दोनों धड़ों के दूसरे प्रमुख जांबाजों के अतिरिक्त जगत प्रकाश नड़ड़ा के पहुँचने की भी उम्मीद है। हालांकि नड़ड़ा का कार्यक्र्म अभी फ़ाइनल नहीं है। शिविर को पार्टी के बड़े नेता और संघ के कुछ पदाधिकारी भी संबोधित कर सकते हैं। ऐसे मे आलाकमान ने अब मौजूदा विवाद की चिताओं से इस शिविर मे ही पार पाने का फैसला किया है। देखना ये होगा की ये प्रयास कितने फलीभूत होते हैं। पार्टी प्रवक्ता गणेश दत्त ने अभ्यास वर्ग की पुष्टि करते हुये कहा है की इसमे पार्टी के सभी पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री, सांसद विधायक आदि पहुंचेंगे। इसके बाद पार्टी जिला स्तर भी ऐसे अभ्यास वर्ग लगाएगी। ऐसे मे अब तमाम सियासी पंडितों की नज़रें इस अभ्यास वर्ग पर जा टिकी हैं। दूसरे शब्दों मे इस अभ्यास वर्ग से पार्टी के भीतर की अगली सियासत की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। यदि दोनों पक्षों मे सुलह हो गयी जैसा की हाई कमान चाहता है तो ठीक वरना ये अभ्यासवर्ग शक्ति परीक्षण मे भी बदल सकता है।
पार्टी अध्यक्ष सतपाल सिंह हालांकि सुलह सफाई की बातों से इंकार करते हैं और उनके मुताबिक सब ठीक है। लेकिन सतपाल ये जरूर मानते हैं की इस तरह के अभ्यास वर्गो मे चूंकि सभी नेता एक ही स्थान पर रहते हैं साथ भोजन आदि करते हैं और ऐसे मे सौहार्द और मजबूत होता है। वैसे सतपाल खुद इस शिविर को लेकर खासे उत्साहित हैं। वुधवार को ही पार्टी अध्यक्ष ने सभी नेताओं को शांता कुमार की चिट्ठी को लेकर अनावश्यक बयानबाजी नहीं करने के कड़े निर्देश दिये थे। लेकिन बीरबार की अखबारें फिर दोनों खेमों की बयानबाजी से भरी रही। ऐसे मे पार्टी प्रमुख को भी लगता है की जब आमने सामने बैठकर बात होगी तो मामला शांत हो जाएगा। वैसे देखना ये भी होगा की क्या शांता कुमार इस अभ्यास शिविर मे हिस्सा लेंगे भी या नहीं क्योंकि अगर अतीत पर नज़र दौड़ाई जाए तो पाएंगे की शांतकुमार विवादो के समय मे पार्टी कार्यक्रमों से किसी न किसी बहाने किनारा कर लेते हैं ताकि सीधे टकराव से बचा जा सके । यहाँ तक की पार्टी के राज्य कार्यालय दीप कमाल मे तो उन्होने बरसों से पाँव नहीं धरा.

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