चीन चाहता है हिमाचल मैं फिल्म बनाना

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Chinese film shooting Himachal
सीमा पर तनातनी और तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ कूटनीतिक कलाबाजियों केबीच अब ड्रैगन ने हिमाचल मे फिल्म बनाने की इच्छा जताई है। चीन के सिनेमा उद्योग मैं हिमाचल के जबर्दस्त फैन मौजूद है जो लगातार अपनी सरकार पर हिमाचल मैं फिल्मांकन को लेकर दवाब बनाए हुये हैं। इसी का नतीजा है की चीन ने अधिकृत तौर पर केंद्रीय विदेश मंत्रालय को हिमाचल मैं उनके फिल्म निर्माताओं को फिल्मांकन की इजाजत देने का आग्रह किया है। विदेश मंत्रालय ने भी इसे द्विपक्षीय संबंधो को सुरधारने के अवसर के तौर पर हाथों हाथ लेते हुये प्रक्रिया शुरू कर दी है। और यदि सब ठीक रहा तो कोई बड़ी बात नहीं की चीनी कलाकार और फिल्म निर्देशक इस बार सर्दियों मैं यहाँ शूटिंग करते दिखें। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने फ़्डाइनिक सवेरा से नाम ना छापने की शर्त पर इस महातव्कांक्षी प्रोजेक्ट की पुष्टि की है।

विदेश मंत्रालय ने चीनी दूतावास के माध्यम से आए इस प्रस्ताव के बाद हिमाचल के पर्यटन विभाग और भाषा संस्कृति विभाग को संयुक्त रूप से फिल्मांकन की संभावनाएं तलाशें को भी कहा था। इसके बाद राजी पर्यटन विभाग ने एक व्यापक प्रेजेंटेशन तयार करके दिल्ली मैं दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की टीम को भी दिखाई है । पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक मनोज शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुये बताया की हमने शूटिंग की संभावित जगहो के चित्र और विडियो उपलव्ध करवाए हैं। क्या फैसला हुआ ये विदेश मंत्रालय के अधिकार मैं है उसपर ज्यादा टिप्पणी फिलवक्त नहीं की जा सकती। लेकिन सभी इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साहित हैं।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार चीन हिमाचल मैं एक पीरियड फिल्म का फिल्मांकन चाहता है जिसका आरंभिक बजट एक सौर करोड़ के आस पास है। चूंकि सारी शूटिंग हिमाचल मैं ही करने की बात काही गई है लिहाजा अनुमान है की प्रदेश को इससे झान 23 करोड़ का सीधा राजस्व लाभ मिलेगा वहीं अपरोक्ष रूप से फिल्म निर्माताओं के और अधिक संख्या मैं हिमाचल के प्रति आकर्षित होने की भी उम्मीद है।

उल्लेखनीय है की हिमाचल मे आखिरीबार विदेशी बाइनर के तहत – द सेक्रेड थ्रेड नामक हॉलीवुड फिल्म का फिल्मांकन हुआ था। लेकिन इतने बड़े बजट पर अभी तक कोई फिल्म शूट नहीं हुयी है जितना प्रस्ताव चीन से मिला है। हालांकि भारत सरकार चीन के फिल्म प्रस्ताव से उत्साहित जरूर है लेकिन सूत्रों की माने तो जल्दबाज़ी मैं कोई फैसला नहीं लेना चाहती । इसके पीछे जहां हिमाचल की चीन के साथ लगती सीमा है वहीं निर्वासित तिब्बती सरकार और धर्मगुरु दलाई लामा का एंगल भी विचारणीय है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों की माने तो इस बारे गृह मंत्रालय की भी सलाह ली जा सकती है लेकिन जो भी होना होगा इसी तिमाही मैं हो जाएगा।

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