अनुराग खेले, अब हिमाचल में भी खेला होबे…

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● नन्ही सी ट्रेन के लिए बधाइयां,करोड़ों के सीयू बजट अलॉटमेंट पर चुप्पी

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उदयवीर पठानिया, धर्मशाला पीयूष गोयल ने ट्रक टाइप रेल चलाई तो बधाई,पर अनुराग ठाकुर ने विद सम्मान, विदाउट लोन सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए 740.79 करोड़ रुपए मंजूर करवा दिए तो बधाई तक नहीं ? कंठ सुख गए हिमाचल सरकार के मंत्रियों-संतरियों के … भाई साहब,अनुराग तो प्रदेश के लिए खेल गए,पर उनके लिए दो हाथ की एक ताली तो दूर की बात,किसी की एकमात्र जीभ तक नहीं हिली ! यही हाल रहा न तो ममता दीदी के डायलॉग खेल होबे की तर्ज़ पर हिमाचल में भी खेला होबे…

यह अल्फ़ाज़ थे एक विशुद्ध भाजपाई विचारधारा के ध्वजवाहक के। यह बात उन्होंने उस मुद्दे पर कही जिसमें एक ही दिन में प्रदेश को केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने डब्बानुमा ट्रेन दी और अनुराग ने प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण को करोड़ों की धनराशि दी थी। दरअसल प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश सरकार के लिए गले की फांस बनी हुई थी। कभी जमीनी लफड़े तो कभी वित्त व्यवस्था का अभाव हिमाचल सरकार के भाव को शिक्षा की दुनिया मे लगातार गिरा रहा था। पर जब अनुराग ने यह राहत देकर प्रदेश सरकार को आफत से बचाया तो धन्यवाद तो दूर की बात बधाई तक नहीं दी गई। हैरानी तो इस बात की भी है कि पीएम नरेंद्र मोदी को भी किसी ने थैंक्स तक नहीं कहा।

ऐसे में यह कहा जा सकता है कि अब हिमाचल भाजपा की सियासी दाल में कुछ काला नहीं है। पूरी की पूरी दाल ही काली नजर आ रही है। कांगड़ा में दो दिन तक सरकार रही। कई मंचो पर भीड़ के सामने दावे किए गए। कोरोनाकाल के गमों का जिक्र हुआ,पर किसी ने भी सीयू की वजह से मिली खुशी को जनता के साथ सांझा नहीं किया। जबकि यही सीयू कांगड़ा जिला की सबसे बड़ी सियासी मर्ज रही है। मर्ज की दवा हुई तो किसी ने भी दवा देने वाले ठाकुर को दुआ तक नहीं दी। कांग्रेस का तो माना जा सकता है कि सौतिया डाह है और मुद्दा भी हाथों से निकल गया है। अनुराग ठाकुर ने इस मंजूर हुई बड़ी धनराशि को तीन सालों की टाइम लाइन में खर्चे का रास्ता साफ करवाया है। यानि साल 2022 के आम विधानसभा चुनावों तक यह निर्माण कार्य सरकार के लिए पॉलिटिकल फ्यूल और पॉलिटिकल माइलेज का काम करेगा। बावजूद इसके कहीं चूं तक होती नहीं सुनाई दी। सियासी माहिर भी हिमाचल सरकार के पहरेदारों की इस नींद से खासे हैरान हैं। इनका कहना है कि यह वही सेंट्रल यूनिवर्सिटी है जिसके नाम पर सबसे बड़े जिला कांगड़ा में भाजपा अपनी नाव चलाती आ रही थी। एक भी बड़े तो दूर छोटे नेता ने मोदी को तो ताक पर तो रखा ही साथ मे अनुराग को भी बेगाना कर दिया। जो सरकार देहरा में सीयू की स्थापना के सेहरे पर नजर रखती थी, वही सरकार जब बारात निकालने की बारी आई तो पिछड़ गई। सियासी माहिर इसे भूलवश हुई चूक मानने से इनकार करते हुए कहते हैं कि बीते विधानसभा चुनावों में इसी भाजपा ने जितनी बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स लगाकर कांग्रेस को शर्मसार करने में पूरी ताकत झोंक दी थी,उसका दिल इतना छोटा हो गया कि देश की सियासत में यूथ आइकॉन के लिए वह कमजोर साबित हो गई। वहीं भाजपा की सियासत पर नजर रखने वाले माहिर कहते हैं कि अनुराग तो सीयू का खेल मेहनत के साथ खेल गए,पर जो खेल हिमाचल सरकार और भाजपा ने खेला है, उसकी वजह से यह तय मानिए कि हिमाचल में भी जबरदस्त खेल होबे…

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